Friday, June 19, 2026
Homeदेशमियाजाकी से ब्लैक कस्तूरी तक! 92 किस्मों के आम उगाकर छाए विकास

मियाजाकी से ब्लैक कस्तूरी तक! 92 किस्मों के आम उगाकर छाए विकास


Last Updated:

Agriculture Tips: मुजफ्फरपुर के रक्सा गांव के किसान विकास कुमार यादव इन दिनों खासे चर्चा में हैं. जापान, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया समेत कई विदेशों की दुर्लभ आम की किस्में भी मौजूद हैं. इसमें मियाजाकी से लेकर ब्लैक कस्तूरी सहित 92 देसी-विदेशी किस्म के आम उगाकर मैंगो मैन की पहचान बनाई. देसी जलवायु में विदेशी का आम सफल उत्पादन कर रहे हैं. पौधों की मांग नेपाल तक है. आइए जानते हैं इनसे बागवानी के खास टिप्स.

ख़बरें फटाफट

मुजफ्फरपुर: आम की बात होते ही लोगों के मन में लंगड़ा, दशहरी या मालदा जैसे पारंपरिक आमों की तस्वीर उभरती है. लेकिन मुजफ्फरपुर जिले के मरवन प्रखंड के रक्सा गांव के किसान विकास कुमार यादव ने आम की खेती को एक नई पहचान दी है. अपने बगीचे में 92 अलग-अलग किस्मों के आम लगाकर वह आज “मैंगो मैन” के नाम से प्रसिद्ध हो चुके हैं. उनके बगीचे में देसी ही नहीं बल्कि जापान, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया समेत कई विदेशों की दुर्लभ आम की किस्में भी मौजूद हैं.

एक पेड़ में 3 किस्म, मिलेगी ये वैरायटी 
विकास कुमार यादव के बगीचे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां एक ही पेड़ पर तीन अलग-अलग किस्म के आम फलते हैं. बगीचे में जापानी मियाजाकी, केन्सिंग्टन प्राइड, अनवर रटोल, अटाउल्फो, आर2ई2, अल्फांसो, रेड एम्परर, गोल्डन क्वीन और चॉक अनन जैसी विदेशी वैरायटी के आम भी लगाए गए हैं. इन आमों को देखने और इनके स्वाद का अनुभव लेने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं.

ऐसे बढ़ी आमों की नर्सरी में दिलचस्पी
विकास बताते हैं कि वह किसान परिवार से आते हैं और बचपन से ही खेती-बाड़ी में रुचि रही है. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने करीब पांच वर्षों तक कृषि विकास के क्षेत्र में काम किया. इस दौरान उन्होंने यूनिसेफ और टाटा ट्रस्ट जैसी संस्थाओं के साथ भी कार्य किया. किसानों की समस्याओं को करीब से देखने के बाद वर्ष 2014 में उन्होंने उन्नत किस्म के आमों की नर्सरी और बागवानी पर काम शुरू किया.

इनके तैयार पौधे भारत सहित नेपाल तक मांग 
आज उनके यहां तैयार किए गए पौधों की मांग बिहार के कई जिलों के अलावा देश के अन्य राज्यों और नेपाल तक है. किसान सीधे उनसे संपर्क कर पौधे खरीदते हैं. खास बात यह है कि यदि किसी तकनीकी कारण से पौधा नहीं लग पाता है, तो उसे 100 प्रतिशत रिप्लेस भी किया जाता है. यही वजह है कि किसानों का भरोसा लगातार विकास और उसके नर्सरी के प्रति बढ़ रहा है.

देसी जलवायु में विदेशी आम का किया फलन
विकास कुमार यादव बताते हैं कि कई लोगों का मानना था कि विदेशी किस्म के आम मुजफ्फरपुर की जलवायु में सफल नहीं हो सकते, लेकिन उन्होंने इसे गलत साबित कर दिखाया. उनके बागान में सभी विदेशी किस्मों में फलन हो रहा है. पौधा खरीदने आने वाले किसानों और ग्राहकों को वह पहले उन आमों का स्वाद भी चखाते हैं, ताकि वे गुणवत्ता को समझ सकें. विकास बताते है कि खर्च निकालने के बाद उन्हें हर महीने 30 से 40 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है. उनकी यह पहल न सिर्फ आय का बेहतर स्रोत बनी है, बल्कि अन्य किसानों को भी आधुनिक और विविधतापूर्ण बागवानी की ओर प्रेरित कर रही है.

About the Author

Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments