राजस्थान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने सात साल से फरार 25 हजार रुपए के इनामी तस्कर रणजीत दायमा उर्फ रणजीत बंजारा को केरल से गिरफ्तार किया है। एएनटीएफ ने कार्रवाई को ‘ऑपरेशन यमलकमली’ नाम दिया था। आरोपी को पकड़ने के लिए टीम ने राजस्थान से केरल
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एएनटीएफ के महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया- हाल ही ऑपरेशन मदाविकाढ़त के तहत मध्य प्रदेश से गिरफ्तार तस्कर रमेश बंजारा से पूछताछ में रणजीत दायमा के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली थी। जांच में सामने आया कि दोनों आपस में समधी हैं। करीब आठ वर्षों से डोडा-चूरा तस्करी के नेटवर्क में साझेदार के रूप में काम कर रहे थे।
जांच के अनुसार- रमेश बंजारा तस्करी की डील तय करता था, जबकि रणजीत माल की व्यवस्था और सुरक्षित सप्लाई का काम संभालता था। इसके बदले उसे 500 रुपये प्रति किलो के हिसाब से कमीशन मिलता था। बड़े सौदों में उसकी कमाई लाखों रुपए तक पहुंच जाती थी।
केरल में बदल ली थी पहचान
एएनटीएफ के अनुसार- रणजीत दायमा पिछले सात वर्षों से केरल के शोरानूर क्षेत्र में रह रहा था। वह भले ही पढ़ा-लिखा नहीं था, लेकिन मलयालम, कन्नड़ और तेलुगु भाषाओं पर उसकी अच्छी पकड़ थी। स्थानीय लोगों के बीच वह पूरी तरह मलयाली बनकर रह रहा था, जिससे उसकी असली पहचान छिपी रही।
आरोपी ने केरल के वडकनचेरी क्षेत्र में कंबल बेचने का व्यवसाय शुरू कर रखा था। वह मोटरसाइकिल पर कंबल लादकर आसपास के इलाकों में बिक्री करता था और समय-समय पर राजस्थान तथा मध्य प्रदेश आकर तस्करी नेटवर्क को संचालित कर वापस लौट जाता था।
राजस्थानी कारीगर बनकर पहुंची टीम
रमेश बंजारा से मिले सुराग के बाद एएनटीएफ की टीम केरल पहुंची और कई दिनों तक स्थानीय स्तर पर रेकी की। टीम के सदस्य राजस्थानी कारीगर बनकर इलाके में घूमते रहे ताकि आरोपी को किसी प्रकार का शक न हो।
जांच के दौरान पता चला कि रणजीत उस दिन शोरानूर से करीब 100 किलोमीटर दूर नीलयांमती पहाड़ियों की एक बस्ती में कंबल बेचने गया हुआ है। इसके बाद टीम तत्काल वहां पहुंची और ग्राहक बनकर उससे संपर्क किया।
पुलिस अधिकारियों ने कंबल खरीदने का नाटक करते हुए बड़ी डील का झांसा दिया और उसे अपने कथित सेठ से मिलने के लिए वाहन तक बुला लिया। जैसे ही रणजीत वाहन के पास पहुंचा, टीम ने अपनी पहचान बताकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
कई राज्यों में फैला था नेटवर्क
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में डोडा-चूरा की सप्लाई करता था। उसने पुलिस को बताया कि उसके खिलाफ विभिन्न राज्यों में कितने मामले दर्ज हैं, इसकी जानकारी उसे स्वयं भी नहीं है।
गिरफ्तारी के बाद एएनटीएफ की टीम आरोपी को केरल से राजस्थान लेकर आई। सात वर्षों से फरार चल रहे इस इनामी तस्कर की गिरफ्तारी को एएनटीएफ की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

