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70 के दशक में जब अमिताभ बच्चन सुपर स्टार बनकर उभरे तब धर्मेंद्र पहले से ही इंडस्ट्री में स्थापित थे. उनकी इमेज एक्शन हीरो के तौर पर थी. ‘शोले’ में अमिताभ-धर्मेंद्र साथ में आए. फिल्म ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई. दोनों ‘चुपके चुपके’ में साथ में थे. यह फिल्म भी मैसिव हिट रही. ‘दीवार’ फिल्म ने अमिताभ को स्टारडम के शिखर पर पहुंचा दिया. अमिताभ बॉलीवुड के सबसे महंगे एक्टर में शुमार हो गए. इन सबके बावजूद धर्मेंद्र ने अमिताभ से ज्यादा फीस ली. साथ में एक और फिल्म की. फिल्म सुपरहिट रही लेकिन दोनों की दोस्ती टूट गई. इस फिल्म में धर्मेंद्र महानायक अमिताभ बच्चन से इतने घबरा गए कि उनकी नकल करने लगे. यह फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं………..
देवानंद के भाई विजय आनंद ने 70-80 के दशक में दो सुपर स्टार अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र को डायरेक्ट करने का मौका मिला. उन्हें दोनों दिग्गज स्टार की एक्टिंग को जांचने-परखने का मौका मिला. फिल्म का नाम था ‘राम बलराम’ जिसे पूरा करने में गोल्डी के पसीने छूट गए थे. फिल्म 1975 में लॉन्च की गई थी और चार साल में बनकर तैयार हो पाई थी. यह इकलौती फिल्म है जिसमें रेखा-जीनत अमान ने साथ में काम किया था. यह फिल्म इतनी मनहूस रही कि अमिताभ बच्चन-धर्मेंद्र की दोस्ती तोड़ गई. अमिताभ-यश चोपड़ा के रिश्ते खराब हो गए.

‘राम बलराम’ में अमिताभ बच्चन-धर्मेंद्र, रेखा-जीनत अमान लीड रोल में थे. इसके अलावा, अजीत, प्रेम चोपड़ा, हेलेन और अमजद खान अहम सपोर्टिं रोल में नजर आए थे. डायरेक्ट-एडिटर विजय आनंद थे. कहानी भी विजय आनंद ने ही लिखी थी. स्क्रीनप्ले कमलेश्वर-विजय आनंद ने लिखा था. डायलॉग कमलेश्वर ने लिखे थे. प्रोड्यूसर टीटो थे. अमिताभ बच्चन-धर्मेंद्र की साथ में यह तीसरी और आखिरी फिल्म थी.

फिल्म में म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. गीतकार आनंद बख्शी थे. म्यूजिक सुपरहिट रहा था. फिल्म के पॉप्युलर गाने में ‘हमसे भूल हो गई’ शामिल है. रजनीश के आश्रम से लौटकर विजय आनंद उर्फ गोल्डी ने यह फिल्म बनाई थी. प्रोड्यूसर टीटो ने राम-बलराम के लिए धर्मेंद्र-अमिताभ बच्चन को साइन किया गया था.
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प्रोड्यूसर टीटो का पूरा नाम कुशाल दीप सिंह जुनेजा था. इस फिल्म के लिए धर्मेंद्र ने अमिताभ बच्चन से ज्यादा पैसे लिए थे. धर्मेंद्र को 6 लाख रुपये जबकि अमिताभ को 4 लाख रुपये मिले थे. ज्यादा फीस लेने के बाद भी धर्मेंद्र ने इस फिल्म में
इंटरेस्ट नहीं दिखाया. फिल्म लगातार डिले हो रही थी.

इसी बीच प्रोड्यूसर टीटो ने अमिताभ बच्चन को एक और फिल्म ‘मिस्टर नटवरलाल’ में साइन कर लिया. जब इसकी भनक धर्मेंद्र को लगी तो वो खुद को इनसिक्योर समझने लगे. डेट्स देने में आनाकानी करने लगे. जब भी समय मिलता तो मशीनी अंदाज में काम करते, इमोशन गायब रहते थे. धर्मेंद्र अमिताभ के स्टारडम से इतने ज्यादा घबरा गए कि वो एक्टिंग में अमिताभ की नकल करने लगे.

विजय आनंद ने महसूस किया कि धर्मेंद्र काम पर ध्यान नहीं दे रहे. अमिताभ घर से ही डायलॉग और सीन की तैयारी करके आते थे. सीन भी जल्द समझ लेते थे. धर्मेंद्र ऐसा कुछ भी नहीं करते थे. फिल्म की डबिंग में भी नखरे दिखाए. गोल्डी ने कई बार उन्हें समझाया तो धर्मेंद्र ने उनकी मौजूदगी में डबिंग करना बंद कर दिया. राम-बलराम को कंप्लीट करने में चार साल से भी ज्यादा का समय लगा. जैसे-तैसे यह फिल्म 28 नवंबर 1980 को रिलीज हो पाई. फिल्म ने शानदार प्रदर्शन किया. यह उस साल की तीसरी बड़ी हिट फिल्म भी बनी लेकिन अमिताभ बच्चन-धर्मेंद्र के दिल में हमेशा के लिए दरार पैदा कर गई. फिर कभी दोनों सितारों ने साथ में काम नहीं किया.

इतना ही नहीं, इस फिल्म ने अमिताभ बच्चन और यश चोपड़ा की दोस्ती को भी चोट पहुंचाई. दरअसल, अमिताभ बच्चन इस फिल्म के निर्माण के दौरान मिस्टर नटवरलाल और सिलसिला फिल्म में भी काम कर रहे थे. मिस्टर नटवरलाल का डायरेक्शन राकेश कुमार कर रहे थे. राकेश कुमार ने ही स्क्रीनप्ले लिखा था. राकेश कुमार अमिताभ बच्चन के दोस्त बन गए थे. अमिताभ बच्चन मि. नटवरलाल के मुंबई टेरोटेरी के डिस्ट्रीब्यूटर भी थे. ऐसे में वो यश चोपड़ा की फिल्म ‘सिलसिला’ को समय पर डब नहीं कर पाए. जब इस बात का पता यश चोपड़ा को हुआ तो वो दुखी हुए. ‘सिलसिला’ फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई थी. ऐसे में यश चोपड़ा और अमिताभ बच्चन के रिश्ते भी खराब हो गए.

