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Rudram-II Missile Test: DRDO और भारतीय वायुसेना ने सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से स्वदेशी एंटी-रेडिएशन मिसाइल रुद्रम-II का सफल परीक्षण किया है. यह अत्याधुनिक मिसाइल हवा से सतह पर मार करने में सक्षम है. इसका मुख्य काम युद्ध के दौरान दुश्मन के रडार, ट्रैकिंग सिस्टम और एयर डिफेंस नेटवर्क को ट्रैक करके उन्हें नष्ट करना है, जिससे वायुसेना को सीमाओं पर बड़ी रणनीतिक बढ़त मिलेगी.
भारत ने रुद्रम-2 का सफल परीक्षण किया.
आसमान की उस जंग में जहां दुश्मन के रडार और मिसाइल सिस्टम हमारे लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने के लिए घात लगाए बैठे हों, वहां भारत का एक लड़ाकू विमान पलक झपकते ही पासा पलट सकता है. अब भारतीय वायुसेना बिना दुश्मन की मिसाइल रेंज में आए, उसके पूरे एयर डिफेंस सिस्टम को मलबे के ढेर में तब्दील करने का दम रखती है. भारत ने रक्षा क्षेत्र में इसी अचूक मारक क्षमता को हासिल करते हुए एक नया इतिहास रच दिया है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायुसेना ने मिलकर पूरी तरह से स्वदेशी एंटी-रेडिएशन एयर-टू-सर्फेस (हवा से सतह) मिसाइल रुद्रम-II (Rudram-II) का बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सफल परीक्षण किया है. आसमान से आग उगलती इस मिसाइल ने तय मानकों के तहत सीधे दुश्मन के ठिकाने पर सटीक प्रहार किया और यह साबित कर दिया कि आधुनिक युद्ध के मैदान में अब भारत की तकनीकी ताकत के आगे दुश्मन का टिक पाना नामुमकिन है.
रुद्रम-II परीक्षण की 5 मुख्य बातें
• स्वदेशी ताकत की नई मिसाल: रुद्रम-II पूरी तरह से एक स्वदेशी एयर-टू-सर्फेस मिसाइल है, जिसे DRDO की हैदराबाद स्थित ‘रिसर्च सेंटर इमारत’ (RCI) ने भारतीय उद्योगों के साथ मिलकर तैयार किया है.
• दुश्मन के रडार का काल: यह एक अत्याधुनिक एंटी-रेडिएशन मिसाइल है, जिसका मुख्य काम दुश्मन के सर्विलांस रडार, ट्रैकिंग सिस्टम और कम्युनिकेशन टावरों से निकलने वाले सिग्नलों को पकड़कर उन्हें हवा में ही नेस्तनाबूद करना है.
• चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में परीक्षण: भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान से इस मिसाइल को बेहद जटिल और विपरीत युद्ध जैसी परिस्थितियों में दागा गया, जहाँ इसने शत-प्रतिशत सटीकता दिखाई.
• सुखोई-30 एमकेआई की बढ़ी ताकत: इस मिसाइल को मुख्य रूप से भारतीय वायुसेना के अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआई (Su-30 MKI) से जोड़कर परखा जा रहा है, जिससे इसकी मारक क्षमता कई गुना बढ़ गई है.
• आत्मनिर्भरता की ओर कदम: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस कामयाबी पर DRDO और वायुसेना को बधाई देते हुए इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ और उन्नत स्वदेशी रक्षा तकनीक की दिशा में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर बताया है.
RudraM-II, Air-to-Surface Missile was successfully tested by #DRDO and @IAF_MCC from Airborne Platform. The tests were conducted under extreme release conditions with critical trajectory establishing the capability of all subsystems. pic.twitter.com/ED6DZK4hz7

