Last Updated:
दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर जारी विवाद के बीच फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि किसी भी कलाकार को सिर्फ पैसे कमाने के लिए फिल्में नहीं करनी चाहिए. फिल्म चुनते समय उसे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी, पब्लिक इमेज और देशहित का भी ध्यान रखना चाहिए.
दिलजीत को लेकर अध्यक्ष ने कही बड़ी बात
नई दिल्ली. फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने भारत में जी5 से ‘सतलुज’ हटाए जाने पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि अगर किसी फिल्म या कंटेंट से समाज में विवाद पैदा होने की आशंका हो, तो उसकी पूरी सावधानी के साथ समीक्षा की जानी चाहिए. सिनेमा का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना भी होता है. अगर सरकार या सेंसर बोर्ड को किसी फिल्म पर बार-बार दखल देना पड़ रहा है, तो इसका मतलब है कि उसमें कुछ ऐसी बातें हो सकती हैं, जिन्हें लेकर चिंता जताई गई है.
उन्होंने कहा कि अगर सेंसर बोर्ड ने फिल्म को मंजूरी दे दी है, लेकिन बाद में सरकार को लगता है कि उससे गलत संदेश फैल सकता है, सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है या कुछ लोग उसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं, तो ऐसे मामलों पर पहले ही फैसला हो जाना चाहिए. उनके मुताबिक, सेंसर बोर्ड को रिलीज से पहले ही सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.
सेंसर के दौरान ही करवा देने थे बदलाव
बीएन तिवारी ने अपनी बात रखते हुए कहा है कि कहा कि जब एक फिल्म सेंसर की पूरी प्रक्रिया से गुजरकर पास हो जाती है, तब उसके बाद उसे रोकना सही नहीं है. इससे निर्माता को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. अगर फिल्म में बदलाव की जरूरत थी, तो वह सेंसर के दौरान ही करवा दिए जाने चाहिए थे. या तो फिल्म को शुरुआत में ही मंजूरी नहीं मिलनी चाहिए थी, या फिर मंजूरी मिलने के बाद उसे बिना किसी रुकावट के रिलीज किया जाना चाहिए.
दिलजीत पर उठाए सवाल
दिलजीत दोसांझ का नाम लेते हुए बीएन तिवारी ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि दिलजीत बार-बार विवादों में रहने वाली फिल्मों का हिस्सा क्यों बनते हैं. उन्होंने कहा कि दिलजीत पंजाब के बड़े कलाकार हैं और दुनियाभर में उनकी मजबूत फैन फॉलोइंग है. ऐसे में उन्हें हर प्रोजेक्ट सोच-समझकर चुनना चाहिए, ताकि उनकी छवि पर कोई नकारात्मक असर न पड़े.उन्होंने आगे कहा कि एक कलाकार का फर्ज सिर्फ अभिनय करना नहीं होता. उसे यह भी सोचना चाहिए कि उसका काम समाज और देश पर क्या असर डालेगा. सिर्फ पैसे या दूसरे कारणों से किसी फिल्म को स्वीकार नहीं करना चाहिए. ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना हर कलाकार के फैसलों में दिखाई देनी चाहिए.
दूसरे फिल्ममेकर को भी सता रहा डर
दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ रिलीज के महज 2 दिन बाद ही भारत में जी5 से हटा दी गई. इसके बाद से ही इंडस्ट्री में नई बहस शुरू हो गई है. इसी बीच काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े की अपकमिंग फिल्म ‘द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन इन प्रोग्रेस’ के निर्देशक चेतन डीके ने भी अपना डर जाहिर किया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा माहौल में संवेदनशील विषयों पर फिल्म बनाना और उसे रिलीज करना बहुत चैलेंजिंग हो गया है. चेतन डीके ने कहा कि उनकी फिल्म अभी भी सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) की मंजूरी का इंतजार कर रही है. लेकिन’सतलुज’ के साथ जो हुआ, उसे देखकर डर भी बढ़ गया है. उन्हें उम्मीद है कि उनकी फिल्म को जल्द ही सेंसर बोर्ड से हरी झंडी मिल जाएगी.
About the Author
.jpeg?impolicy=website&width=52&height=52)
न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…और पढ़ें

