बोधगया के बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-3 (BSAP-3) परिसर में भव्य दीक्षांत और शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन हुआ। समारोह में कुल 1,084 महिला प्रशिक्षु सिपाहियों ने हिस्सा लिया। सभी बहादुर महिला सिपाहियों ने अपना कड़ा व कठिन प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अब ये सभी सिपाही बिहार पुलिस बल का एक मजबूत हिस्सा बन चुकी हैं। इस भव्य पासिंग आउट परेड के दौरान कई भावुक कर देने वाले पल भी देखने को मिले। आईजी विकास वैभव ने दिलाई कर्तव्यनिष्ठा की शपथ इस खास और गौरवशाली अवसर पर मगध प्रमंडल के आईजी विकास वैभव बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। उन्होंने सबसे पहले परेड का बारीकी से निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने महिला सिपाहियों के शानदार व अनुशासित मार्च पास्ट की सलामी ली। परेड की समाप्ति के बाद आईजी विकास वैभव ने सभी नवनियुक्त महिला सिपाहियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उन्होंने सभी को पूरी ईमानदारी, निष्ठा, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ देश और राज्य की सेवा करने का संकल्प दिलाया। विकसित बिहार और सुरक्षित माहौल की अपील समारोह को संबोधित करते हुए आईजी विकास वैभव ने पुलिसकर्मियों को उनकी बड़ी जिम्मेदारी का अहसास कराया। उन्होंने कहा कि देश और राज्य के विकास में पुलिस की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। हमारा मुख्य लक्ष्य साल 2047 तक एक पूरी तरह से विकसित बिहार का निर्माण करना है। हम एक ऐसे बिहार को बनाना चाहते हैं, जहां किसी भी नागरिक को शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य या रोजगार के लिए अपने राज्य से बाहर न जाना पड़े। इसके लिए राज्य में भयमुक्त और सुरक्षित माहौल बनाना बेहद जरूरी है। जब प्रदेश सुरक्षित होगा, तब निवेशक यहां आएंगे और विकास को नई गति मिलेगी। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मैदान पर बेहद भावुक कर देने वाले दृश्य भी दिखाई दिए। परेड खत्म होते ही कई महिला सिपाहियों की आंखें छलक उठीं। महिला सिपाहियों ने दौड़कर अपने माता-पिता, भाई और पतियों को गले से लगा लिया। उन्होंने सम्मान के रूप में अपनी पुलिस कैंप उतारकर अपने माता-पिता के सिर पर सजा दी और गर्व से सैल्यूट किया। रुचि प्रिया ने अपने पहले ही प्रयास में इस परीक्षा में सफलता हासिल की है। रुचि के पिता एक साधारण किसान हैं और उनकी मां एक नर्स हैं। रुचि अब आगे की पढ़ाई भी जारी रखना चाहती हैं। उनका अगला लक्ष्य पुलिस विभाग में और भी ऊंचे पद पर पहुंचना है। रुचि के मामा प्रीतम कुमार ने बताया कि उनकी भांजी ने एक साल में नौकरी पाने का जो सपना देखा था। उसे अपनी कड़ी मेहनत से पूरी तरह सच कर दिखाया है।

