Monday, May 11, 2026
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छत्तीसगढ़ के ऑथेंटिक टेस्ट में सुस्की मछली की रेसिपी, इसमें बसी गांव की खुशबू


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Bilaspur News: जब सुस्की मछली की सब्जी बनानी हो, तब उसे गर्म पानी में उबालकर साफ किया जाता है. कड़ाही में तेल गर्म कर सरसों और जीरा का तड़का लगाया जाता है. फिर उसमें बारीक कटा प्याज, लहसुन, मिर्च, टमाटर का पेस्ट और अमचूर (आमाखोईला) डालकर अच्छी तरह पकाया जाता है.

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ की रसोई में पारंपरिक व्यंजनों की एक अलग ही पहचान है. इन्हीं में से एक है सुस्की मछली, जिसे खास तौर पर गांवों में पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है. धान की पराली में भुनी और धूप में सुखाई गई यह मछली लंबे समय तक सुरक्षित रहती है और जब पकाई जाती है, तो उसकी खुशबू और स्वाद हर किसी का दिल जीत लेता है. इसकी रेसिपी भी बहुत आसान है. सबसे पहले मछली को साफ करके धान की पराली (पैरा) में अच्छी तरह से भून लिया जाता है. इसके बाद उसे धूप में कई दिनों तक सुखाया जाता है. जब यह पूरी तरह सूख जाए, तो डिब्बे में भरकर लंबे समय तक रखा जा सकता है.

जब सुस्की मछली पकानी हो, तब उसे गर्म पानी में उबालकर साफ किया जाता है. एक कड़ाही में तेल गर्म कर सरसों और जीरा का तड़का लगाएं. फिर उसमें बारीक कटा प्याज, लहसुन, मिर्ची, टमाटर पेस्ट और अमचूर (आमाखोईला) डालकर अच्छी तरह पकाएं.

मसाला और खुशबू
करीब 10 मिनट तक पकाने के बाद इसमें हल्दी, लाल मिर्च और अन्य मसाले डालें. जब मसाले से खुशबू आने लगे और उबाल आने लगे, तब इसमें भुनी हुई मछली डाल दें. 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकने के बाद सुस्की मछली पूरी तरह से तैयार हो जाती है. यह रोटी और चावल दोनों के साथ खाने में बेहद स्वादिष्ट लगती है. यह सिर्फ एक डिश नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की पारंपरिक विरासत का स्वाद है.

कोतरी मछली की डिश भी कुछ कम नहीं
वहीं छत्तीसगढ़ में जब ठंड की शुरुआत होती है और खेतों-नरवा में बरसात का पानी भरा रहता है, तब मछली पकड़ने की हलचल तेज हो जाती है. इन्हीं दिनों में पकड़ी जाने वाली कोतरी मछली की सब्जी का स्वाद पूरे घर में खुशबू बिखेर देता है. सरसों के तेल, देसी मसालों और गांव की रसोई की पारंपरिक खुशबू से बनी यह डिश हर छत्तीसगढ़िया के स्वाद का हिस्सा है. यह मछली आकार में भले छोटी हो लेकिन स्वाद में बहुत खास होती है. कोतरी मछली की सब्जी को गर्मागर्म भात (चावल) और हरी मिर्च की चटनी के साथ परोसा जाता है, जिससे इसका स्वाद दोगुना हो जाता है. यह सब्जी न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि इस डिश में छत्तीसगढ़ की मिट्टी, मेहनत और संस्कृति का असली स्वाद भी बसता है.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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