Last Updated:
भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की तैयारी तेज हो गई है. विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत पॉजिटिव दिशा में आगे बढ़ रही है और अमेरिकी टीम जल्द भारत आकर समझौते पर काम करेगी. इस डील से व्यापार, निवेश, निर्यात और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. यह समझौता भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा और लंबे समय में दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होगा.
भारत अमेरिका के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहता है.
भारत और अमेरिका दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक अंतरिम व्यापार समझौते को जल्द पूरा करने की तैयारी कर रहे हैं. विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम देने के करीब है और जल्द ही यह समझौता हो सकता है.
भारत और अमेरिका के विदेश मंत्रियों की नई दिल्ली में रविवार को हुई बहुप्रतीक्षित बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के मौजूदा अवरोधों को समाप्त करने व एक दूसरे के प्रति भरोसे को और मजबूत करने को लेकर अहम विमर्श हुआ. अमेरिकी टीम जल्द ही दिल्ली आएगी ताकि इस समझौते पर तेजी से काम हो सके. दोनों देशों का मानना है कि यह डील दोनों के हित में होगी और लंबे समय तक फायदेमंद साबित होगी.
ट्रेड डील पर हुई चर्चा
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि अंतरिम व्यापार समझौते का ड्रॉफ्ट जल्द तैयार करना बहुत जरूरी है. इससे आगे चलकर व्यापार समझौता हो सकेगा. उन्होंने बताया कि हाल ही में भारतीय टीम वाशिंगटन गई थी और अब अमेरिकी टीम भारत आने वाली है.
मार्को रूबियो ने भी उम्मीद जताई कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जल्द भारत आएंगे. दोनों पक्षों ने कहा कि बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है. ट्रंप प्रशासन के टैरिफ नीति के बावजूद दोनों देश इस समझौते को लेकर पॉजिटिव हैं.
दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्ते
मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की टैरिफ नीति भारत को निशाना बनाने के लिए नहीं है. यह वैश्विक व्यापार संतुलन बनाने की कोशिश है. उन्होंने कहा कि भारत के साथ व्यापार व्यवस्था जल्द ही तय हो जाएगी जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगी.
भारत अमेरिका के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहता है. जयशंकर ने ऊर्जा सुरक्षा और न्यूक्लियर एनर्जी पर भी चर्चा की है. भारत की 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग सोर्स पर जोर दिया गया.
मजबूत सप्लाई चेन जरूरी
पीटीआई के मुताबिक, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पांच प्वाइंट्स के जरिए भारत का स्पष्ट रुख सामने रखा है. उन्होंने कहा कि भारत सभी विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को सबसे बेहतर रास्ता मानता है. भारत सुरक्षित और बिना बाधा वाले समुद्री व्यापार का समर्थन करता है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पूरी तरह पालन पर जोर देता है. साथ ही, भारत बाजार हिस्सेदारी और संसाधनों को दबाव या हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने के खिलाफ है. जयशंकर ने यह भी कहा कि ग्लोबल इकोनॉमी को स्थिर और सुरक्षित बनाए रखने के लिए भरोसेमंद साझेदारियां और मजबूत सप्लाई चेन बेहद जरूरी हैं.
कंपनियों के निवेश को बढ़ावा
यह व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा. भारत अमेरिका में अपनी कंपनियों के निवेश को बढ़ावा दे रहा है. वहीं अमेरिका भी भारत को सुरक्षित सप्लाई चेन में शामिल कर रहा है.
दोनों पक्षों ने विश्वास जताया कि इस साल के अंत तक भारत-अमेरिका संबंध पहले से भी मजबूत हो जाएंगे. आम भारतीयों के लिए यह अच्छी खबर है क्योंकि इससे निर्यात बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी. सरकार इस समझौते को लेकर सतर्कता से आगे बढ़ रही है ताकि भारत के हित सुरक्षित रहें.
About the Author

यशस्वी यादव एक अनुभवी बिजनेस राइटर हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में दो साल का अनुभव है। ये नेटवर्क18 के साथ मनी सेक्शन में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यशस्वी का फोकस बिजनेस और फाइनेंस से जुड़ी खबरों को रिस…और पढ़ें

