Jammu-Kashmir to Ladakh Fotu la Tunnel: भारत सरकार ने चीन की सीमा के बेहद करीब लद्दाख तक फटाफट पहुंचने और जम्मू-कश्मीर से कनेक्ट करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. जोजिला सुरंग से भी एक कदम आगे बढ़कर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग-1 फोटू ला पास के पार दो यूनि-डायरेक्शन सुरंगों के निर्माण की बोली प्रक्रिया शुरू कर दी है. ये दोनों ही सुरंगे LAC के इस पार चीन की गुस्ताखियों के मद्देनजर भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं और आने वाले दिनों में चीन बॉर्डर के बेहद करीबी इस इलाके में किसी भी मौसम में मिलिट्री हथियारों से लेकर जरूरी सामान तक तुरंत पहुंचाया जा सकेगा.
जोजिला सुरंग का ब्रेकथ्रू समारोह अगले हफ्ते होने जा रहा है जो 13.15 किलोमीटर लंबी सुरंग के लिए एक बड़ा मील का पत्थर होगा. करीब 7000 करोड़ रुपये की जोजिला सुरंग और फोटू ला पास सुरंग मिलकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के राष्ट्रीय राजमार्ग-1 को ऑल-वेदर रणनीतिक कॉरिडोर बना देंगे. गौरतलब है कि इसी साल मई में सरकार ने फोटू ला सुरंग के लिए बजट आवंटित किया था.
फोटू ला सुरंग परियोजना करीब 824.12 करोड़ रुपये की है और इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है. इसमें लगभग दो-दो किलोमीटर लंबी दो सुरंगें बनानी हैं, साथ में एप्रोच रोड भी, जिससे कुल परियोजना की लंबाई 2.65 किलोमीटर हो जाएगी. फोटू ला सुरंग का महत्व इसकी जगह के कारण है. फोटू ला, श्रीनगर-कारगिल-लेह राजमार्ग पर सबसे ऊंचा बिंदु है, जो लगभग 4,108 मीटर की ऊंचाई पर है.
यह पास राष्ट्रीय राजमार्ग-1 का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो श्रीनगर को कारगिल और लेह से जोड़ने वाली एकमात्र मुख्य सड़क है. कई दशकों से यह हिस्सा इस रूट का सबसे मुश्किल हिस्सा रहा है. तेज मौसम, भारी बर्फबारी और खतरनाक ड्राइविंग की स्थिति अक्सर आवाजाही रोक देती है, अधिकारियों ने बताया कि अब इस सुरंग को पूरा करने के लिए तीन साल की समय-सीमा तय की गई है.
अब आड़े नहीं आएगी 5-10 फीट मोटी बर्फ की परत
हर सर्दी में फोटू ला पर बर्फ पांच से दस फीट तक जमा हो सकती है, एक दस्तावेज में कहा गया है. सड़क पर बर्फ की परत बनने से ड्राइविंग बहुत खतरनाक हो जाती है, दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है और वहां कर्मचारियों को लगातार बर्फ हटाने का काम करना पड़ता है. इतनी ऊंचाई पर पहाड़ी सड़कों के तेज ढलान और तेज मोड़ भी समस्या बढ़ाते हैं. भारी बर्फबारी या खराब मौसम में यहां यातायात पूरी तरह रुक जाता है.
हालांकि अब प्रस्तावित सुरंग इन समस्याओं का जड़ से समाधान करेगी. यह सुरंग यातायात को पहाड़ के ऊपर से नहीं, बल्कि नीचे से लेकर जाएगी. पास के खुले हिस्से को बायपास करके यह सुरंग मौसम पर निर्भरता कम कर देगी और लद्दाख की इस महत्वपूर्ण सड़क को ज्यादा भरोसेमंद बना देगी.
लेह-कारगिल के बीच आसान होगी यात्रा
यह परियोजना पास के पार सड़क की दूरी कम करेगी और लेह-कारगिल के बीच यात्रा को आसान और तेज बनाएगी. इस प्रोजेक्ट का महत्व सिर्फ आम लोगों की सुविधा से काफीद आगे है क्योंकि यह भारत की सबसे जरूरी रणनीतिक सड़कों में से एक बनने जा रही है. इसका इस्तेमाल सैनिकों, उपकरणों, ईंधन, राशन और लद्दाख में आगे तैनात सैनिकों के लिए सामान भेजने के लिए बेहद सुविधाजनक होने जा रहा है.
चीन से सैन्य तनाव में जरूरत हुई महसूस
2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सैन्य तनाव के बाद इस इलाके में मजबूत और बिना रुकावट कनेक्टिविटी की जरूरत और भी ज्यादा साफ हो गई है. मौसम से जुड़ी समस्याएं कम करने और लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाने वाली परियोजनाओं को अब राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से देखा जा रहा है.
जोजिला सुरंग, जो फिलहाल जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच बन रही है, अगले हफ्ते ब्रेकथ्रू देखेगी. इसे 2028 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है. सबसे खास बात है कि यह एशिया की सबसे लंबी सुरंग होगी. सरकार का लंबा लक्ष्य साफ है कि श्रीनगर-लेह कॉरिडोर पर मौसम से होने वाली सारी रुकावटों को धीरे-धीरे खत्म किया जाए और एक ऐसी यातायात व्यवस्था बनाई जाए जो साल भर चल सके, जिसमें आम लोगों की आवाजाही, आर्थिक विकास और सेना की जरूरतें सभी पूरी हो सकें.

