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Birthday Special: सिनेमा के पर्दे पर अपनी कड़क आवाज से खौफ पैदा करने वाले दिग्गज अभिनेता आशीष विद्यार्थी आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस वक्त उन्हें फिल्म ‘द्रोहकाल’ के लिए देश का सबसे बड़ा ‘नेशनल फिल्म अवॉर्ड’ मिला था, उस समय वे मुंबई में कमरे का किराया तक नहीं चुका पा रहे थे. पाई-पाई के लिए संघर्ष करने वाले आशीष विद्यार्थी ने कैसे साउथ से लेकर बॉलीवुड तक अपनी धाक जमाई और आज 60 की उम्र पार करने के बाद भी कैसे वे यूट्यूब और सोशल मीडिया की दुनिया पर राज कर रहे हैं, बर्थडे स्पेशल में जानिए एक्टर के असल जिंदगी स्ट्रगल स्टोरी.
Happy Birthday Ashish Vidyarthi: बड़े पर्दे पर अपनी कड़क आवाज और खूंखार विलेन के किरदारों से सबको डराने वाले आशीष विद्यार्थी असल जिंदगी में बहुत ही जिंदादिल और सरल इंसान हैं. 19 जून 1962 को केरल में जन्मे आशीष आज सोशल मीडिया की दुनिया में भी एक बड़े स्टार बन चुके हैं. वह अपने पॉडकास्ट में अक्सर कहते हैं कि उम्र सिर्फ एक नंबर है और यह आपकी सोच को कभी बूढ़ा नहीं कर सकती. आशीष को यह गहरी और सुलझी हुई सोच अपने माता-पिता से विरासत में मिली है.
एक्टर के पिता गोविंद विद्यार्थी एक स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने देश के लिए अपना सरनेम तक बदल लिया था, और उनकी मां रेबा विद्यार्थी एक मशहूर कथक गुरु थीं. इसी वजह से बचपन से ही आशीष के मन में कला के लिए एक खास जगह बन गई थी.
कभी कमरा किराए पर लेने के नहीं थे पैसे
दिल्ली के हिंदू कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद आशीष ने एक्टिंग सीखने के लिए नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा का रुख किया. इसके बाद उन्होंने मनोज बाजपेयी जैसे कलाकारों के साथ थिएटर में जमकर पसीना बहाया. साल 1994 में आई फिल्म ‘द्रोहकाल’ उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई. इस फिल्म के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड भी मिला, जो किसी भी एक्टर के लिए बहुत गर्व की बात होती है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस वक्त उन्हें यह बड़ा सम्मान मिला, उस दौर में वे मुंबई में रहने के लिए कमरे का किराया तक नहीं चुका पा रहे थे और बहुत कड़े आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे.
विलेन बनकर जीता दर्शकों का दिल
आर्थिक तंगी से जूझने के बाद भी आशीष ने हार नहीं मानी. उन्होंने ‘वास्तव’ और ‘इस रात की सुबह नहीं’ जैसी फिल्मों में विलेन बनकर बॉलीवुड में अपनी एक तगड़ी पहचान बना ली. इसके बाद उन्होंने साउथ की फिल्मों का रुख किया. तमिल फिल्म ‘दिल’ और ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘घिल्ली’ में उनके निभाए किरदारों ने उन्हें रातों-रात पूरे दक्षिण भारत में मशहूर कर दिया. उन्होंने तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और बंगाली जैसी कई भाषाओं की फिल्मों में काम करके यह साबित कर दिया कि एक सच्चे कलाकार के लिए भाषा कभी कोई दीवार नहीं बन सकती.
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