शेखपुरा में गुरुवार को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2026 लागू करने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
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एडीएम विभागीय जांच संजय कुमार की अध्यक्षता में शेखपुरा नगर परिषद ने शहर को प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ और सुंदर बनाने के लक्ष्य के साथ मंथन सभागार में यह कार्यक्रम आयोजित किया।
एडीएम संजय कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि इस नई व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करना और शहर की सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है।
नई नियमावली के अनुसार, अब कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर निस्तारित किया जाएगा।
मास्क को कागज में लपेटकर फेंकना अनिवार्य होगा गीले कचरे में रसोई का कचरा, फल-सब्जी के छिलके और बागवानी अपशिष्ट शामिल होंगे, जिनका उपयोग खाद या बायोगैस बनाने के लिए किया जाएगा। सूखे कचरे में कागज, गत्ता, प्लास्टिक, कांच और धातु जैसी सामग्री होगी, जिसे रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा।
दूषित कचरे जैसे डायपर, सैनिटरी पैड और मास्क को कागज में लपेटकर फेंकना अनिवार्य होगा। वहीं, खतरनाक कचरे जैसे पुरानी बैटरी, ट्यूब लाइट, कीटनाशक के डिब्बे और ई-वेस्ट को सावधानी से अलग रखा जाना चाहिए, क्योंकि इनमें हानिकारक रसायन होते हैं।

30 जून तक वार्षिक रिपोर्ट जमा करनी होगी नियमावली में बड़े कचरा उत्पादकों जैसे होटल, अस्पताल, स्कूल और बड़े संस्थानों के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी संस्थान का क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर से अधिक है,
प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा निकलता है, या पानी की खपत प्रतिदिन 40,000 लीटर से अधिक है, तो उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
ऐसे संस्थानों को गीले कचरे का निपटान परिसर के भीतर ही खाद या बायोगैस के माध्यम से करना होगा। साथ ही, उन्हें हर साल 30 जून तक वार्षिक रिपोर्ट जमा करनी होगी।
नगर परिषद ने पुराने डंपसाइट्स को हटाने के लिए आगामी 31 अक्टूबर की समय सीमा तय की है।

