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करीब पांच साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे बॉलीवुड स्टार गोविंदा अपनी नई फिल्म ‘रूपा’ को लेकर काफी उत्साहित हैं. फिल्म के प्रमोशन के दौरान उन्होंने अपने करियर के उतार-चढ़ाव, संघर्ष और लकी नंबर 14 से जुड़ी कई दिलचस्प बातें साझा कीं. अभिनेता ने कहा कि हर मुश्किल ने उन्हें पहले से ज्यादा मजबूत बनाया और अब वह एक नई शुरुआत के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
नई दिल्ली. 90 के दशक के सुपरस्टार गोविंदा लंबे समय बाद एक बार फिर बड़े पर्दे पर वापसी करने जा रहे हैं. उनकी नई फिल्म ‘रूपा’ जल्द रिलीज होगी. फिल्म के प्रमोशन के दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोविंदा ने अपने करियर, संघर्ष और लकी नंबर 14 से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा किए.

गोविंदा ने कहा कि शायद उनकी किस्मत में कई बार लोगों का उन्हें नजरअंदाज करना ही लिखा था, ताकि वह हर बार पहले से ज्यादा मजबूत होकर लौट सकें. उन्होंने कहा, “लोग कहते थे कि अब गोविंदा फिल्मों में नहीं दिखेगा, लेकिन मैंने हमेशा नई शुरुआत की है.

अपनी बात रखते गोविंदा ने कहा कि मुझे भरोसा है कि ‘रूपा’ के जरिए जो सपना मैंने देखा है, वह पूरा होगा. यह फिल्म खास तौर पर युवाओं के लिए है और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा देगी.
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गोविंदा ने बताया कि उन्हें अंक ज्योतिष यानी न्यूमरोलॉजी पर काफी भरोसा है और 14 उनका सबसे लकी नंबर है. उन्होंने कहा, ‘मेरा नाम भी न्यूमरोलॉजी के हिसाब से रखा गया था. मैं सिर्फ 14 साल का था, तभी से इस पर यकीन करने लगा था.’

अपनी बात आगे रखते हुए गोविंदा ने कहा, ‘एक समय ऐसा आया जब मैंने सिर्फ एक हफ्ते में 14 फिल्में साइन की थीं. उसके बाद करीब 14 साल तक सुपरस्टार रहा. फिर 14वीं लोकसभा का सांसद बना.

इतना ही नहीं अपनी बातचीत में गोविंदा ने कहा कि अब 14 साल संघर्ष करने के बाद वह फिल्मों में वापसी कर रहे हैं. इस बार मैं पांच साल से ज्यादा इंतजार नहीं कर सका. अब मुझे लगता है कि मेरी नई शुरुआत यहीं से हो रही है.

गोविंदा ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि जब वह गांव में कहते थे कि एक दिन हीरो बनेंगे, तो लोग उनका मजाक उड़ाते थे. लोग कहते थे, ‘तुम न सिगरेट पीते हो, न शराब पीते हो, न नॉनवेज खाते हो और न ही लहसुन-प्याज. ऐसे में हीरो कैसे बनोगे.’

उन्होंने कहा कि कई लोगों ने उन्हें डरपोक तक कहा और साधु बनने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. गोविंदा के मुताबिक, उन्होंने हमेशा अपनी मां के सपनों को पूरा करने की कोशिश की. उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘रूपा’ जैसी फिल्में बच्चों और युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगी और ऐसी फिल्मों का बनना जरूरी है.

