स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की ओर से वनरक्षक भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए है। पूछताछ में प्रिंटिंग प्रेस से पेपर प्री-प्लानिंग के तहत चुराने का पता चला है। वनरक्षक भर्ती परीक्षा का पेपर चुराने के लि
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एडीजी (एसओजी) विशाल बंसल ने बताया- वनरक्षक भर्ती परीक्षा-2020 का पेपर 13 नवम्बर-2022 को दो परियों में हुआ था। एग्जाम में डमी कैंडिडेट के जरिए अनुचित साधनों का यूज किए जाने की शिकायतों पर बांसवाड़ा में कई केस दर्ज किए गए थे। बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आने पर एसओजी ने वनरक्षक भर्ती परीक्षा-2020 की जांच शुरू की। जांच में बांसवाड़ा निवासी हीरालाल के बड़ी संख्या में अभ्यार्थियों को एग्जाम से पहले प्रश्न-पत्र और उत्तर पढ़वाने का पता चला। एसओजी की ओर से आरोपी हीरालाल और अनुचित साधनों का यूज करने वाले अभ्यार्थियों को अरेस्ट किया गया।
सरगना पर रखा 50 हजार का इनाम आगे जांच में सामने आया कि एक अन्य सहयोगी कंवराराम निवासी उदयपुर ने भी कई अभ्यार्थियों को एग्जाम से पहले लीक पेपर को पढ़वाया था। एसओजी की ओर से आरोपी कंवराराम को भी अरेस्ट किया गया। दोनों आरोपी हीरालाल और कंवराराम ने पूछताछ में बताया कि उन्हें प्रश्न-पत्र जबराराम से मिला था। पेपर लीक का मेन सरगना जबराराम जाट निवासी नहर कॉलोनी बाड़मेर होने का पता चला। एसओजी के काफी तलाश के बाद भी आरोपी सरगना जबराराम के नहीं मिलने पर 50 हजार का इनाम रखा गया।
गुजरात से पकड़ा, 1.50 करोड़ कमाए डीआईजी परिस देशमुख के नेतृत्व में एक विशेष टीम को सरगना जबराराम की तलाश में लगाया गया। गुजरात पुलिस की मदद से राजस्थान एसओजी की टीम ने 8 दिसम्बर को 50 हजार के इनामी सरगना जबराराम को गुजरात से धर-दबोचा। पूछताछ में जबराराम से खुलासा हुआ कि उसने प्रश्न-पत्र भोपाल के प्रिंटिंग प्रेस से खरीदा था। 25 लाख रुपए में खरीदे पेपर को विभिन्न ग्रुपों में बेचकर 1.50 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की। वह साल-2019 में बाड़मेर के सरकारी स्कूल में टीचर के पद पर था। पेपर लीक प्रकरणों में शामिल होने के कारण उसे सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है।
स्टाफ की मदद से चुराया था पेपर सरगना जबराराम से पूछताछ में भोपाल की प्रिंटिंग प्रेस से पेपर चुराने वाले आरोपी खिलान सिंह उर्फ केडी डॉन निवासी सुखी सेबनिया भोपाल का नाम सामने आया। एसओजी ने भोपाल में दबिश देकर आरोपी खिलान सिंह उर्फ केडी डॉन को धर-दबोचा। पूछताछ में आरोपी खिलान सिंह ने प्रिंटिंग प्रेस से चुराए पेपर को 23 लाख रुपए में जबराराम जाट को देना बताया। एसओजी पूछताछ में सामने आया कि आरोपी खिलान सिंह वनरक्षक भर्ती परीक्षा का पेपर छापने वाली प्रिंटिंग प्रेस से जुड़ा था। एक कंपनी में बाइंडिंग का काम करता था। जिसके कारण उसको प्रिंटिंग प्रेस में काम करने वाला स्टाफ जानता था। प्रिंटिंग प्रेस स्टाफ की मदद से आरोपी खिलान सिंह ने वनरक्षक भर्ती परीक्षा की दोनों परियों के पेपर चुराए थे।
प्लानिंग कर प्रिंटिंग प्रेस से बाहर निकाला पेपर एसओजी पूछताछ में सामने आया है कि भोपाल की रूचि प्रिंटिंग प्रेस में आरोपी खिलान सिंह लेबर सप्लाई का काम करता था। प्रिंटिंग से जुड़ा पूरा काम उसकी लगाई लेबर ही संभालती थी। पेपर प्रिंट करने आने पर एक-एक शीट को काउंट किया जाता है। पेपर चोरी से बचाने के लिए हर बंडल पर सेंसर लगा रहता है। एक भी पेपर गायब करना काफी मुश्किल का काम है। प्लानिंग के तहत आरोपी खिलान सिंह ने प्रिंटिंग प्रेस स्टाफ को पेपर गायब करने के लिए शामिल किया। जिसके तहत पेपर शीट को जानबुझकर पहले गंदा किया गया। जिससे वह डिस्ट्रीब्यूट नहीं किया जा सके। डिष्ट्रीब्यूट नहीं होने पर वह नष्ट करने वाले डिस्ट्रॉय बॉक्स में चला जाएगा। डिस्ट्रॉय बॉक्स में पेपर के जाने पर बड़ी चालाकी से स्टाफकी मदद से नष्ट किए गए पेपर से एक दूसरे पेपर को बदल दिया। वनरक्षक भर्ती परीक्षा का पेपर चालाकी से चुराकर प्रिंटिंग प्रेस से बाहर लाकर बेच दिया। प्रिंटिंग प्रेस में काम करने वाले कुछ कर्मियों के नाम सामने आने पर एसओजी टीमों की ओर से उनकी तलाश की जा रही है।

