राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (आरईआरसी) ने ऊर्जा विकास विभाग की ओर से थर्मल पावर प्लांटों से राउंड-द-क्लॉक (आरटीसी) 3200 मेगावाट बिजली खरीदने की याचिका को खारिज कर दिया है। उपभोक्ताओं को महंगी बिजली के भार से बचाने को लेकर आयोग का यह बड़ा फैसला माना
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विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में थर्मल पावर प्लांट से बिजली औसतन 6 रु. प्रति यूनिट पड़ रही है जो अगले 25 साल में तो कोयला की बढ़त दरों को देखते हुए 15 रु. प्रति यूनिट तक पड़ सकती है। यह 25 साल की औसतन रेट 8 रु. प्रति यूनिट से अधिक होगी। जबकि सोलर व बैटरी स्टोरेज से करीब 4.50 रु. प्रति यूनिट ही पड़ती है। याचिका में ऊर्जा विकास निगम ने प्राइवेट क्षेत्र के थर्मल प्लांट से दीर्घकालिक पीपीए की अनुमति मांगी गई थी। सुनवाई के दौरान निगम ने भविष्य में बिजली की डिमांड में बढ़ोत्तरी का हवाला दिया। जबकि समता पावर, उपभोक्ता अधिकार संगठन सहित अन्य उपभोक्ता समूहों और ऊर्जा विशेषज्ञों ने कोयले पर आधारित नई खरीद को महंगा और पर्यावरण के लिहाज से अनुचित बताया।
डिस्कॉम को सीईए से दोबारा सलाह लेने के निर्देश
आयोग ने कहा कि यदि निगम ने अपने आंकलन को सही मानता है, तो वह सभी तथ्य और डेटा के साथ सीईए से दुबारा परामर्श कर सकता है। सीईए की सलाह के बाद यदि वाकई अतिरिक्त क्षमता की जरूरत सामने आए, तो डिस्कॉम नई याचिका आयोग के सामने पेश कर सकता है।
सीईए के आंकलन का हवाला
आरईआरसी ने आदेश में कहा कि निगम ने 2031-32 तक 3200 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की जरूरत दिखाई है, जबकि सीईए की ‘रिसोर्स एडिक्वेसी प्लान–2025’ के अनुसार थर्मल की राजस्थान में 2035-36 तक आवश्यकता सिर्फ 1905 मेगावाट है। आयोग ने बांसवाड़ा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट सहित कई आगामी प्रोजेक्ट को शामिल माना है।

