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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने सोमवार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को 9,400 करोड़ रुपये से अधिक के डिविडेंड के चेक सौंपे हैं. केंद्र सरकार इन सभी सरकारी बैंकों की सबसे बड़ी शेयरधारक है, जिसे इन बैंकों की मजबूत वित्तीय स्थिति का सीधा फायदा मिला है. पिछले वित्त वर्ष में इन बैंकों ने शानदार मुनाफा, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और मजबूत बैलेंस शीट का प्रदर्शन किया है, जिसके चलते वे सरकार को इतना बड़ा भुगतान करने में सक्षम हुए हैं.
इस बार सरकारी खजाना भरने में सबसे बड़ी बाजी बैंक ऑफ बड़ौदा ने मारी. (IANS)
नई दिल्ली. देश के सरकारी बैंकों ने सोमवार को अचानक वित्त मंत्रालय के खजाने का रुख किया और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक ऐसी रकम सौंप दी, जिसने पूरे बाजार का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है. वित्तीय सेवा विभाग के उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों ने एक के बाद एक कुल मिलाकर 9,400 करोड़ रुपये से ज्यादा के भारी-भरकम डिविडेंड के चेक वित्त मंत्री के हाथों में थमा दिए. यह सारा पैसा पिछले वित्त वर्ष यानी 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई अवधि के शानदार कामकाज के बदले मुनाफे के हिस्से के रूप में सरकार की जेब में गया है.
इस बार के इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी बाजी बैंक ऑफ बड़ौदा ने मारी है, जिसने अकेले ही सरकार को अब तक का सबसे बड़ा हिस्सा दिया है. सरकार को मिले इस अप्रत्याशित वित्तीय सहयोग के पीछे बैंकों का वह रिकॉर्डतोड़ मुनाफा है, जिसने इस साल देश के बैंकिंग इतिहास के कई पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. बैंकों के इस कदम से न सिर्फ सरकार की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, बल्कि इससे यह भी साफ हो गया है कि सरकारी बैंकों के अच्छे दिन अब पूरी तरह लौट आए हैं.
बैंक ऑफ बड़ौदा ने रचा नया इतिहास और दिया सबसे बड़ा चेक
सरकारी खजाने को भरने में सबसे आगे रहने वाले बैंक ऑफ बड़ौदा ने इस बार अकेले ही 2,811 करोड़ रुपये का भारी-भरकम डिविडेंड चेक वित्त मंत्री को सौंपा है. बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. देबदत्त चंद ने वित्तीय सेवा विभाग के सचिव संजय लोहिया की मौजूदगी में यह बड़ा भुगतान किया. यह ऐतिहासिक डिविडेंड ऐसे समय में आया है जब बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपने इतिहास का सबसे अधिक 20,021 करोड़ रुपये का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जो पहली बार बीस हजार करोड़ के आंकड़े के पार गया है. इसके साथ ही बैंक का कुल वैश्विक कारोबार भी तीस लाख करोड़ रुपये के स्तर से ऊपर पहुंच गया है, जिसके चलते बैंक ने प्रति शेयर 8.50 रुपये का तगड़ा डिविडेंड घोषित किया जो अंकित मूल्य पर सीधे 425 प्रतिशत के बराबर बैठता है.
पीएनबी और केनरा बैंक ने भी सरकारी तिजोरी में डाले हजारों करोड़
पंजाब नेशनल बैंक यानी पीएनबी की ओर से भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को वित्तीय सहयोग के मामले में कोई कसर नहीं छोड़ी गई. बैंक के प्रबंध निदेशक अशोक चंद्र ने 2,416 करोड़ रुपये का बड़ा डिविडेंड चेक सरकार के हवाले किया. पीएनबी के इस प्रदर्शन ने साबित कर दिया है कि वह अपनी पुरानी कमियों को पीछे छोड़कर अब पूरी तरह से मुनाफे की पटरी पर दौड़ रहा है. इसके ठीक पीछे केनरा बैंक भी मजबूती से खड़ा दिखाई दिया, जिसके प्रबंध निदेशक एवं सीईओ बृजेश कुमार सिंह ने वित्त वर्ष 2025-26 के शानदार नतीजों के दम पर 2,397 करोड़ रुपये का भारी-भरकम चेक वित्त मंत्री को सौंपकर सरकार की वित्तीय ताकत को और बढ़ा दिया.
इंडियन बैंक की बड़ी हिस्सेदारी और सरकारी बैंकों की मजबूती का राज
इस कतार में इंडियन बैंक ने भी अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई और सरकार को एक बड़ा आर्थिक संबल प्रदान किया. बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ बिनोद कुमार ने वित्त वर्ष 2025-26 के मुनाफे में से 1,815 करोड़ रुपये का बड़ा डिविडेंड चेक सीधे वित्त मंत्री को सौंप दिया. सार्वजनिक क्षेत्र के इन तमाम बैंकों की तरफ से आया यह बंपर डिविडेंड इस बात का सीधा प्रमाण है कि पिछले पूरे साल के दौरान इन बैंकों ने न सिर्फ अपनी एसेट क्वालिटी यानी परिसंपत्ति गुणवत्ता को सुधारा है, बल्कि अपनी बैलेंस शीट को भी पहले से कई गुना अधिक मजबूत किया है. यही वजह है कि केंद्र सरकार, जो कि इन बैंकों की सबसे बड़ी शेयरधारक है, उसे इस मजबूत वित्तीय स्थिति का यह बंपर रिटर्न मिला है.
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मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें

