Monday, July 20, 2026
Homeराज्यराजस्तानकलागुरु डॉ. सुमहेन्द्र शर्मा को कला जगत ने किया याद: परंपरा...

कलागुरु डॉ. सुमहेन्द्र शर्मा को कला जगत ने किया याद: परंपरा और आधुनिकता पर हुआ सार्थक संवाद, पढ़ें शहर की प्रमुख खबरें – Jaipur News




कलावृत्त एवं राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के संयुक्त तत्वावधान में राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के पूर्व प्राचार्य, प्रख्यात चित्रकार एवं कलावृत्त संस्था के संस्थापक कलागुरु डॉ. सुमहेन्द्र शर्मा की कला यात्रा, व्यक्तित्व और उनके रचनात्मक योगदान पर आधारित विशेष व्याख्यान का आयोजन राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के मीटिंग हॉल में किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ कलाकारों, कला समीक्षकों, शिक्षाविदों, पूर्व विद्यार्थियों और युवा कलाकारों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर डॉ. सुमहेन्द्र के कला-संसार और उनके व्यक्तित्व को याद किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार विनोद भारद्वाज ने कहा कि डॉ. सुमहेन्द्र ने राजस्थानी लघु चित्रकला और आधुनिक कला के बीच एक अद्भुत सेतु का निर्माण किया। उनकी कला विशुद्ध राजस्थानी परंपराओं से जुड़ी होने के बावजूद आधुनिक संवेदनाओं से समृद्ध थी, जिसने उन्हें समकालीन भारतीय कला में विशिष्ट पहचान दिलाई। वरिष्ठ पारंपरिक चित्रकार समदर सिंह खंगारोत ‘सागर’ ने कहा कि डॉ. सुमहेन्द्र केवल एक महान चित्रकार ही नहीं, बल्कि श्रेष्ठ शिल्पी, कुशल प्रशासक और प्रभावशाली लेखक भी थे। उन्होंने कहा कि उनकी प्रत्येक कृति दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती थी और उनका सान्निध्य हर कलाकार के लिए प्रेरणादायक रहा। उन्होंने बताया कि डॉ. सुमहेन्द्र ने लघु चित्रकला को परंपरागत सीमाओं से बाहर निकालकर समकालीन अभिव्यक्ति प्रदान की। वरिष्ठ चित्रकार प्रो. भवानी शंकर शर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि परंपरा और आधुनिकता के बीच कोई विरोध नहीं, बल्कि दोनों एक-दूसरे की पूरक हैं। उन्होंने कहा कि कलाकार की सृजनात्मकता समय के साथ विकसित होती है और यही विकास भविष्य की नई परंपरा बनता है। उन्होंने डॉ. सुमहेन्द्र को इस विचारधारा का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि उनके चित्रों में भारतीय परंपरा का आधुनिक रूप स्पष्ट दिखाई देता है। साथ ही उन्होंने राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के विद्यार्थियों से प्रकृति, संस्कृति और समकालीन विषयों को अपनी कला में स्थान देने का आह्वान किया। चित्रकार एवं कवि अमित कल्ला ने कहा कि कलाकार केवल चित्र बनाने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि समाज को नई दृष्टि देने वाला संवेदनशील नेतृत्वकर्ता होता है। उन्होंने भारतीय कला दर्शन की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में रंग, रेखा और रूप केवल दृश्य तत्व नहीं, बल्कि चेतना, भाव और ऊर्जा के प्रतीक हैं। डॉ. सुमहेन्द्र की कला इसी भारतीय दर्शन की उत्कृष्ट अभिव्यक्ति थी। कलावृत्त के अध्यक्ष संदीप सुमहेन्द्र ने युवा कलाकारों से अपने चित्रों में समसामयिक विषयों को शामिल करने की अपील करते हुए कहा कि कला केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की आवाज भी है। उन्होंने कहा कि युवा कलाकारों को तकनीकी दक्षता के साथ सामाजिक सरोकारों को भी अपनी रचनाओं में स्थान देना चाहिए। राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के पूर्व छात्र एवं मूर्तिकार महावीर भारती ने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि वे मूल रूप से चित्रकला के विद्यार्थी थे, लेकिन वर्ष 1996-97 में कलावृत्त द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मूर्तिकला शिविर में डॉ. सुमहेन्द्र की प्रेरणा से उन्होंने पहली बार पत्थर पर काम किया। उन्होंने कहा कि आज वे दो दशकों से मूर्तिकला के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं और इसका सबसे बड़ा श्रेय अपने गुरु डॉ. सुमहेन्द्र को देते हैं। कार्यक्रम में डॉ. सुमहेन्द्र शर्मा की धर्मपत्नी सुमन शर्मा, उनके भाई ओमदत्त शर्मा, परिवार के सदस्य, वरिष्ठ कलाकार, शिक्षक, पूर्व छात्र और बड़ी संख्या में वर्तमान विद्यार्थी उपस्थित रहे। समारोह के अंत में राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के प्राचार्य अनिल खंडेलवाल ने सभी वक्ताओं, अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments