सिलीगुड़ी के रियल एस्टेट और दिल्ली-NCR के फार्म हाउसों में बिहार के 200 से ज्यादा सफेदपोशों ने 500 करोड़ रुपए से अधिक का काला धन खपाया है। इसके लिए हवाला के जरिए रकम भेजी गई। बिहार की जांच एजेंसियां अब इन साहबों की कुंडली खंगाल रही हैं, जिससे कई बड़े नामों के बेनकाब होने की पूरी संभावना है। EOU, SVU और निगरानी की छापेमारी में लगातार सिलीगुड़ी में अवैध प्रॉपर्टी खरीदने की जानकारी मिल रही थी। इस आधार पर हमने (भास्कर ने) पड़ताल की तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में जानिए, एजेंसियों की जांच में कितने नेताओं, अफसरों, इंजीनियरों ने बिहार के लोगों से कमीशन लेकर भ्रष्टाचार का साम्राज्य खड़ा किया है और कहां-कहां लगाया…। 200 से ज्यादा नेताओं-अफसरों की सिलीगुड़ी में प्रॉपर्टी बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने पिछले कुछ दिनों में राज्य के भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इसमें उनके द्वारा राज्य के बाहर खासकर सिलीगुड़ी में निवेश किए जाने की बात सामने आई। सिलीगुड़ी में कहां-कहां निवेश? बिहार पुलिस की जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों के अनुसार बिहार के लोगों ने सिलीगुड़ी के इन इलाकों में ज्यादा निवेश किया है… बिहार के भ्रष्ट अफसरों-नेताओं से सिलीगुड़ी में प्रॉपर्टी महंगी सूत्रों के अनुसार बिहार के नेताओं-अधिकारियों द्वारा अपनी काली कमाई निवेश करने का असर है कि सिलीगुड़ी में रियल स्टेट कारोबार 60% बढ़ गया है। जमीन की कीमत दोगुनी से ज्यादा बढ़ गई है। 2023 में जिस जमीन की कीमत 15 लाख रुपए प्रति कट्ठा थी, अब उसकी कीमत 32 लाख रुपए प्रति कट्ठा हो गई है। बिहार के लोग सबसे अधिक जमीन माटीगाड़ा, उत्तर कन्या और बागडोगरा इलाके में खरीद रहे हैं। दिल्ली-NCR में भी नेताओं-अफसरों के बड़े फार्म हाउस सूत्रों ने बताया है कि कुछ अधिकारियों-नेताओं ने गुरुग्राम, दिल्ली और पंजाब में भी करोड़ों रुपए लगाए हैं। कई के पास तो गुरुग्राम के पॉश इलाके में बड़े-बड़े फार्म हाउस हैं। कुछ नेताओं-अफसरों ने विदेश में भी संपत्ति बनाई है। क्यों राज्य से बाहर काली कमाई लगा रहे नेता-अफसर? बिहार के भ्रष्ट नेताओं-अफसरों द्वारा राज्य से बाहर अपनी काली कमाई के निवेश करने की पीछे खास वजह है। राज्य बदल जाने से बिहार पुलिस के लिए जांच करना मुश्किल हो जाता है। अवैध संपत्ति छिपाना आसान होता है। सीमांचल इलाके में नौकरी करने वाले ज्यादा पैसा लगा रहे काली कमाई को सिलीगुड़ी में सबसे अधिक खपाने वाले लोग सीमांचल इलाके में नौकरी करने वाले हैं। एक अनुमान के मुताबिक बीते 3 साल में सिलीगुड़ी और इसके आसपास के इलाकों में करीब 4500 से 5000 करोड़ रुपए के रियल स्टेट का कारोबार हुआ है। बिहार पुलिस ने कैसे किया खुलासा? निलंबित डीएसपी गौतम कुमार के मामले में EOU की टीम किशनगंज से पूर्णिया तक उसकी संपत्ति की जांच कर रही थी। इसी दौरान टीम को पता चला कि गौतम ने सिलीगुड़ी में पैसे लगाए हैं। इसके बाद पड़ताल आगे बढ़ी तो इनके शागिर्द और किशनगंज के ही टाउन थाना के पूर्व थानेदार व सस्पेंडेड इंस्पेक्टर अभिषेक रंजन भी काली कमाई करने और उसे निवेश करने का मामला सामने आया। इन दोनों ने सिलीगुड़ी में काली कमाई के करोड़ों रुपए इन्वेस्ट कर रखे थे। इसके बाद जांच एजेंसी ने तय किया कि सिलीगुड़ी में कितने भ्रष्ट अधिकारियों ने पैसे लगाए हैं यह पता किया जाए। किसने अपनी काली कमाई से यहां जमीन, फ्लैट और बंगला खरीद रखा है। काली कमाई खपाने के तीन हालिया प्रमाण अमरेंद्र कुमार के खिलाफ 5 मई 2026 को EOU ने FIR (नंबर-06/2026) दर्ज की। इस पर सरकारी सैलरी से 65.08 प्रतिशत अधिक 1 करोड़ 10 लाख 64 हजार रुपए की संपत्ति रखने के आरोप थे। 6 मई को EOU की टीम ने जब पटना समेत इनके 5 ठिकानों पर छापेमारी की तो भ्रष्टाचार के जरिए अर्जित की गई संपत्तियों का पता चला। 1 करोड़ 18 लाख से अधिक की ज्वेलरी बरामद हुई थी। पता चला कि अमरेंद्र ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के बागडोगरा में 25 कट्ठा जमीन खरीद रखी है, जिसकी कीमत 4 करोड़ रुपए से अधिक है। अभिषेक ने बिहार पुलिस में 2009 बैच के सब इंस्पेक्टर के रूप में एंट्री की थी। वह प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर बना। किशनगंज में टाउन थाना का पूर्व थानेदार है। इसके खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई ने 13 अप्रैल को FIR (नंबर-05/2026) दर्ज किया था। इनके खिलाफ काली कमाई के जरिए सरकारी सैलरी से 115 प्रतिशत अधिक की संपत्ति होने का प्रमाण मिला था। इसकी वैल्यू 2 करोड़ 9 लाख 36 हजार रुपए थी। 14 अप्रैल को आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने इनके पटना स्थित घर समेत कुल 5 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसी कार्रवाई के दौरान पता चला कि थानेदारी करते-करते अभिषेक ने सिलीगुड़ी के बागडोगरा में दार्जिलिंग जाने वाली रोड पर 6 कट्ठा जमीन खरीद रखी है। इसकी कीमत 1 करोड़ से अधिक का है। इस प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए अभिषेक ने 84 लाख रुपए कैश में दिए गए थे। साढ़े तीन कट्ठा जमीन अपनी पत्नी तो ढ़ाई कट्ठा जमीन अपने साले के नाम पर ली थी। भ्रष्टाचार का मामला सामने आने के बाद किशनगंज के SP ने इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार रंजन को सस्पेंड कर दिया था। काली कमाई और 5 गर्लफ्रेंड को लेकर सुर्खियों में छाने वाला गौतम कुमार 1994 में सब इंस्पेक्टर बनकर बिहार पुलिस में शामिल हुआ था। प्रमोशन पाकर पहले इंस्पेक्टर और फिर डीएसपी बना।
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