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Imtiaz Ali Birthday: इम्तियाज अली बॉलीवुड के एक ऐसे मैजिकल डायरेक्टर हैं, जिनकी फिल्मों के किरदारों को अगर कोई एक बार देख ले, तो उन्हें चाहकर भी कभी भूल नहीं पाता. उनकी मूवी के कैरेक्टर्स हमारे और आपके जैसे ही आम इंसान होते हैं, जो अपनी जिंदगी में किसी न किसी उलझन से जूझ रहे होते हैं. लेकिन वह पर्दे पर इसे इतनी खूबसूरती से दिखाते हैं, कि हर कोई उससे रिलेट कर लेता है और कभी उस किरदार को भूल नहीं पाता. आज यानी 16 जून को इम्तियाज अली अपना जन्मदिन मना रहे हैं. इस खास मौके पर आइए एक नजर डालते हैं कि आखिर क्यों उनकी फिल्मों के ज्यादातर कैरेक्टर्स घर छोड़कर जरूर भागते हैं. इसके पीछे क्या लॉजिक है?
Imtiaz Ali Birthday Special: इम्तियाज अली बॉलीवुड के बेहतरीन निर्देशकों में से एक हैं. वे एक ऐसे डायरेक्टर हैं जिनकी फिल्मों की कहानियां और उनके किरदार दर्शकों के दिलों को छू लेते हैं. चाहे ‘जब वी मेट’ की गीत हो, ‘तमाशा’ का वेद हो या फिर ‘रॉकस्टार’ का जॉर्डन,उनकी फिल्मों में एक बात बहुत कॉमन होती है. वह यह कि उनका मुख्य किरदार अपनी बंधी-बंधाई जिंदगी, अपना घर या अपना शहर छोड़कर कहीं दूर निकल पड़ता है. इम्तियाज अली के 55 वें जन्मदिन के इस खास मौके पर आइए उनके सिनेमा के इसी सबसे बड़े राज को समझते हैं कि आखिर उनके किरदार घर छोड़कर क्यों भागते हैं.

इम्तियाज अली की फिल्मों को अगर आप ध्यान से देखें, तो घर छोड़ना सिर्फ एक शहर से दूसरे शहर जाना नहीं होता. उनके सिनेमा में घर छोड़ने का मतलब होता है अपनी पुरानी और उबाऊ जिंदगी से आजाद होना. जब तक उनका कोई किरदार अपने घर की दीवारों से बाहर नहीं निकलता, तब तक उसे समझ ही नहीं आता कि वह असल में जिंदगी से चाहता क्या है. यह उनके सिनेमा का एक ऐसा सिग्नेचर स्टाइल है जो उनकी हर बड़ी फिल्म में दिखाई देता है.

जब वी मेट में आदित्य का घर छोड़ना: फिल्म ‘जब वी मेट’ की शुरुआत में दिखाया गया है कि आदित्य कश्यप अपनी जिंदगी और बिजनेस से इतना परेशान हो चुका है कि वह बिना किसी को बताए चुपचाप एक ट्रेन में बैठ जाता है. उसे खुद नहीं पता होता कि वह कहां जा रहा है. उसका यह घर छोड़ना ही उसे गीत से मिलवाता है. गीत की बेफिक्री और ट्रेन छूटने के बाद का जो सफर शुरू होता है, वही आदित्य को जिंदगी जीने का असली मतलब सिखाता है. अगर आदित्य अपना घर और शहर नहीं छोड़ता, तो वह कभी भी अपनी डिप्रेशन वाली जिंदगी से बाहर नहीं आ पाता.
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रॉकस्टार का जॉर्डन और उसका सफर: फिल्म ‘रॉकस्टार’ में जनार्दन जाखड़ नाम का एक सीधा-साधा लड़का है जो बड़ा म्यूजिशियन बनना चाहता है. उसे कोई बताता है कि जब तक दिल नहीं टूटेगा, तब तक अंदर का कलाकार बाहर नहीं आएगा. इस फिल्म में भी जॉर्डन का अपने घर से निकाला जाना और दर-दर भटकना ही उसे एक बहुत बड़ा रॉकस्टार बनाता है. जब वह सूफी संत की दरगाह पर रहने लगता है और घर की सुख-सुविधाओं से दूर हो जाता है, तब जाकर उसका असली संगीत बाहर आता है. इम्तियाज अली ने यहां दिखाया है कि कभी-कभी खुद को ढूंढने के लिए अपनों से दूर जाना पड़ता है.

हाईवे में वीरा की असली आजादी: फिल्म ‘हाईवे’ में तो घर छोड़ने और आजादी के इस कॉन्सेप्ट को बिल्कुल अलग तरीके से दिखाया गया है. फिल्म की मुख्य किरदार वीरा का उसकी शादी से ठीक पहले किडनैप हो जाता है. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि वीरा को अपने आलीशान घर में जो घुटन महसूस होती थी, वह उसे उस किडनैपर के साथ ट्रकों में सफर करते हुए नहीं होती. वह पहाड़ों और रास्तों पर घूमते हुए खुद को ज्यादा सुरक्षित और आजाद महसूस करती है. इस फिल्म से इम्तियाज ने साफ किया कि आलीशान घर भी कभी-कभी इंसान के लिए जेल जैसा बन सकता है.

तमाशा का वेद और पहाड़ों की पुकार: इम्तियाज अली के सिनेमा के इस राज को सबसे बेहतरीन तरीके से फिल्म ‘तमाशा’ में दिखाया गया है. वेद बचपन से ही कहानियों का शौकीन है, लेकिन समाज के दबाव में आकर वह एक रोबोट जैसी नौकरी करने लगता है. जब वह सब कुछ छोड़कर कोर्सिका नाम की जगह पर जाता है, तब वहां वह अपनी मर्जी की जिंदगी जीता है. बाद में जब वह वापस अपने घर और ऑफिस के ढर्रे में फंस जाता है, तो वह पागल होने लगता है. आखिर में उसे अपनी पहचान तभी मिलती है जब वह उस बंधी-बंधाई नौकरी और घर की उम्मीदों को छोड़कर अपनी कहानी खुद लिखने निकल पड़ता है.

खुद की तलाश का यह सफर क्यों है जरूरी: इम्तियाज अली ने कई इंटरव्यूज में खुद यह बात मानी है कि उन्हें सफर करना और नए लोगों से मिलना बहुत पसंद है. उनका मानना है कि जब इंसान अपनी जानी-पहुचानी जगह और आरामदायक घर को छोड़ता है, तभी उसका असली इम्तिहान शुरू होता है. अनजान रास्तों पर चलकर ही इंसान को अपनी असली ताकत और अपनी कमजोरियों का पता चलता है. इसीलिए उनके किरदारों का घर छोड़ना असल में खुद को ढूंढने का एक जरिया होता है. यही वजह है कि उनकी फिल्में देखने के बाद हर किसी का मन एक बार सब कुछ छोड़कर पहाड़ों पर निकल जाने का करने लगता है.

