Thursday, June 25, 2026
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शेयर ट्रेडिंग-आईपीओ के नाम पर 71.97 लाख की ठगी: पहले 25 हजार जमा कराए, फिर बढ़ता गया भरोसा, बाद में लाखों रुपए लेकर बंद हुए नंबर – Chittorgarh News




शेयर बाजार में जल्दी और ज्यादा कमाई का सपना दिखाकर साइबर ठग अब लोगों को नए तरीके से निशाना बना रहे हैं। चित्तौड़गढ़ जिले के राशमी क्षेत्र के एक व्यक्ति के साथ ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां यूट्यूब पर दिखे एक निवेश विज्ञापन से शुरू हुई बातचीत धीरे-धीरे लाखों की ठगी में बदल गई। ठगों ने पहले नामी कंपनी का भरोसा दिया, फिर व्हाट्सऐप ग्रुप और मोबाइल ऐप के जरिए निवेश का ऐसा जाल बुना कि पीड़ित और उसके परिवार के खातों से करीब 72 लाख रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए। जब तक उसे ठगी का अहसास हुआ, तब तक ऐप का बैलेंस शून्य हो चुका था और संपर्क में रहने वाले सभी नंबर बंद हो गए। पीड़ित ने साइबर थाने में मामला दर्ज करवाया है। यूट्यूब के विज्ञापन से शुरू हुई पूरी कहानी पीड़ित गोपाल लाल शर्मा निवासी पहुंना, तहसील राशमी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि मार्च 2026 में वह मोबाइल पर यूट्यूब देख रहे थे। इसी दौरान उन्हें शेयर ट्रेडिंग और नए आईपीओ में निवेश से अच्छा मुनाफा दिलाने का एक विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन आईआईएफएल कैपिटल सर्विस लिमिटेड के नाम से था। उस पर क्लिक करने के बाद वह व्हाट्सऐप पर पहुंच गए, जहां उनसे बातचीत करने वाले लोगों ने खुद को कंपनी से जुड़ा बताया। आरोपियों ने कहा कि उनकी कंपनी के जरिए ट्रेडिंग और आईपीओ में निवेश करने पर 5 से 20 प्रतिशत तक ज्यादा फायदा मिल सकता है। भरोसा दिलाने के लिए रजिस्ट्रेशन फॉर्म, कंपनी से जुड़े डॉक्यूमेंट्स और एक डायरेक्टर के साइन वाला कागज भी भेजा गया। इससे गोपाल लाल शर्मा को लगा कि वह किसी फर्जी गिरोह नहीं, बल्कि असली निवेश प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं। व्हाट्सऐप ग्रुप, ऐप और स्क्रीनशॉट के सहारे बढ़ता गया भरोसा शिकायत के अनुसार 2 अप्रैल को उन्हें एक व्हाट्सऐप ग्रुप जॉइन करने का लिंक भेजा गया। ग्रुप में लगातार शेयर बाजार, ट्रेडिंग और आईपीओ से जुड़ी बातें डाली जाती थीं। इसी दौरान एक लिंक भेजकर मोबाइल में एक ऐप डाउनलोड करवाया गया और उसमें रजिस्ट्रेशन कराया गया। इसके बाद कहा गया कि निवेश की रकम कुछ बैंक खातों में जमा करनी होगी और उसका स्क्रीनशॉट ग्रुप में भेजना होगा। गोपाल ने सबसे पहले 25 हजार रुपए जमा किए। उनके मुताबिक, रकम भेजने के कुछ ही समय बाद उतनी राशि ऐप में दिखाई देने लगी। इससे उन्हें भरोसा हो गया कि पैसा सुरक्षित है और निवेश सही जगह पर जा रहा है। यही भरोसा आगे चलकर सबसे बड़ा जाल बन गया। दो महीने में अपने, पत्नी और पिता के खातों से भेज दी 71.97 लाख की रकम रिपोर्ट में गोपाल लाल शर्मा ने बताया कि 2 अप्रैल से 3 जून के बीच उन्होंने कई बार अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की। यह पैसा केवल उनके अपने खातों से ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी चंद्रकला शर्मा और पिता देवीलाल शर्मा के खातों से भी भेजा गया। शिकायत के अनुसार एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और फेडरल बैंक समेत कई खातों से कुल 71 लाख 97 हजार 900 रुपए 55 पैसे आरोपियों द्वारा बताए गए खातों में जमा कराए गए। हर बार रकम भेजने के बाद उसका स्क्रीनशॉट व्हाट्सऐप ग्रुप में भेजा जाता था और उतनी राशि ऐप में दिखने लगती थी। इतना ही नहीं, ऐप में बाद में करीब 26.31 लाख रुपए का मुनाफा भी दिखाया गया, जिससे पीड़ित को लगा कि निवेश पर अच्छा रिटर्न मिल रहा है। रकम निकालने की कोशिश की तो खुला खेल, बैलेंस हुआ शून्य मामला तब खुला जब गोपाल लाल शर्मा ने ऐप से अपनी रकम निकालने के लिए विदड्रॉल की रिक्वेस्ट डाली। उनके मुताबिक, रकम वापस नहीं आई। कुछ समय बाद ऐप खोलने पर संदिग्ध फिशिंग की चेतावनी दिखाई देने लगी और फिर ऐप में पूरा बैलेंस शून्य रुपए दिखने लगा। इसके बाद उन्होंने व्हाट्सऐप पर संपर्क करने वाली टीना मल्होत्रा और ग्रुप एडमिन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनके नंबर बंद मिले। शक होने पर जब उन्होंने आईआईएफएल कंपनी से संपर्क किया तो वहां से बताया गया कि कंपनी में इस नाम का कोई व्यक्ति नहीं है। इसके बाद उन्हें साफ हो गया कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। पुलिस से रकम वापसी और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग पीड़ित ने इस मामले की शिकायत साइबर पोर्टल पर भी दर्ज कराई है और पुलिस से पूरे मामले की जांच कर रकम वापस दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि आरोपियों ने नामी कंपनी का नाम, फर्जी ऐप, व्हाट्सऐप नंबर और निवेश ग्रुप का इस्तेमाल कर योजनाबद्ध तरीके से उन्हें झांसे में लिया। पहले छोटे निवेश से भरोसा जीता गया, फिर लगातार रकम जमा कराई गई और आखिर में पूरा नेटवर्क बंद कर दिया गया।



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