Saturday, May 16, 2026
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बजरी माफियाओं पर ‘जीरो टॉलरेंस’: धौलपुर समेत 5 जिलों में बड़ा एक्शन, अवैध बजरी परिवहन पर पूरी रोक; जुर्माने पर नहीं छूटेंगे जब्त वाहन – Dholpur News




राजस्थान में अवैध बजरी खनन और परिवहन पर अब तक की सबसे कड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, बूंदी और कोटा जिलों में 15 मई 2026 से अवैध बजरी परिवहन में पकड़े गए वाहनों को कंपाउंडिंग के जरिए छोड़ने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अब डंपर, ट्रैक्टर-ट्रॉली, जेसीबी और ट्रेलर जैसे जब्त वाहन सीधे न्यायिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई का सामना करेंगे। वहीं, बिना VLTD डिवाइस वाले खनन वाहनों पर भी जल्द सख्त कार्रवाई होगी। अब जुर्माना भरकर नहीं छूटेंगे वाहन अब तक खान विभाग अवैध बजरी परिवहन में पकड़े गए भारी वाहनों को करीब एक लाख रुपए और ट्रैक्टर-ट्रॉली को लगभग 25 हजार रुपए तक का जुर्माना लेकर छोड़ देता था। लेकिन नए आदेश लागू होने के बाद जब्त वाहन आसानी से रिहा नहीं हो सकेंगे। सरकार के इस फैसले को अवैध खनन के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस नीति” की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे बजरी माफियाओं और अवैध परिवहन में शामिल लोगों पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सख्ती खान एवं भू-विज्ञान निदेशालय, उदयपुर द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका संख्या 02/2026 में 17 अप्रैल और 14 मई 2026 को दिए गए निर्देशों की पालना में की गई है। विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और अवैध बजरी परिवहन के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाए। चंबल सेंचुरी में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में लगातार हो रहे अवैध बजरी खनन को लेकर सुप्रीम Court ने गहरी नाराजगी जताई है। अदालत ने प्रदेश के गृह, खनन, वित्त, वन, पर्यावरण, परिवहन और सड़क सुरक्षा विभागों के प्रमुख सचिवों को 19 मई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि अवैध खनन में शामिल अधिकारियों और वाहन चालकों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई है। साथ ही बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों पर रोक लगाने और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत हलफनामा भी मांगा गया है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के सदस्य ने धौलपुर का दौरा कर अवैध बजरी खनन की स्थिति का निरीक्षण किया था और अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी। घड़ियाल, मगरमच्छ और डॉल्फिन पर बढ़ा खतरा चंबल नदी में लगातार हो रहे अवैध बजरी खनन का असर अब वन्यजीवों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे घड़ियाल, मगरमच्छ और डॉल्फिन जैसे दुर्लभ जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि नदी की सतह और प्रवाह में बदलाव से इन जीवों के अस्तित्व पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसी कारण सुप्रीम कोर्ट इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है।

बिना VLTD अब नहीं चल सकेंगे खनन वाहन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद परिवहन विभाग ने भी खनन कार्य में लगे वाहनों और मशीनों के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। अब सभी पंजीकृत खनन वाहनों में AIS-140 मानकों के अनुसार व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) लगाना अनिवार्य होगा। यह नियम ट्रैक्टर, एक्सकैवेटर, लोडर, ड्रेजर्स और खनन कार्य में उपयोग होने वाले अन्य उपकरणों पर भी लागू रहेगा। इससे प्रशासन वाहनों की लोकेशन और गतिविधियों पर लगातार नजर रख सकेगा। 15 जून और 15 जुलाई की डेडलाइन अहम परिवहन विभाग के अनुसार 15 जून 2026 के बाद बिना VLTD लगे वाहनों का रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण, परमिट जारी करना और फिटनेस नवीनीकरण जैसी सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। इसके बाद 15 जुलाई 2026 से बिना डिवाइस संचालित वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की जाएगी। ऐसे वाहनों को जब्त करने और संचालन रोकने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई अवैध बजरी खनन मामले में अब सभी की नजर 19 मई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि अदालत इस मामले में और भी सख्त निर्देश जारी कर सकती है, जिससे प्रदेश में अवैध खनन पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है।



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