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Krishna Anand NEET Success Story: सीतामढ़ी के कृष्णा आनंद ने 17 साल की उम्र में NEET परीक्षा में ऑल इंडिया 1500वीं रैंक (ओबीसी में 488वीं) हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया. कोटा में तैयारी कर उन्होंने यह सफलता पाई और अब कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं. जानिए जीवन में कई उतार चढ़ाव के बाद भी कैसे सफलता हासिल की.
सीतामढ़ी: सीतामढ़ी जिला के होनहार छात्र कृष्णा आनंद ने महज 17 साल की उम्र में नीट (NEET) परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है. देश भर के करीब 23 लाख 33 हजार छात्रों ने इस परीक्षा में भाग लिया था. जिसमें लगभग 11 लाख 21 हजार छात्र उत्तीर्ण हुए हैं. इस कड़े मुकाबले के बीच कृष्णा आनंद ने ऑल इंडिया 1500वीं रैंक और अपनी ओबीसी कैटेगरी में 488वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. इस शानदार कामयाबी के बाद उनके पूरे परिवार और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल बना हुआ है.
यहां से हुई प्रारंभिक शिक्षा
कृष्णा आनंद ने अपनी इस प्रारंभिक और मुख्य सफलता का सफर कोटा से पूरा किया है. उन्होंने कक्षा 8वीं से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई कोटा में ही रहकर की और वहीं से नीट परीक्षा के लिए दिन-रात डटकर तैयारी की. कृष्णा ने अपनी इस बड़ी सफलता का पूरा श्रेय अपने बड़े भाई, माता-पिता और उन सभी शिक्षकों को दिया है जिन्होंने कदम-कमद पर उनका मार्गदर्शन किया. उनके बड़े भाई वर्तमान समय में दिल्ली से कंप्यूटर साइंस (CS) ब्रांच में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं, जो उनकी प्रेरणा के मुख्य स्रोतों में से एक रहे हैं.
बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना
कृष्णा के परिवार में पहले से ही चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद हैं, जिससे उन्हें बचपन से ही डॉक्टर बनने की प्रेरणा मिली. उनके अंकल डॉ. अमलेंदु कुमार एक प्रतिष्ठित एमडी रेडियोलॉजिस्ट हैं और उनका आनंद डायग्नोस्टिक सेंटर नाम से एक अस्पताल है, जिसकी पूरी देखरेख और मैनेजमेंट कृष्णा के पिता धर्मेंद्र कुमार संभालते हैं. अपने चाचा को मरीजों की सेवा करते देख कृष्णा के मन में भी देश के सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरों में शामिल होने का सपना जागा, जिसे उन्होंने 12वीं कक्षा के साथ ही अपनी कड़ी मेहनत से साकार कर दिखाया.
आए कई उतार-चढ़ाव, नहीं हारी हिम्मत
अपनी संघर्ष की कहानी बयां करते हुए कृष्णा बताते हैं कि 8वीं से 10वीं तक की पढ़ाई तो सामान्य रही, लेकिन असली और मुख्य तैयारी 11वीं और 12वीं कक्षा से शुरू हुई. उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. वे कोचिंग से मिलने वाले स्टडी मटेरियल और लेक्चर्स पर पूरा ध्यान देते थे. कृष्णा का मानना है कि परीक्षा पास करने के लिए थ्योरी से ज्यादा जरूरी मॉक टेस्ट और सवालों की प्रैक्टिस करना है. उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान ज्यादा से ज्यादा सवालों को हल करने पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया.
आया 1500 रैंक, भविष्य में बनना है यह
कृष्णा की इस अद्भुत सफलता पर उनके परिवार के साथ-साथ उनके पारिवारिक सदस्य चाचा डॉ. प्रवीण कुमार ने गहरी खुशी व्यक्त की है. उनका कहना है कि इतने लाख छात्रों के बीच 1500 रैंक लाना सीतामढ़ी जिला के लिए एक बेहद सराहनीय और गर्व की बात है. वहीं कृष्णा के पिता धर्मेंद्र कुमार और आंगनबाड़ी सेविका के रूप में कार्यरत उनकी माता रेनू रानी अपने बेटे की लगन और मेहनत को देखकर फूले नहीं समा रहे हैं. कृष्णा का भविष्य में एक बेहतरीन कार्डियोलॉजिस्ट (दिल का डॉक्टर) बनने का लक्ष्य है और वे देश के किसी टॉप मेडिकल कॉलेज से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं.
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