Sunday, May 17, 2026
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धुआं उठते ही जान-बचाने को झाड़ियों में कूदे यात्री: बच्चों को बचाने की जद्दोजहद में सामान छूटा; 15 मिनट में 2 कोच जले – Kota News


‘अचानक से कोच में आग लग गई, सभी लोग चिल्लाने लगे- जल्दी निकलो, जल्दी निकलो। हम लोग आवाज सुनकर उठे। कोच में धुआं ही धुआं भर गया था। सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। बच्चों को उठाकर किसी तरह कोच से बाहर निकले। इसी अफरा-तफरी में एक बड़ा और एक छोटा बैग को

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यह कहना है बी-1 कोच में सफर कर रही मीरा यादव का। मीरा अपने पति और दो बच्चों के साथ बड़ौदा से दिल्ली जा रही थीं। त्रिवेंद्रम (तिरुवनंतपुरम) से हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली) जा रही राजधानी एक्सप्रेस (12431) में आग लग गई थी।

हादसा रविवार सुबह करीब 5.15 बजे कोटा मंडल के लूणी रीछा-विक्रमगढ़ आलोट (मध्य प्रदेश) स्टेशन के बीच हुआ। आग ट्रेन के कोच नंबर B-1 और उसके पीछे लगे सेकेंड लगेज कम गार्ड वैन में लगी थी। घटना में जनहानि तो नहीं हुई, लेकिन लोगों के डॉक्यूमेंट्स, मोबाइल, गहने, जूते-चप्पल और कपड़े जल गए। कोच से निकलने की जद्दोजहद में कुछ यात्री चोटिल भी हुए।

कोटा स्टेशन पर पहुंचने पर यात्रियों ने अपने सामान के नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की। करीब एक घंटे तक हंगामा चलता रहा।

एक घंटे तक कोटा स्टेशन पर यात्रियों ने किया हंगामा

ट्रेन के कोटा पहुंचने पर कुछ यात्रियों कीआंखों में आंसू थे, तो कुछ के मन में खौफ। यात्रियों ने रेलवे की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई। यात्रियों का कहना था कि धुआं उठने के मात्र 15 से 20 मिनट बाद ही कोच पूरी तरह जल गए। जैसे-तैसे बाहर निकलकर अपनी जान बचाई, लेकिन कोच से सामान निकालने का समय नहीं मिल सका।

दमकल की गाड़ियां भी आग लगने के दो-तीन घंटे बाद मौके पर पहुंचीं। कोटा स्टेशन पहुंचने पर यात्रियों ने नुकसान की भरपाई और मुआवजे की मांग की। करीब एक घंटे तक हंगामा चलता रहा। रेलवे प्रशासन ने कोच में सवार यात्रियों को सहायता के तौर पर 5-5 हजार रुपए का लिफाफा दिया।

कोच से निकलने की जद्दोंजहद मे कुछ यात्री चोटिल भी हुए।

कोच से निकलने की जद्दोंजहद मे कुछ यात्री चोटिल भी हुए।

यात्रियों की जुबानी, हादसे की कहानी…

झाड़ियों में कूदकर बचाई जान

गोवा से दिल्ली जा रही यात्री विरमति ने बताया- हम कोच में सो रहे थे। इसी समय एक अंकल टॉयलेट जाने के लिए उठे थे, उन्हें कोच से धुआं उठता दिखाई दिया। अंकल ने सभी को आग के बारे में बताया। तब तक रेलवे के किसी स्टाफ ने आकर हमें सूचना नहीं दी थी।

हम जान बचाने के लिए तुरंत कोच से नंगे पैर ही बाहर की तरफ भागे। ट्रैक के आसपास खेत, कांटे और झाड़ियां उगी हुई थीं, हम उन्हीं झाड़ियों में कूद गए। हमारा सारा सामान कोच में ही रह गया और सबकुछ जलकर राख हो गया। बैग में 25-30 हजार रुपए नकद भी रखे थे। इस हादसे में हमारा करीब 70-80 हजार रुपए का नुकसान हुआ है।

3 घंटे देरी से पहुंची दमकल, तब तक जलकर राख हो चुका था जनरेटर यान

बारां जिले के अंता निवासी मोईज बोहरा भी इसी कोच में सूरत से कोटा आ रहे थे। मोईज ने बताया- सुबह 5 बजे अचानक कोच में धुआं दिखाई दिया। उस वक्त सब लोग नींद में थे। देखते ही देखते कोच में भगदड़ मच गई। यात्री अपना सामान कोच में ही छोड़कर नीचे उतरने लगे और खेतों में जाकर बैठ गए।

दमकल की गाड़ियां भी घटना के करीब दो से तीन घंटे बाद सुबह 8 बजे मौके पर पहुंचीं। तब तक कोच और जनरेटर यान (एसएलआर कोच) पूरी तरह जल चुके थे। लोगों का सारा सामान और मोबाइल जलकर राख हो गया। भागते समय पैरों में चप्पल तक नहीं रही, खेतों की तरफ भागे तो पैरों में कांटे चुभ गए।

अचानक सायरन बजा, तब हमारी आंख खुली संजू मिश्रा भी अपने पति व बच्चों के साथ सूरत से दिल्ली जा रही थीं। संजू ने बताया- अचानक एसएलआर (SLR) कोच की तरफ से धुआं उठता दिखाई दिया।

देखते ही देखते बी-1 कोच में धुआं भरने लगा। जब एकदम से सायरन बजा, तब हमारी आंख खुली। पूरे डिब्बे में धुआं-धुआं हो रहा था।

हम लोग बच्चों को लेकर तुरंत बाहर निकले। हमारे बाहर निकलने के मात्र 15-20 मिनट में ही पूरा डिब्बा जलने लगा। बैग में 25 हजार रुपए नकद और सोने का मंगलसूत्र, कान के झुमके व अंगूठी रखी थी। बच्चों, पति और मेरे कपड़े भी उसी में थे। हमारी चप्पलें भी कोच में ही छूट गईं और जलकर राख हो गईं।

कल ही खरीदा था मोबाइल, आज आग की भेंट चढ़ गया

महाराष्ट्र निवासी प्रीति चौहान अपने पति और बच्चों के साथ कश्मीर घूमने जा रही थीं। प्रीति ने बताया- हमने घूमने के लिए बहुत सारा सामान पैक किया था, जो कुल चार बैग (लगेज) में था। कोच में आग लगने के बाद हम किसी तरह सिर्फ एक बैग ही बाहर निकाल सके, बाकी के तीन बैग कोच में सीट के नीचे ही रह गए।

हमारी प्राथमिकता बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की थी, इसलिए सामान पीछे छूट गया। कल ही मैंने एक नया मोबाइल खरीदा था, वह भी कोच में जलकर राख हो गया।

एक घंटे तक किसी ने सुनवाई नहीं की

पलवल से दिल्ली जा रहे यात्री दुष्यंत ने बताया- बैग में हमारे डॉक्यूमेंट्स, एजुकेशन के कागज और लैपटॉप था, जो सब जल गए। हमसे कहा गया था कि कोटा पहुंचने पर FIR दर्ज होगी, लेकिन यहां एक घंटे तक किसी ने सुनवाई नहीं की और न ही FIR काटी गई। FIR के आधार पर ही हम दोबारा अपने दस्तावेज़ निकलवा सकते हैं। हमने फिलहाल आवेदन (एप्लीकेशन) दे दिया है।

मैं दौड़कर ट्रेन से कूदा, दोनों पैरों में चोट

अमनदीप ने बताया- मैं मुंबई से दिल्ली जा रहा था। तड़के 5 बजे के आसपास कोच से धुआं उठने लगा। धुआं देखते ही कोच में अफरा-तफरी मच गई और लोग जैसे-तैसे बाहर निकलने लगे। अमन ने बताया- मैं दौड़कर ट्रेन से कूदा, जिससे मेरे दोनों पैरों में चोट आई है।

मेडिकल सुविधा के नाम पर मौके पर कोई व्यवस्था नहीं मिली। आग लगने के कारण ट्रेन के ऊपर से गुजर रहा बिजली का तार (OHE) भी टूट गया था। रेलवे की टीम ने प्रभावित कोच को ट्रेन से अलग किया और यात्रियों को दूसरे कोच में बैठाकर कुछ घंटों बाद कोटा के लिए रवाना किया।

आग को ट्रेन के दूसरे हिस्से में फैलने से रोकने के लिए कोच को करीब 20 मिनट बाद अलग कर दिया गया था

आग को ट्रेन के दूसरे हिस्से में फैलने से रोकने के लिए कोच को करीब 20 मिनट बाद अलग कर दिया गया था

अलार्म काफी देर बाद में बजा

रत्नगिरी से दिल्ली जा रहे यात्री शहजाद ने बताया- कोच में सब सो रहे थे। तभी एक अंकल को धुआं दिखाई दिया। उन्होंने शक जताया कि कोच में धुआं कहां से आ रहा है, जिसके बाद धीरे-धीरे सबको पता चला कि आग लग गई है। अगर उस दौरान थोड़ी भी आग बढ़ जाती तो भारी भगदड़ मच जाती। धुआं उठने के बाद हल्की आग दिखी और ट्रेन रुक गई। अलार्म काफी बाद में बजा।

लोगों को पकड़-पकड़कर बाहर निकाला

कोच में सेना (आर्मी) के 2 जवान भी सफर कर रहे थे, जो छुट्टी पर त्रिवेंद्रम से दिल्ली जा रहे थे। जवान जितेंद्र ने बताया- आग लगने के बाद लोग जान बचाने के लिए बाहर भागने लगे। कई लोगों के सामान और सूटकेस सीट के नीचे ही रह गए।

आग तेजी से बढ़ रही थी। हमने बड़ी मुश्किल से लोगों को पकड़-पकड़कर बाहर निकाला। इस दौरान मेरे पैर में चोट लगी और शर्ट पूरी काली हो गई। मेरा बैग कोच में ही रह गया और पूरा जल गया।

फायर सिलेंडर नहीं कर रहा था काम

जवान अरुण भट्ट ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए बताया- कोच के अंदर फायर सिलेंडर (अग्निशमन यंत्र) मौजूद था, लेकिन वह काम नहीं कर रहा था, जिससे आग नहीं बुझाई जा सकी।

यह खबर भी पढ़िए- त्रिवेंद्रम-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस के 2 कोच में आग लगी:गार्ड ने लोको पायलट को सूचना दी, 15 मिनट में 68 यात्री बाहर निकाले; सभी सुरक्षित

कोटा मंडल में त्रिवेंद्रम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस (12431) के 2 कोच में आग लग गई। हादसा रविवार सुबह करीब 5.15 बजे कोटा मंडल के लूणी रीछा-विक्रमगढ़ आलोट (मध्य प्रदेश) स्टेशन के बीच हुआ।

आग ट्रेन के कोच नंबर B-1 और उसके पीछे लगे सेकेंड लगेज कम गार्ड वैन में लगी थी। हादसे की जानकारी के बाद कोटा जंक्शन पर हूटर बजने लगे। राहत और बचाव टीम मौके के लिए रवाना हुई। पढ़ें पूरी खबर



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