Thursday, May 7, 2026
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DRDO ने तैयार कर दी ऐसी मशीन, दुश्मनों के खिलाफ सेना के लिए बनेगा ब्रह्मास्त्र


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DRDO Power: भारतीय सेना ने डीआरडीओ द्वारा डिजाइन किए गए यांत्रिक खदान क्षेत्र अंकन उपकरण एमके-2 को शामिल किया है, जो आत्मनिर्भरता और युद्ध तत्परता को मजबूत करता है.

DRDO ने तैयार कर दी ऐसी मशीन, दुश्मनों के खिलाफ सेना के लिए बनेगा ब्रह्मास्त्रडीआरडीओ का यह उपकरण स्वदेशी इनोवेशन का नायाब उदाहरण है.
नई दिल्ली. भारतीय सेना की ऑपरेशनल ताकत बढ़ाने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) का डिजाइन किया गया यांत्रिक खदान क्षेत्र अंकन उपकरण (मैकेनिकल माइनफील्ड मार्किंग इक्विपमेंट) ‘एमके-2’ को उसमें शामिल किया गया है. सेना ने सोमवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में यह जानकारी दी.

सेना ने लिखा, “अभियानगत दक्षता बढ़ाने की दिशा में स्वदेशी नवाचार (इंडिजिनस इनोवेशन) के माध्यम से युद्ध तत्परता को मजबूत करते हुए भारतीय सेना ने यांत्रिक खदान क्षेत्र अंकन उपकरण एमके-2 को शामिल किया है.” पोस्ट में एमके-2 की कुछ तस्वीरें भी साझा की गई हैं.

सेना ने कहा, “डीआरडीओ की डिजाइन की गई और बीईएम लिमिटेड द्वारा निर्मित यह प्रणाली आत्मनिर्भरता की भावना का प्रतीक है और कोर ऑफ इंजीनियर्स की लड़ाकू क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करती है.” कोर ऑफ इंजीनियर्स भारतीय सेना और अन्य रक्षा संगठनों को इंजीनियरिंग सहायता प्रदान करने वाली एक लड़ाकू सहायता इकाई है.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता का प्रमाण
कुछ ही दिन पहले 9 अगस्त को डीआरडीओ अध्यक्ष समीर कामत ने कहा था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ आत्मनिर्भरता, रणनीतिक दूरदर्शिता और स्वदेशी प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत की ताकत को दर्शाता है. कामत ने पुणे के डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (डीआईएटी) के 14वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिमी सीमाओं पर अत्यंत समन्वित एवं बहुआयामी अभियान ने न केवल सैनिकों के साहस को प्रदर्शित किया, बल्कि उस प्रौद्योगिकी को भी रेखांकित किया, जिसने उनका समर्थन किया.

उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ एक मिशन से कहीं अधिक था और यह आत्मनिर्भरता, रणनीतिक दूरदर्शिता और स्वदेशी प्रौद्योगिकी में भारत की ताकत को प्रदर्शित करता है. कामत ने कहा कि अभियान दुनिया को यह संदेश था कि भारत में स्वदेशी प्रौद्योगिकी के माध्यम से अपनी सीमाओं की रक्षा करने की क्षमता है. डीआरडीओ प्रमुख ने कहा कि सेंसर, ड्रोन और सुरक्षित संचार से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निर्णय लेने में सहायक प्रणाली और सटीक हथियारों तक, स्वदेशी संसाधनों ने अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h… और पढ़ें

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