सियासत में जब सितारे बागी हो जाएं, तो पार्टियां अक्सर उन्हें दूर कर देती हैं। कुछ ऐसा ही इस समय भोजपुरी के ‘पावर स्टार’ पवन सिंह और BJP के बीच देखने को मिल रहा है। कल तक पवन सिंह खुद को भाजपा का सच्चा सिपाही बताते थे, आज वे भगवा खेमे की मुख्य स्क्रीन से बिल्कुल गायब हैं। चाहे पश्चिम बंगाल के चुनावी रण से दूरी हो, जहां बाकी भोजपुरी दिग्गजों ने धुआंधार प्रचार किया, या फिर बिहार में सम्राट चौधरी की कैबिनेट के ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह से उनका नदारद रहना, चर्चाएं तेज हैं। …तो क्या भाजपा ने पवन सिंह को साइडलाइन कर दिया। दोनों के बीच दूरी क्यों बढ़ रही। जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में…। पवन सिंह को साइडलाइन करने के 4 बड़े संकेत 1. राज्यसभा का टिकट नहीं मिला 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) की बंपर जीत के बाद पवन सिंह और उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें इनाम के तौर पर राज्यसभा भेजेगी। पवन सिंह ने बकायदा भाजपा के सीनियर नेताओं (जैसे नितिन नवीन) से आशीर्वाद भी लिया था। लेकिन मार्च 2026 में जब भाजपा ने राज्यसभा उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी की, तो उसमें पवन सिंह का नाम गायब था। इसे पवन सिंह को बड़ा झटका माना गया। हालांकि, तब टिकट नहीं देने का अंदरखाने तर्क दिया गया… 2. बंगाल चुनाव प्रचार से पूरी तरह गायब अप्रैल-मई 2026 में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में जहां भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी, वहीं पवन सिंह को स्टार प्रचारकों की लिस्ट से बाहर रखा गया। इसके विपरीत, मनोज तिवारी, दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ और रवि किशन लगातार रैलियां कर रहे थे। 3. सम्राट चौधरी कैबिनेट के शपथ ग्रहण में नहीं आए मई 2026 में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद जब बिहार में बड़ा बदलाव हुआ और सम्राट चौधरी ने नए भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, तो पटना के इस आयोजन में पवन सिंह नजर नहीं आए। 4. सोशल मीडिया पर सम्राट को ‘बधाई’ तक नहीं दिया पॉलिटिकल एनालिस्ट केके लाल कहते हैं- ‘भाजपा पवन सिंह की लोकप्रियता से वाकिफ है, इसलिए वो उन्हें पूरी तरह पार्टी से बाहर करके अपने कोर राजपूत वोट बैंक को नाराज नहीं करना चाहती। लेकिन साथ ही 2024 की उनकी बगावत और उनके पर्सनल विवादों (तलाक और महिला आयोग नोटिस) के चलते पार्टी उनकी छवि को मुख्य मंच पर लाने से बच रही है।’ केके लाल कहते हैं, ‘पवन सिंह जब तक पूरी तरह से विवाद से बाहर नहीं आ जाते तब तक भाजपा उन्हें इसी तरह इस्तेमाल करेगी।’ BJP-पवन सिंह में क्या दूरी बढ़ रही और क्यों… सीधे तौर पर कहना उचित नहीं है कि BJP-पवन सिंह के बीच दूरी बढ़ रही है। हालांकि, ऊपर दिए गए 4 संकेत दोनों के बीच सामान्य रिश्ते की तरफ इशारा नहीं करते। अगर दोनों के बीच दूरी बढ़ रही है तो 3 कारण हो सकते हैं… 1. पत्नी ज्योति सिंह से तलाक का केस पवन सिंह और उनकी दूसरी पत्नी ज्योति सिंह के बीच तलाक का मामला कोर्ट में चल रहा है। दोनों के वकीलों की तरफ से यह साफ हुआ है कि मामला एलिमनी (गुजारा भत्ता) की रकम पर अटका है। 2. मंच पर महिला कालाकार से बदसलूकी मार्च 2026 में लखनऊ के एक स्टेज शो के दौरान हरियाणवी डांसर और अभिनेत्री अंजलि राघव ने पवन सिंह पर मंच पर बिना पूछे कमर छूने और बॉडी टच करने का आरोप लगाया। विवाद बढ़ने पर अंजलि ने इसकी शिकायत हरियाणा महिला आयोग में दर्ज कराई। आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पवन सिंह को आधिकारिक नोटिस जारी किया और फरीदाबाद दफ्तर में तलब किया। हालांकि, अभी यह केस सेटल हो गया है। 3. 2024 में की पार्टी से बगावत 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पवन सिंह को पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से टिकट दिया था। तब ममता बनर्जी की TMC ने काफी विरोध किया था। पवन सिंह को बंगाली महिलाओं पर आधारित भोजपुरी गानों के लिए ट्रोल भी किया गया था। इसके बाद पार्टी ने टिकट वापस ले लिया।
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