Monday, June 29, 2026
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घर में सब्जी नहीं तो भी नो टेंशन! बनाएं बेसन गट्टे की लजीज सब्जी, रेसिपी


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Satna News: मसाला तैयार होने के बाद उसमें गट्टे उबालने वाला पानी और जरूरत के अनुसार थोड़ा अलग से गुनगुना पानी मिलाकर उबाल आने दिया जाता है. इसके बाद तले हुए गट्टे और स्वादानुसार नमक डालकर लगभग 7 से 8 मिनट तक ढककर पकाया जाता है ताकि गट्टे रसे का स्वाद अच्छी तरह सोख लें.

सतना. विंध्य और बघेलखंड की रसोई अपनी सादगी और देसी स्वाद के लिए हमेशा से खास रही है. यहां कई ऐसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं, जो कम सामग्री में भी भरपूर स्वाद देते हैं. इन्हीं में से एक है बघेलखंडी स्टाइल बेसन गट्टे की सब्जी, जिसे कई गांवों में बेसन की ढोच या गट्टे का रसा भी कहा जाता है. आमतौर पर गट्टे की सब्जी का नाम आते ही लोगों के मन में राजस्थान की तस्वीर उभरती है लेकिन बघेलखंड में बनने वाली यह रेसिपी स्वाद, मसालों और बनाने के तरीके में बिल्कुल अलग पहचान रखती है. खास बात यह है कि जब घर में कोई हरी सब्जी उपलब्ध नहीं होती या रोज-रोज एक जैसी सब्जियां खाकर मन ऊब जाता है, तब यही देसी डिश परिवार की पहली पसंद बन जाती है.

लोकल 18 से बातचीत में सतना निवासी मीना द्विवेदी बताती हैं कि पहले गांवों में जब घरों में सामान्य सब्जियां नहीं होती थीं या लोग रोज की दाल-सब्जी से ऊब जाते थे, तब महिलाएं बेसन से गट्टे बनाकर स्वादिष्ट रसे वाली सब्जी तैयार करती थीं. यह व्यंजन कम खर्च में बन जाता है और पूरे परिवार का पेट भी भर देता है. वहीं आज भी कई घरों में यह रेसिपी उसी पारंपरिक तरीके से बनाई जाती है, जिससे इसका असली स्वाद बरकरार रहता है.

ऐसे तैयार किए जाते हैं नरम और स्वादिष्ट गट्टे
बघेलखंडी स्टाइल गट्टे बनाने के लिए सबसे पहले एक कप बेसन में स्वादानुसार नमक, एक चौथाई चम्मच हल्दी, आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, हाथों से मसलकर डाली गई आधा छोटा चम्मच अजवाइन और मोयन के लिए एक बड़ा चम्मच तेल या घी मिलाया जाता है. इसके बाद गुनगुने पानी की मदद से मध्यम नरम आटा गूंथ लिया जाता है. इस आटे से छोटी-छोटी लोइयां बनाकर लंबे बेलनाकार रोल तैयार किए जाते हैं. फिर तीन से चार कप उबलते पानी में इन रोल्स को लगभग 10 से 12 मिनट तक पकाया जाता है. जब गट्टे पानी की सतह पर तैरने लगें और उन पर छोटे-छोटे दाने दिखाई दें, तब उन्हें बाहर निकालकर ठंडा किया जाता है और आधा इंच के टुकड़ों में काट लिया जाता है. वहीं गट्टे उबालने वाला पानी फेंका नहीं जाता बल्कि ग्रेवी बनाने के लिए संभालकर रखा जाता है.

ऐसे आता है असली बघेलखंडी स्वाद
कटे हुए गट्टों को पहले सरसों के तेल में हल्के फ्राई कर सुनहरा किया जाता है. इसके बाद उसी कड़ाही में सरसों का तेल धुआं निकलने तक गर्म करके राई, जीरा और हींग का तड़का लगाया जाता है. फिर बारीक कटी हरी मिर्च, अदरक-लहसुन का पेस्ट और दो बारीक कटे प्याज डालकर अच्छी तरह भुना जाता है. प्याज के सुनहरा होने पर हल्दी, धनिया पाउडर और कश्मीरी लाल मिर्च डालकर दो कटे टमाटर या उनकी प्यूरी मिलाई जाती है, साथ ही मसाले को तब तक पकाया जाता है, जब तक वह तेल न छोड़ दे.

रसे में घुलता है देसी स्वाद
मसाला तैयार होने के बाद उसमें गट्टे उबालने वाला पानी और जरूरत के अनुसार थोड़ा अतिरिक्त गुनगुना पानी मिलाकर उबाल आने दिया जाता है. इसके बाद तले हुए गट्टे और स्वादानुसार नमक डालकर करीब 7 से 8 मिनट तक ढककर पकाया जाता है ताकि गट्टे रसे का स्वाद अच्छी तरह सोख लें और अंदर तक मुलायम हो जाएं. आखिर में आधा छोटा चम्मच गरम मसाला और भरपूर हरा धनिया डालकर सब्जी तैयार हो जाती है. गरमागरम रोटी, पराठे या उबले चावल के साथ परोसी जाने वाली यह बघेलखंडी बेसन गट्टे की सब्जी आज भी विंध्य की पारंपरिक रसोई की पहचान मानी जाती है.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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