Sunday, May 24, 2026
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कभी सुधीर के पास चाय पीने के नहीं थे पैसे, आज चला रहे मिंडा इंडस्ट्री, प्रेरक है स्टोरी


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सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तर प्रदेश के लखनऊ से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मिंडा इंडस्ट्रीज में असिस्टेंट इंजीनियर के रूप में की. शुरुआती दिनों से ही उनका मानना था कि काम केवल नौकरी करने के लिए नहीं, बल्कि पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ होना चाहिए. वह हमेशा यह सोचते थे कि कंपनी की प्रोडक्टिविटी कैसे बढ़ाई जाए और बेहतर परिणाम कैसे दिए जाएं.

ग्रेटर नोएडाः कभी ऐसा भी समय था जब जेब में एक कप चाय पीने तक के पैसे नहीं होते थे. हर सुबह यह चिंता रहती थी कि आज का दिन कैसे कटेगा और घर का खर्च कैसे चलेगा. लेकिन कठिन परिस्थितियों के बीच भी अगर इंसान मेहनत और ईमानदारी का दामन नहीं छोड़ता, तो किस्मत बदलने में देर नहीं लगती. यह कहानी है सुधीर श्रीवास्तव की, जिन्होंने संघर्षों से भरे जीवन को अपनी मेहनत के बल पर सफलता में बदल दिया.

100 प्रतिशत काम पर दिया ध्यान

सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तर प्रदेश के लखनऊ से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मिंडा इंडस्ट्रीज में असिस्टेंट इंजीनियर के रूप में की. शुरुआती दिनों से ही उनका मानना था कि काम केवल नौकरी करने के लिए नहीं, बल्कि पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ होना चाहिए. वह हमेशा यह सोचते थे कि कंपनी की प्रोडक्टिविटी कैसे बढ़ाई जाए और बेहतर परिणाम कैसे दिए जाएं.

बताया कि उन्होंने अपने काम के दौरान कभी समय की परवाह नहीं की. जब काम का समय होता था, तो वह पूरी मेहनत और 100 प्रतिशत ध्यान के साथ काम करते थे. यही वजह रही कि मिंडा ग्रुप आज भी उनके दिल के बेहद करीब है. इसके बाद उन्होंने लुमीनस में भी काम किया.

चाय पीने के नहीं थे पैसे

जिंदगी का सबसे कठिन मोड़ तब आया, जब वर्ष 1998 के आसपास लुमिनस में काम करते समय उनकी मैनेजमेंट से विचार नहीं मिले. काम करने का तरीका और सोच अलग होने के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया. नौकरी छोड़ने के बाद कई दिनों तक वह घर पर बैठे रहे. उस समय हालात इतने खराब हो गए थे कि उनके पास एक कप चाय खरीदने तक के पैसे नहीं थे. हर दिन भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती थी. बताया कि वह समय उनके जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष था. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उनके माता-पिता और परिवार ने उस मुश्किल दौर में उन्हें पूरा सहयोग दिया. उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर में काम करने के लिए समय और समर्पण दोनों की जरूरत होती है. वह देर रात तक काम करते थे, लेकिन परिवार ने कभी शिकायत नहीं की.

कहा कि इसी संघर्ष के दौर में उन्होंने खुद का काम शुरू करने का फैसला लिया और J&S Wirelink Pvt. Ltd. की स्थापना की. छोटी शुरुआत से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंच गया. आज उनकी इंडस्ट्री नोएडा और ग्रेटर नोएडा में स्थापित है और कई लोगों को रोजगार दे रही है.

नोएडा के हरौला से सफर शुरू किया

उनके बच्चों ने भी हमेशा उनका साथ दिया. उन्होंने कभी महंगी पार्टियों या बड़ी मांगों की जिद नहीं की. कई बार ऐसा होता था कि बच्चों के जन्मदिन पर भी वह समय से घर नहीं पहुंच पाते थे. तब घर में साधारण तरीके से बर्फी काटकर जन्मदिन मनाया जाता था. अपने शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए सुधीर ने बताया कि वह नोएडा के हरौला इलाके में रहा करते थे, जहां वॉशरूम इस्तेमाल करने के लिए भी लंबी लाइन में लगना पड़ता था. लेकिन उन्होंने कभी परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया.
उन्होंने युवाओं को संदेश देते हैं कि अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाएं. मेहनत करें, ईमानदारी से काम करें और समय की कीमत समझें. उनका मानना है कि गौतम बुद्ध नगर में जिसने भी मेहनत और लगन से काम किया, उसे आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक पाया.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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