सवाई माधोपुर के भैरू दरवाजा के पास स्थित लटिया नाले में नगर परिषद ने अवैध कचरा डंपिंग यार्ड बना रखा है। जिसे समय समय पर जलाया जाता है। अब इस मामले में स्थाई लोक अदालत, सवाई माधोपुर ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने नगर परिषद और सफाई निरीक्षक नगरपरिषद को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे मौके पर बचे हुए शेष कचरे को अधिकतम 15 दिनों के भीतर वहां से हटाएं। इसके साथ ही कोर्ट ने आबादी और ज्वलनशील पदार्थों के पास कचरा जलाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह था पूरा मामला एडवोकेट अब्दुल हासिब ने बताया कि भैरू दरवाजा स्थित ‘गुप्ता एच.पी. फ्यूल’ पेट्रोल पंप के सहायक मैनेजर रमेश सैनी ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (स्थाई लोक अदालत) में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम की धारा 22-बी के तहत एक परिवाद दायर किया था। परिवाद में बताया गया था कि नगर परिषद पिछले कई महीनों से बरसाती लटिया नाला में पूरे शहर का कचरा अवैध रूप से डंप कर रही है।
इस कचरे के कारण न केवल दुर्गंध और महामारी फैलने का खतरा बना हुआ था, बल्कि नगर परिषद के कर्मचारी इस कचरे में आग लगा देते थे. चूंकि इस डंपिंग साइट से मात्र 60-70 फीट की दूरी पर पेट्रोल पंप और घनी आबादी क्षेत्र स्थित है, इसलिए वहां कभी भी बड़े पैमाने पर अग्निकांड और जान-माल के नुकसान की गंभीर आशंका बनी हुई थी. बार-बार लिखित शिकायतों के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो पीड़ित पक्ष ने अदालत की शरण ली.
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष देवेंद्र दीक्षित और सदस्य जूली खण्डेलवाल की पीठ ने निम्नलिखित ऐतिहासिक आदेश जारी किए: 15 दिन में कचरा हटने का अल्टीमेटम दिया
नगर परिषद को निर्देश दिया गया है कि फोटोग्राफ्स में दिख रहे स्थान पर बचे हुए बाकी कचरे को हर हाल में अगले 15 दिनों के भीतर वहां से पूरी तरह साफ किया जाए। कचरा केवल उसी स्थान पर एकत्रित किया जाए जो कानूनन इसके लिए पहले से तय और चिन्हित है। किसी भी अनधिकृत या प्रार्थी के पेट्रोल पंप वाले स्थान पर कचरा नहीं डाला जाएगा। कचरा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध: अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि कचरा किसी भी ऐसे स्थान पर कतई न जलाया जाए, जहां आसपास कोई ज्वलनशील पदार्थ (जैसे पेट्रोल पंप) का भंडारण हो या फिर घनी आबादी क्षेत्र हो।अदालत ने इस मामले को पूरी तरह निस्तारित करते हुए पत्रावली को दाखिल दफ्तर करने के आदेश दिए हैं। इस फैसले से स्थानीय निवासियों और पेट्रोल पंप पर आने-जाने वाली जनता ने राहत की सांस ली है, क्योंकि लंबे समय से उनके जीवन और सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा था।
अब्दुल हासिब एडवोकेट के अनुसार पिछले साल शहर में बाढ़ की वजह यह डंपिंग यार्ड से पानी का निकास नहीं होने से भी लोगों के घरों में पानी घुस गया और काफी नुकसान हुआ।
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