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Fake Currency : रिजर्व बैंक ने अपनी हालिया रिपोर्ट में खुलासा किया है कि देश में नकली नोटों का चलन फिर बढ़ रहा है. सबसे ज्यादा नकली नोट 500 रुपये के हैं. इन नोटों की संख्या पिछले साल के मुकाबले बीते वित्तवर्ष में 20 फीसदी बढ़ी है. इस दौरान 20 रुपये के नकली नोटों की संख्या भी बढ़ी है, जबकि 50, 100 और 200 रुपये नकली नोट कम हुए हैं.
आरबीआई ने 500 रुपये के नकली नोट बढ़ने की चेतावनी दी है.
नई दिल्ली. साल 2016 में नकली नोटों को बाजार से बाहर करने के लिए शुरू की गई नोटबंदी का असर अब खत्म होने लगा है. रिजर्व बैंक ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि बाजार में नकली नोटों की संख्या फिर तेजी से बढ़ने लगी है. खासतौर से 500 रुपये के नकली नोटों की संख्या में तेजी बढ़ोतरी देखी जा रही है. वित्तवर्ष 2025-26 में 500 रुपये के नकली नोटों की संख्या 20 फीसदी बढ़ी है, जबकि 20 रुपये के नकली नोट भी बढ़ रहे हैं. राहत की बात ये है कि इस दौरान 50, 100 और 200 रुपये के नकली नोटों की संख्या में गिरावट देखी जा रही है.
आरबीआई ने बताया कि पिछले वित्तवर्ष में 500 रुपये के नकली नोटों का पता चलने के मामलों में 20 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है. कुल मिलाकर बैंकिंग प्रणाली में पकड़े गए नकली नोटों की संख्या 2025-26 में 5.7 फीसदी बढ़कर 2,29,746 हो गई, जो एक साल पहले 2,17,396 थी. इनमें 500 रुपये के नकली नोट सबसे अधिक रहे, जिनकी संख्या बढ़कर 1,41,907 हो गई है.
20 रुपये के भी नकली नोट बढ़े
रिपोर्ट में कहा गया है कि 20 रुपये के नकली नोटों में भी तेज वृद्धि देखी गई, जबकि 100, 50 और 200 रुपये के नकली नोटों में गिरावट दर्ज की गई. 2000 रुपये के नोटों के चलन से बाहर होने के कारण इस मूल्य वर्ग में नकली नोटों के मामले भी काफी कम हो गए हैं. आरबीआई के अनुसार, 2025-26 के दौरान चलन में मौजूद नोट की मात्रा एवं मूल्य दोनों में क्रमशः 10.5 फीसदी और 11.9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. यह अर्थव्यवस्था में नकदी की मजबूत मांग को दर्शाता है. 2000 रुपये के नोटों को वापस लेने के लिए मई 2023 में शुरू की गई व्यवस्था पिछले वित्तवर्ष में भी जारी रही. मार्च 2026 तक इस मूल्य वर्ग के कुल 98.45 फीसदी नोट बैंकिंग प्रणाली में वापस आ चुके थे.
सिक्कों का चलन भी बढ़ा
आरबीआई ने बताया कि सिक्कों के मामले में भी वृद्धि दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सिक्कों की कुल संख्या में 4.5 फीसदी और मूल्य में 11.4 फीसदी की बढ़त रही. एक, दो और पांच रुपये के सिक्के कुल संख्या का करीब 80 फीसदी हिस्सा रहे. 2025-26 में नोटों की छपाई के लिए मांग एक साल पहले की तुलना में कम रही, जिससे छपाई पर होने वाला खर्च एक साल पहले के 6,379 करोड़ रुपये से घटकर 4,875 करोड़ रुपये रह गया. उच्च मूल्य वर्ग के नोटों की छपाई मांग में कमी आई, जबकि 10 रुपये के नोटों की छपाई में बढ़ोतरी हुई.
नकदी का चलन और भी बढ़ा
आरबीआई ने आंकड़े जारी कर बताया कि देश में 500 रुपये के नोटों का चलन वित्तवर्ष 2025-26 में 11.2 फीसदी बढ़ गया और मुद्रा प्रणाली में इनकी सर्वाधिक हिस्सेदारी बरकरार रही. मार्च 2026 के अंत तक 500 रुपये के नोटों की संख्या बढ़कर 7,05,482 हो गई, जो एक साल पहले 6,34,458 थी. मूल्य के लिहाज से इन नोटों का कुल चलन 35.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वित्तवर्ष में 31.72 लाख करोड़ रुपये था. चलन में मौजूद कुल नोटों की संख्या में 500 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी 41.2 फीसदी रही, जो सबसे अधिक है. मूल्य के आधार पर इनकी हिस्सेदारी 86 फीसदी से भी ज्यादा रही.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

