Monday, June 22, 2026
Homeराज्यमध्यप्रदेशअब नहीं कटेंगे पेड़: कल तक फाइलों में नहीं थे पेड़,...

अब नहीं कटेंगे पेड़: कल तक फाइलों में नहीं थे पेड़, अब पांच विभागों के अफसर मौके पर पहुंचे, कहा- यहां 13 एकड़ में जंगल – Bhopal News



जो पेड़ सरकारी फाइलों में कल तक मौजूद नहीं थे, वे अचानक जमीन पर नजर आने लगे…और वो भी पूरे 13 एकड़ में। मामला भोपाल से 15 किमी दूर बैरसिया के मस्तीपुरा गांव का है, जहां मुरम-कोपरा खदान को नियमों को दरकिनार कर मंजूरी दे दी गई।

.

दैनिक भास्कर द्वारा मामला उजागर किए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया। खनिज, वन, राजस्व, पर्यावरण और स्थानीय प्रशासन के अफसर मौके पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान अफसरों को भी मानना पड़ा कि क्षेत्र में हजारों की संख्या में सागौन सहित अन्य प्रजातियों के पुराने पेड़ मौजूद हैं।

अनुमान के मुताबिक यहां 6 हजार से अधिक पेड़ खड़े हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब मौके पर इतना घना जंगल मौजूद था, तो फिर 17 एकड़ जमीन पर खनन की अनुमति कैसे दे दी गई? क्या खदान की सभी एनओसी सिर्फ कागजों पर जारी कर दी गईं? क्या वास्तव में कभी मौके मुआयना हुआ भी था या फाइलों में ही जंगल ‘गायब’ कर दिया गया?

हैरानी की बात यह है कि राजस्व विभाग की रिपोर्ट में पहले ही पेड़ों की मौजूदगी का स्पष्ट उल्लेख था, इसके बावजूद संबंधित विभागों ने आंख मूंदकर एनओसी जारी कर दी। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर कलेक्टर से अनुमति ली गई, ऐसे में यह सवाल भी खड़ा होता है कि क्या उन्हें जमीनी सच्चाई से अवगत कराया गया था या नहीं। सूत्रों के मुताबिक इस पूरे मामले में खनिज विभाग और सिया की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध मानी जा रही है।

कदम-कदम पर लापरवाही… सबके सामने सच था, लेकिन किसी ने सही जानकारी नहीं दी

खनिज विभाग

  • यह देखना था: जिला खनिज टीम को लीज आवेदन पर पटवारी की मौके की रिपोर्ट लेना अनिवार्य था। पेड़ों के उल्लेख पर आवेदन निरस्तीकरण के लिए भेजा जाना चाहिए था।
  • यहां चूक: खनिज टीम ने राजस्व की पेड़ संबंधी रिपोर्ट की अनदेखी की। निरीक्षण में चूक हुई, डायरेक्टोरेट को सूचना नहीं दी गई, इसलिए कलेक्टर ने अनुमति दी। अब खदान निरस्तीकरण प्रस्ताव तैयार है।

पर्यावरण विभाग

  • यह देखना था: पर्यावरण विभाग को एनओसी में शोर, मशीनों का प्रभाव और मौके पर पेड़ों की स्थिति जांचनी थी, लेकिन रिपोर्ट देखे बिना ही एनओसी जारी कर दी गई।
  • यहां चूक: मौके की वास्तविक स्थिति की अनदेखी की गई। पटवारी की रिपोर्ट से पर्यावरणीय नुकसान का आकलन संभव था। पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी बृजेश शर्मा ने बताया कि रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है।

वन विभाग

  • यह देखना था: यह स्पष्ट करना था कि मौके पर पेड़ मौजूद हैं। विभाग ने अपनी बीट से खदान की दूरी की जानकारी दी। मौके पर कितने पेड़ हैं, यह जानकारी भी नहीं दी गई।
  • यहां चूक: विभाग ने मौके पर घने पेड़ों की जानकारी नहीं दी, सिर्फ खदान से दूरी बताई। डीएफओ भारती एनओसी 2019 की थी, टीम में एसडीओ धीरज सिंह चौहान व शिवपाल पिपरदे थे।

पंचायत विभाग

  • यह देखना था: बिना जांच एनओसी जारी की, जबकि सरपंच व सचिव को मुरम-कोपरे का पहाड़ और जमीन की वास्तविक स्थिति की जानकारी थी।
  • यहां चूक: 2019 में साक्षी सिंह और उनके पति अमर सिंह ने मस्तीपुरा में दो खदानों के लिए आवेदन किया था। तब गांव इस्लामनगर पंचायत में था, अब ईटखेड़ी में है। सरपंच हरिसिंह सैनी का कहना है कि पुरानी अनुमति नई पंचायत पर लागू नहीं होती।

राजस्व विभाग

  • यह देखना था: राजस्व विभाग के अफसरों ने अपनी रिपोर्ट में तो इस बात का जिक्र किया कि मौके पेड़ लगे हैं। लेकिन कलेक्टर को ये नहीं बताया कि मौके पर कितना घना जंगल है।
  • चूक: अफसरों ने अपनी रिपोर्ट सही बनाई। पर खदान के गृह प्रवेश के समय भी इस बात को कलेक्टर के सामने नहीं रखा। सारी एनओसी के आधार पर खनिज डायरेक्टर ने अनुमति दे दी।

अनुमति निरस्त करने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। एक भी पेड़ नहीं कटने दिए जाएगा। रिपोर्ट के आधार ये कार्रवाई की जा रही है।-कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments