स्कूल में मेरे घुंघराले बाल और दांतों की बनावट का मजाक उड़ाया जाता था। कॉलेज में मेरे सपनों का मजाक बनाया गया। इसके बाद भी फैशन की ग्लैमरस दुनिया में आने से पीछे नहीं रही। पहली बार पांच इंच की हाई हील्स पहनकर रैंप वॉक करना बिल्कुल अनुभव था। मेडिकल की कठिन राह पार की, किसी ने सामाजिक बंदिशें तोड़ीं, किसी मॉडल ने विनर बनने के लिए सालों का इंतजार किया। मिस राजस्थान 2026 की टॉप-6 फाइनलिस्ट ने अपनी इस जर्नी के ऐसे ही कुछ एक्सपीरियंस को भास्कर के साथ शेयर किया। करीब 6500 प्रतिभागियों में से चयनित टॉप-28 फाइनलिस्ट ने एक महीने तक कड़ी ग्रूमिंग और ट्रेनिंग ली, जिसके बाद इन टॉप-6 विजेताओं ने अपनी जगह बनाई। इन विजेताओं ने अपने संघर्ष, परिवार के सहयोग, सामाजिक चुनौतियों और भविष्य के सपनों को साझा किया। पढ़िए- किसने क्या कहा- MBBS के साथ मॉडलिंग की, मां ने दी प्रेरणा मिस राजस्थान-2026 की 6th रनरअप लक्षिता गोदारा ने बताया कि उनकी सफलता के पीछे सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी मां हैं। बचपन से मां ने आगे बढ़ने और समाज की अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा बनने की सीख देती रही हैं। इसी प्रेरणा से उन्होंने मेडिकल क्षेत्र चुना और NEET परीक्षा उत्तीर्ण की। वर्तमान में वे SMS मेडिकल कॉलेज, जयपुर से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। लक्षिता ने कहा कि मेडिकल और मॉडलिंग दोनों पूरी तरह अलग क्षेत्र हैं, लेकिन दोनों में एक चीज समान है, कड़ी मेहनत। मेडिकल की तैयारी के दौरान उन्होंने दिन-रात पढ़ाई की और अपने माता-पिता के विश्वास को कभी टूटने नहीं दिया। अब मिस राजस्थान के मंच के जरिए वे समाज की उन लड़कियों तक पहुंचना चाहती हैं, जिन्हें प्रेरणा और सही मार्गदर्शन की जरूरत है। क्रिमिनोलॉजी से फैशन की दुनिया तक, समाज ने दिया साथ सुहानी जैन थर्ड रनरअप रही। सुहानी ने बताया कि क्रिमिनोलॉजी की पढ़ाई के बाद हॉस्पिटैलिटी बिजनेस से जुड़ीं। अब पहली बार किसी ब्यूटी पेजेंट का हिस्सा बनीं। सुहानी ने बताया कि पहले लगता था कि दो अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने के बाद लोग शायद समर्थन नहीं करेंगे, लेकिन इसके उलट उन्हें परिवार और समाज से भरपूर प्यार मिला। सुहानी ने कहा कि वे जैन समाज से आती हैं और लोगों में यह धारणा रहती है कि यह समाज काफी सीमित सोच रखता है, लेकिन उन्हें अपने पूरे समाज का भरपूर सहयोग मिला। कई ऐसे लोगों ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं, जिनसे उन्होंने कभी उम्मीद नहीं की थी। उन्होंने मिस राजस्थान की ग्रूमिंग टीम की भी जमकर सराहना की। उनका कहना था कि योगेश मिश्रा और निमिषा मैम ने केवल रैंप वॉक ही नहीं, बल्कि स्किन केयर, स्माइल, कम्युनिकेशन और व्यक्तित्व विकास तक हर छोटी-बड़ी बात सिखाई। एक महीने के दौरान आयोजक उनके लिए परिवार जैसे बन गए। शारीरिक बनावट को लेकर असुरक्षा थी सेकेंड रनरअप शगुन राठौड़ ने कहा कि मिस राजस्थान उनके बचपन का सपना था, लेकिन अपनी शारीरिक बनावट को लेकर उनमें कई असुरक्षाएं थीं। उन्होंने बताया कि वे नागौर जिले के एक छोटे से गांव से आती हैं, जहां आज भी लड़कियों को खुलकर आगे बढ़ने की पूरी आजादी नहीं मिलती। जब उन्होंने कंटेंट क्रिएटर के रूप में सोशल मीडिया पर काम शुरू किया तो लोगों ने सवाल उठाए कि गांव की लड़की इंस्टाग्राम पर क्यों सक्रिय है। शुरुआत में उनके पिता भी इस फैसले के पक्ष में नहीं थे। धीरे-धीरे उनकी सफलता और बढ़ते फॉलोअर्स ने पूरे परिवार की सोच बदल दी। आज उनके पिता ही उन्हें सबसे ज्यादा प्रोत्साहित करते हैं। शगुन ने बताया कि अब उनके गांव और आस-पास की कई लड़कियां उन्हें मैसेज करती हैं और मॉडलिंग, कंटेंट क्रिएशन और सोशल मीडिया के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सलाह मांगती हैं। उनके अनुसार यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है कि वे अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा बन सकी हैं। पहली बार पांच इंच की हाई हील्स पहनी थी फिफ्थ रनरअप कुसुम सोनी ने बताया कि वे सालासर बालाजी के पास स्थित चाड़वास गांव से हैं। हालांकि उनका बचपन नेपाल के काठमांडू में बीता क्योंकि उनके पिता का व्यवसाय वहां था। कोविड के बाद उनका परिवार राजस्थान लौटा और उन्होंने सुजानगढ़ से अपनी पढ़ाई पूरी की। बाद में वे जयपुर आईं और यहीं से मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने बताया कि उनके परिवार का इस इंडस्ट्री से कोई संबंध नहीं था, इसलिए उन्हें किसी तरह का मार्गदर्शन नहीं मिला। उन्होंने अपनी बहन के साथ मिस राजस्थान का ऑडिशन दिया और यहीं से उनकी नई यात्रा शुरू हुई। कुसुम ने बताया कि उन्होंने जीवन में पहली बार पांच इंच की हाई हील्स पहनी थीं और रैंप वॉक का उन्हें बिल्कुल अनुभव नहीं था। लेकिन ग्रूमिंग सेशन के दौरान लगातार अभ्यास, मेडिटेशन, जुम्बा, फिटनेस और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट ने उन्हें पूरी तरह बदल दिया। उनका कहना था कि टॉप-7 तक पहुंचना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। घराले बाल और दांतों की बनावट का मजाक बना झुंझुनूं जिले के चिड़ावा क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाली फर्स्ट रनरअप वंशिका नूनिया ने कहा कि बचपन से उन्हें हमेशा यह सुनने को मिला कि सपने देखो, लेकिन सीमित देखो। उन्होंने कभी इस सोच को स्वीकार नहीं किया। उनका मानना रहा कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती। वंशिका ने बताया कि स्कूल के दिनों में उनके घुंघराले बाल और दांतों की बनावट का मजाक उड़ाया जाता था। कॉलेज पहुंचीं तो लोग उनके बड़े सपनों का मजाक बनाने लगे। उन्होंने कहा कि कई बार लोगों ने उन्हें नीचे खींचने की कोशिश की, लेकिन शिक्षकों और वरिष्ठों के सहयोग से उन्होंने खुद पर विश्वास बनाए रखा। आज मिस राजस्थान का फर्स्ट रनरअप बनने के बाद उन्हें लगता है कि उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर इंसान बड़े सपने देखने की हिम्मत रखता है, तो उन्हें पूरा भी कर सकता है। आठ साल तक किया इंतजार, फिर मिला सपनों का मंच फोर्थ रनरअप निहारिका माथुर ने बताया कि वे पिछले आठ सालों से ऐसे मंच का इंतजार कर रही थीं, जहां से वे अपने सपनों की शुरुआत कर सकें। उन्होंने कहा कि इन आठ सालों में उन्होंने केवल खुद को बाहरी रूप से नहीं, बल्कि मानसिक और व्यक्तित्व के स्तर पर भी तैयार किया। हालांकि उनके माता-पिता हमेशा उनका समर्थन करते रहे, लेकिन एक अभिभावक होने के नाते उन्हें बेटी की सुरक्षा और भविष्य की चिंता भी रहती थी। निहारिका ने बताया कि उन्होंने इन सालों में खुद को एक बेहतर इंसान बनाने पर सबसे ज्यादा काम किया। उनका मानना है कि केवल सुंदर दिखना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि भीतर से भी मजबूत और संवेदनशील होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब उनका नाम विजेताओं में घोषित हुआ तो उन्हें महसूस हुआ कि सालों की मेहनत आखिरकार रंग लाई। राजस्थान की बेटियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना ही उद्देश्य मिस राजस्थान के आयोजक योगेश मिश्रा ने बताया कि इस साल प्रतियोगिता का 28वां सीजन आयोजित किया गया। उन्होंने बताया कि इस बार पूरे राजस्थान से करीब 6500 प्रतिभागियों ने रजिस्ट्रेशन कराया, जिनमें से 2500 ने ऑडिशन क्वालिफाई किए। इसके बाद 100 प्रतिभागियों का चयन हुआ और आखिरी 28 फाइनलिस्ट को एक महीने की विशेष ग्रूमिंग और स्कॉलरशिप दी गई। उन्होंने बताया कि पिछले सालों में मिस राजस्थान की प्रतिभागियों ने लगातार फेमिना मिस इंडिया, मिस यूनिवर्स सहित कई बड़े मंचों तक अपनी जगह बनाई है। वैष्णवी शर्मा, तरुशी रॉय और आकांक्षा चौधरी जैसी प्रतिभागियों ने राज्य का नाम देशभर में रोशन किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस साल की विजेता और फाइनलिस्ट भी आने वाले समय में राजस्थान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएंगी।
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