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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ने देश की पहली हाई-स्पीड रेल के निर्माण में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है. मुंबई के विक्रोली में भारत की सबसे बड़ी रेल टनल बोरिंग मशीन ने अपना काम शुरू कर दिया है. यह इस पूरी परियोजना का सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण हिस्सा है. यह टनल मुंबई के सबसे व्यस्त इलाकों, ऊंची इमारतों और मीठी नदी के नीचे से होकर गुजरेगी, जिसके लिए अत्याधुनिक जापानी तकनीक और सुरक्षा मानकों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
भारत की सबसे बड़ी रेल सुरंग निर्माण मशीन ने शुरू किया काम: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत विक्रोली से देश की सबसे बड़ी रेल टनल बोरिंग मशीन ने भूमिगत सुरंग की खुदाई का काम शुरू कर दिया है. यह इस पूरी हाई-स्पीड रेल परियोजना का सबसे कठिन और महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है. इस मशीन के जरिए मुंबई के घने इलाकों के नीचे से सुरक्षित रास्ता तैयार किया जाएगा.

चार मंजिला इमारत जितनी ऊंची है यह विशालकाय मशीन: सुरंग की खुदाई में जुटी इस मशीन का डायामीटर (व्यास) 13.6 मीटर है, जो लगभग एक चार मंजिला इमारत जितनी ऊंची दिखाई देती है. इतनी बड़ी मशीन का इस्तेमाल भारत में रेल सुरंग निर्माण के इतिहास में पहली बार किया जा रहा है. इसकी विशालता को देखकर ही इस परियोजना की भव्यता और आधुनिक तकनीक का अंदाजा लगाया जा सकता है.

500 हाथियों जितना वजन और फुटबॉल मैदान जैसी लंबाई: तकनीक के इस अजूबे का कुल वजन करीब 3,100 टन है, जो लगभग 500 एशियाई हाथियों के बराबर बैठता है. इसके साथ ही इसकी 96 मीटर की लंबाई एक पूरे फुटबॉल मैदान जितनी बड़ी है. इस भीमकाय मशीन को सुचारू रूप से चलाने के लिए जमीन के ऊपर एक पूरा आधुनिक सिस्टम तैयार किया गया है.
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21 किलोमीटर लंबी भूमिगत टनल का सफर: बुलेट ट्रेन के लिए मुंबई और अहमदाबाद के बीच कुल 21 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड टनल बनाई जा रही है. इसमें से 16 किलोमीटर का हिस्सा इसी विशाल मशीन से खोदकर तैयार किया जाएगा. बाकी बचे 5 किलोमीटर का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) तकनीक से पहले ही पूरा किया जा चुका है.

खुदाई और मजबूती का काम एक साथ: विक्रोली से शुरू हुई यह मशीन एक ऐसी सिंगल-ट्यूब सुरंग तैयार करेगी, जिसमें बुलेट ट्रेन के आने और जाने के दोनों ट्रैक एक साथ होंगे. यह मशीन आगे बढ़ते हुए खुदाई करने के साथ ही कंक्रीट की लाइनिंग भी तुरंत करती जाती है. इस डबल एक्शन से सुरंग का निर्माण तेजी से होता है और वह साथ-साथ मजबूत होती चलती है.

घने इलाकों और मीठी नदी के नीचे से सुरक्षित रास्ता: यह सुरंग मुंबई के सबसे व्यस्त रिहायशी इलाकों, ऊंची इमारतों, सड़कों और मीठी नदी के ठीक नीचे से गुजरेगी. इसके लिए विशेष मिक्सशील्ड तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो ज्यादा भूजल वाले इलाकों के लिए बेस्ट है. यह आधुनिक तकनीक जमीन धंसने के खतरे को पूरी तरह खत्म कर देती है जिससे ऊपर की संरचनाएं सुरक्षित रहती हैं.

20 मंजिला इमारत जितना गहरा शाफ्ट: इस विशालकाय मशीन को जमीन के नीचे उतारने के लिए विक्रोली में 56 मीटर गहरा एक विशाल शाफ्ट बनाया गया है. यह गहराई लगभग एक 20 मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर बैठती है. इसी जगह पर मशीन के संचालन के लिए पानी शोधन संयंत्र, बिजली सब-स्टेशन और बैकअप जनरेटर जैसी आधुनिक सुविधाएं तैयार की गई हैं.

सेंसर और सीस्मोग्राफ से रियल-टाइम निगरानी: खुदाई के दौरान ऊपर बनी इमारतों और जमीन पर कोई असर न पड़े, इसके लिए सतह पर विशेष सेंसर, टिल्ट मीटर और सीस्मोग्राफ लगाए गए हैं. ये आधुनिक उपकरण जमीन के नीचे होने वाली हर छोटी गतिविधि पर नजर रखते हैं. यह सारा डेटा कंट्रोल रूम को लाइव भेजा जाता है ताकि सुरक्षा से कोई समझौता न हो.

100 टन की कंक्रीट रिंग से पूरी तरह वॉटरप्रूफ टनल: ठाणे के महापे कास्टिंग यार्ड में सुरंग को मजबूती देने के लिए 100-100 टन की 7,700 कंक्रीट रिंग तैयार की जा रही हैं. पानी के रिसाव को रोकने के लिए इस सुरंग में डबल-लेयर रबर सील और आधुनिक वॉटरप्रूफ तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे भविष्य में टनल के अंदर पानी के रिसाव का खतरा शून्य हो जाएगा. (AI)

