नालंदा और आसपास के जिलों के यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर है। महानगरों की तर्ज पर अब बिहारशरीफ के रांची रोड स्थित 3.73 एकड़ परिसर में एक बेहद आधुनिक और स्मार्ट बस स्टैंड का निर्माण होने जा रहा है। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) की पहल पर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड में धरातल पर उतारा जाएगा। बिहारशरीफ के साथ-साथ पर्यटन नगरी राजगीर और पड़ोसी जिले शेखपुरा के बरबीघा में भी इसी तरह के विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस आधुनिक बस स्टैंड बनाए जाएंगे, जिससे न सिर्फ यात्रियों का सफर सुगम होगा बल्कि इन छोटे शहरों का लुक भी पूरी तरह बदल जाएगा। जी-प्लस फाइव भवन में मनोरंजन से लेकर ठहरने की व्यवस्था इस परियोजना के तहत बनने वाला मुख्य टर्मिनल भवन पांच मंजिला (जी प्लस फाइव) होगा, जिसे बहुउद्देशीय हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके ग्राउंड फ्लोर पर बसों की पार्किंग और एक अत्याधुनिक वर्कशॉप होगी, ताकि बसों के रखरखाव में कोई परेशानी न हो। वहीं, ऊपरी मंजिलों पर परिवहन निगम का कार्यालय, वातानुकूलित (एसी) और नॉन-एसी वेटिंग रूम, डॉरमेटरी (शयनशाला), गेस्ट रूम और महिलाओं की सुविधा के लिए विशेष फीडिंग रूम का निर्माण किया जाएगा। यात्रियों के मनोरंजन और खरीदारी के लिए इस परिसर में शॉपिंग मॉल, होटल, बैंक्वेट हॉल, कैफेटेरिया और देश की जानी-मानी मल्टीप्लेक्स चेन पीवीआर (प्रिया विलेज रोडशो) का सिनेमा हॉल भी खोला जाएगा। इसके अलावा, परिसर में यात्रियों को चौबीसों घंटे नकदी की सुविधा देने के लिए बैंकों के एटीएम स्थापित किए जाएंगे, जबकि खान-पान के लिए ‘जीविका दीदी की रसोई’ का संचालन किया जाएगा, जहां किफायती दरों पर स्वच्छ भोजन मिलेगा। ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा: ईवी चार्जिंग स्टेशन और सीएनजी की सुविधा रांची रोड स्थित सरकारी बस स्टैंड परिसर को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटकर विकसित करने की योजना है। डिपो प्रबंधक कैसर हुसैन (नेता जी) ने बताया कि मुख्यालय के निर्देश पर परिसर की भौतिक स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट भेज दी गई है। योजना के अनुसार, परिसर के एक भाग में सीएनजी, डीजल और पेट्रोल के रिटेल आउटलेट के साथ-साथ पर्याप्त संख्या में इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे, जिससे भविष्य में पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। दूसरे भाग में मुख्य जी-प्लस फाइव भवन और बसों के ठहराव के लिए टर्मिनल का निर्माण होगा, जबकि तीसरा भाग पूरी तरह से खुला और हरा-भरा (ग्रीन जोन) रखा जाएगा, जिससे परिसर का माहौल खुशनुमा बना रहे। हालांकि, राज्य स्तर पर योजना में कुछ आंशिक बदलाव भी किए जा सकते हैं। निजी एजेंसी संभालेगी कमान इस बेहद आधुनिक बस पड़ाव के निर्माण के लिए जिला प्रशासन और पथ परिवहन विभाग के आपसी सहयोग से आवश्यक जमीन की व्यवस्था की जा रही है। चूंकि यह पूरी परियोजना पीपीपी मोड पर आधारित है, इसलिए निर्माण पूरा होने के बाद इस बस पड़ाव को एक निश्चित अवधि के लिए लीज पर निजी एजेंसी को सौंप दिया जाएगा। इस लीज अवधि के दौरान स्टैंड के रखरखाव, साफ-सफाई और संचालन की पूरी जिम्मेदारी उसी निजी एजेंसी की होगी। लीज की समय-सीमा समाप्त होने के बाद यह पूरी संपत्ति और सुविधाएं वापस परिवहन निगम को ट्रांसफर कर दी जाएंगी। सरकार का मानना है कि इस प्रकार के विश्वस्तरीय बस टर्मिनलों के निर्माण से क्षेत्र में तेजी से शहरीकरण और औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा। देश के कोने-कोने के लिए बस सेवाएं शुरू होने से अंतर्राज्यीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे यात्रियों का समय बचेगा और परिवहन निगम के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए पूरे परिसर को उनके अनुकूल (फ्रेंडली) डिजाइन किया जा रहा है, जिसमें डिजिटल सूचना प्रणाली और यात्री सहायता काउंटर भी शामिल होंगे।
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