Thursday, July 2, 2026
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नालंदा में रामधनी जी की दुकान का रसकदम, 5वीं पीढ़ी चला रही विरासत


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Nalanda Ras Kadam shop: मिठाई तो आपने बहुत खाई होगी, लेकिन रस कदम का स्वाद मुंह में जाते ही एक अलग एहसास होता है. यह ऐसी मिठाई है, जो बिहार की लगभग हर मिठाई दुकान में मिलती है. हालांकि आज हम आपको ऐसी मिठाई दुकान के रसकदम के स्वाद के बारे में बता रहे हैं, जिसका इतिहास बहुत ही पुराना है. वो मिठाई दुकान रामधनी जी की है, जो करीब 150 साल पुरानी बताई जाती है. रामधनी जी की मिठाई दुकान को 5वीं पीढ़ी के युवा चला रहे हैं. यह दुकान नालंदा जिला के कराय परसूराय प्रखंड बाजार में है. स्थानीय बताते हैं कि इस इलाके की पहचान रस कदम मिठाई से है.

लोकल 18 से दुकान मालिक आनंद कहते हैं कि यह दुकान बहुत पुरानी है. यहां से अब तक 40 कारीगर सीखकर बाहर अपनी दुकान चला रहे हैं और रस कदम का स्वाद परोस रहे हैं. अभी हम 5वीं पीढ़ी वाले दुकान चला रहे हैं.

यहां का रस कदम अलग-अलग शहरों तक पहुंच रहा है. दिल्ली, कोलकाता, पटना, रांची से लेकर विदेश तक यहां का रस कदम पहुंच रहा है. एक समय था जब हफ्ते में एक दिन यहां का रस कदम कोलकाता तक ट्रेन से पहुंचता था.

आनंद ने रसकदम बनाने की विधि पर चर्चा करते हुए कहा कि यह बनाना आसान है. वैसे तो हर दुकान में यह मिठाई मिल जाएगी, लेकिन यहां के जैसा स्वाद नहीं मिल पाएगा. हम सबसे पहले शुद्ध दूध के छेना को निकालते हैं. फिर उस पर शुद्ध खोवा का लेप चढ़ाया जाता है.

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इसके बाद पोस्ता दाना लगाया जाता है. इस मिठाई में इलायची और दूसरे मसाले भी शामिल किए जाते हैं. इन्हीं वजहों से मिठाई का स्वाद बढ़िया होता है. अभी 550 रुपए प्रति किलो रस कदम मिल रहा है. हमारे यहां अभी एक दर्जन कारीगर जुड़े हुए हैं.

वहीं, एक कारीगर अनिल यादव ने कहा कि रसकदम का इतिहास बहुत पुराना है और यहां का स्वाद आपको अन्य मिठाई दुकान में नहीं मिल पाएगा. अब तक दर्जनों कारीगर बाहर निकल चुके हैं, लेकिन यहां वाला स्वाद नहीं दे पाए.

सोचिए! जिस वक्त 40 पैसा में पैंट और 60 पैसा में शर्ट बनता था उसी वक्त से दुकान में काम कर रहे हैं. आज उम्र 50 साल हो रही है और 600 रुपए में पैंट शर्ट की सिलाई होती है. यहां के दूध, खोवा और पानी का स्वाद ही है कि इस मिठाई दुकान की पहचान बनाकर रखी हुई है.

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