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Illegal Colony in Ghaziabad : गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि जिले में 351 अवैध कॉलोनियां हैं. साथ ही आम आदमी को चेतावनी दी कि इन कॉलोनियों में निवेश करें वरना नुकसान उठाना पड़ सकता है.
हाइलाइट्स
- गाजियाबाद में 351 अवैध कॉलोनियां हैं.
- GDA ने इन कॉलोनियों में निवेश न करने की चेतावनी दी.
- अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्रियों पर जल्द ही बैन लगेगा.
यह मामला सामने आया है गाजियाबाद शहर में. गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) ने जिले में 351 अवैध कॉलोनियों की पहचान की है और कहा है इन कॉलोनियों को 3 हजार एकड़ जमीन पर बसाया गया है. अथॉरिटी ने लोगों को भी आगाह किया है कि इन शहरों में निवेश न करें. प्राधिकरण का कहना है कि पिछले 35 से 40 साल में जिले के भीतर इन अवैध कॉलोनियों को बसाया गया है. साल 2021 तक अवैध कॉलोनियों की संख्या 321 थी, जबकि महज 4 साल में ही 30 और अवैध कॉलोनियां बन गई हैं.
विकास प्राधिकरण ने बताया कि इन अवैध कॉलोनियों के बसने का सबसे बड़ा कारण खरीदरों को जानकारी का अभाव है. इसी अभाव का फायदा उठाकर बिचौलिए और जमीन विक्रेता ने 3 हजार एकड़ से ज्यादा जमीनें बेच डालीं. अथॉरिटी ने बताया है कि इन कॉलोनियों का नाम जल्द ही सार्वजनिक कर दिया जाएगा और लोगों को इसमें निवेश न करने की भी सलाह दी है. यहां पैसे लगाने वालों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है.
क्या लीगल होंगी ये कॉलोनियां
जीडीए ने साफ कहा है कि यहां जमीन खरीदने वाले इस भ्रम में न रहें कि इन कॉलोनियों को बाद में लीगल कर दिया जाएगा. जीडीने कहा कि लोग इसी भ्रम में अवैध कॉलोनियों में जमीनें खरीद लेते हैं कि बाद में यह कॉलोनियां वैध हो जाएंगी, लेकिन ऐसा होता नहीं है. जल्द ही इनकी रजिस्ट्री पर भी बैन लगाया जाएगा. प्राधिकरण ने कहा कि हिंडन नदी के पास बसी ऐसी अवैध कॉलोनियों को बाढ़ आने पर सबसे ज्यादा मुसीबत झेलनी पड़ी.
गाजियाबाद के लोनी में अवैध कॉलोनियों की संख्या काफी ज्यादा है. इसके अहिल्याबाद एरिया में ही 43 अवैध कॉलोनियां हैं, जो 43 एकड़ जमीन पर बसी हैं. सिखरनी में 2 अवैध कॉलोनियां 38 एकड़ और 25 एकड़ जमीन पर बसी हैं. पावी सादीपुर में 137 एकड़ में अवैध कॉलोनी बसी है तो मीरपुर हिंदू में 97 एकड़ जमीन पर अवैध कॉलोनी बसा दी गई है.
मकानों को तोड़ने की तैयारी
जीडीए ने बताया है कि यूपी शहरीकरण प्लान के तहत 26, 27 और 28 की धाराओं के तहत अवैध निर्माण को ढहाने की कार्रवाई करते रहते हैं. हालांकि, इन कॉलोनियों को ढहाने की राह में कानूनी पचड़ा काफी है. लिहाजा यहां निर्माण तोड़ने के लिए कुछ प्रक्रिया से गुजरना होगा. इन्हें तोड़ना आसान नहीं होगा. हालांकि, एआई की मदद से अवैध निर्माण की पहचान करने का काम जारी है.
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि… और पढ़ें

