Thalapathy Vijay Cabinet Expansion: तमिलनाडु की राजनीति में लगभग छह दशक तक कायम रही द्रविड़ दलों की द्विध्रुवीय सत्ता व्यवस्था को तोड़ने के कुछ ही दिनों बाद मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (C Joseph Vijay) ने अपने पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए यह स्पष्ट संकेत देने की कोशिश की है कि उनकी सरकार किस तरह की राजनीतिक और प्रशासनिक पहचान बनाना चाहती है. गुरुवार 21 मई 2026 को 33 सदस्यीय विस्तारित कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह ने केवल सत्ता विस्तार का संदेश नहीं दिया, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व, तकनीकी महत्वाकांक्षा और नई राजनीतिक संस्कृति को सामने रखने का प्रयास भी किया. राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर (Rajendra Vishwanath Arlekar) ने 23 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. इसके साथ ही
थलापति विजय सरकार का मंत्रिमंडल 10 से बढ़कर 33 सदस्यों का हो गया. यह विस्तार कई कारणों से ऐतिहासिक माना जा रहा है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि मंत्रिमंडल में सात दलित नेताओं को जगह देकर सरकार ने सामाजिक न्याय की राजनीति को प्रतीकात्मकता से आगे ले जाने का संदेश दिया है.
मंत्रिमंडल में शामिल दलित प्रतिनिधियों में अरक्कोनम के विधायक वी. गांधीराज, श्रीपेरंबदूर के विधायक के. थेन्नारासु, अविनाशी की विधायक एस. कमाली, रसिपुरम के डी. लोगेश तमिलसेलवन और ओट्टापिडारम के पी. मथन राजा जैसे नाम शामिल हैं. तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय से दलित समुदाय की राजनीतिक भागीदारी चुनावी भाषणों और सामाजिक न्याय के नारों तक सीमित रहने के आरोप लगते रहे हैं. ऐसे में विजय सरकार का यह कदम सत्ता संरचना में वास्तविक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
इस मंत्रिमंडल विस्तार का दूसरा बड़ा राजनीतिक संदेश कांग्रेस की सत्ता में वापसी के रूप में सामने आया. लगभग 59 वर्षों के बाद कांग्रेस तमिलनाडु सरकार का हिस्सा बनी है. राज्य के भाषाई पुनर्गठन के बाद यह पहला अवसर है जब तमिलनाडु में औपचारिक गठबंधन सरकार अस्तित्व में आई है. कांग्रेस विधायक एस. राजेश कुमार और पूर्व सांसद पी. विश्वनाथन को मंत्री बनाया गया है. राजेश कुमार को पर्यटन विभाग जबकि विश्वनाथन को उच्च शिक्षा विभाग सौंपा गया है. सालों तक द्रविड़ दलों के साथ ‘जूनियर सहयोगी’ की भूमिका निभाने वाली कांग्रेस के लिए यह बड़ा राजनीतिक उदय माना जा रहा है. विजय की पार्टी टीवीके ने अपने सहयोगियों के साथ सत्ता साझेदारी का जो मॉडल अपनाया है, उसने तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति को नया आयाम दिया है. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, विदुथलाई चिरुथिगल काची और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के भी जल्द सरकार में शामिल होने की संभावना है. यह विस्तार ऐसे समय हुआ है जब विपक्षी एआईएडीएमके आंतरिक अस्थिरता से गुजर रही है और उसके कई असंतुष्ट नेताओं पर टीवीके की नजर मानी जा रही है.
सीएम विजय का मंत्रिमंडल केवल प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि विजय के नेतृत्व में एक नए राजनीतिक नेटवर्क के निर्माण की कोशिश है. करीब 15 मंत्री ऐसे बताए जा रहे हैं जो टीवीके के गठन से पहले ‘थलापति विजय मक्कल इयक्कम’ नेटवर्क से जुड़े रहे हैं. ये लोग पारंपरिक राजनीतिक परिवारों से नहीं आते, बल्कि फैन क्लब, स्थानीय संगठन और जमीनी राजनीतिक सक्रियता के जरिए उभरे हैं. इनमें व्यापारी, छोटे उद्यमी, ठेकेदार और जिला स्तर के आयोजक शामिल हैं. इससे विजय ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि उनकी राजनीति वंशवाद या केवल वैचारिक ढांचे पर आधारित नहीं होगी. क्षेत्रीय संतुलन भी इस विस्तार का महत्वपूर्ण पहलू रहा. कोंगु क्षेत्र को सबसे अधिक प्रतिनिधित्व मिला है. अविनाशी, कुमारपालयम, इरोड ईस्ट, रसिपुरम, सेलम साउथ, कोयंबटूर नॉर्थ और किनाथुकडावु जैसे क्षेत्रों से मंत्रियों को शामिल किया गया. कुल 9 मंत्री इसी क्षेत्र से बनाए गए हैं. हालांकि, इसके बावजूद राज्य के 38 जिलों में से 19 जिलों को कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला. मुख्यमंत्री विजय समेत 8 मंत्री केवल चेन्नई क्षेत्र से हैं, जिसे लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है.
अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व भी मंत्रिमंडल की प्रमुख विशेषताओं में शामिल रहा. मुख्यमंत्री विजय और वरिष्ठ मंत्री आधव अर्जुना के अलावा जे. मोहम्मद फारवास, ए. श्रीनाथ और एन. मैरी विल्सन जैसे नेताओं को शामिल कर सरकार ने मुस्लिम और ईसाई समुदायों को भी प्रमुख स्थान दिया है. TVK लगातार खुद को तमिलनाडु में एक धर्मनिरपेक्ष विकल्प के रूप में पेश कर रही है और यह विस्तार उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में तकनीकी और भविष्य उन्मुख सोच को भी प्रमुखता दी है. पहली बार तमिलनाडु में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवाओं के लिए अलग मंत्रालय बनाया गया है. वेलाचेरी के विधायक आर. कुमार को इसकी जिम्मेदारी दी गई है. इंजीनियरिंग स्नातक और कारोबारी पृष्ठभूमि वाले कुमार हाल ही में आईआईएम बेंगलुरु से लीडरशिप प्रोग्राम पूरा कर चुके हैं. टीवीके उन्हें नई पीढ़ी के तकनीकी और प्रबंधकीय चेहरे के रूप में प्रस्तुत कर रही है.
मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे चौंकाने वाला बदलाव वरिष्ठ नेता के ए सेंगोट्टैयन के विभाग में हुआ. कुछ दिन पहले ही उन्हें वित्त मंत्रालय दिया गया था, लेकिन अब उन्हें राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग सौंप दिया गया. वित्त मंत्रालय नए मंत्री मैरी विल्सन को दिया गया है, जो शिक्षा संस्थानों से जुड़े कारोबारी परिवार से आते हैं और मैनेजमेंट में डॉक्टरेट कर चुके हैं. सूत्रों के अनुसार सेंगोट्टैयन ने स्वयं राजस्व विभाग की मांग की थी. हालांकि, मुख्यमंत्री विजय ने सत्ता के प्रमुख केंद्र अपने पास ही रखे हैं. गृह, पुलिस, सामान्य प्रशासन, महिला कल्याण और नगर प्रशासन के साथ-साथ विशेष पहल, गरीबी उन्मूलन और ग्रामीण ऋण जैसे विभाग भी उन्होंने अपने नियंत्रण में रखे हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और राजनीतिक संदेशों को सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से संचालित किया जाएगा. मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरे विशेष चर्चा में हैं. विजय के पुराने मित्र और अभिनेता ए. श्रीनाथ को मत्स्य पालन विभाग दिया गया है. 28 वर्षीय एस. कमाली पशुपालन मंत्री बनाई गई हैं. अंग्रेजी साहित्य में पीजी और बीएड डिग्रीधारी कमाली राज्य की सबसे युवा मंत्रियों में शामिल हैं.
टीवीके के मीडिया विंग समन्वयक एस रमेश को हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग दिया गया है, जो तमिलनाडु की राजनीति में अत्यंत संवेदनशील माना जाता है. वहीं पूर्व एआईएडीएमके नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पी धनपाल के पुत्र डी लोगेश तमिलसेलवन को वाणिज्यिक कर एवं पंजीकरण विभाग सौंपा गया है. इसे टीवीके द्वारा द्रविड़ दलों के असंतुष्ट नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. महिला प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी यह मंत्रिमंडल अपेक्षाकृत अधिक समावेशी दिखाई देता है. कमाली के अलावा सी. विजयलक्ष्मी, के. जेगादेश्वरी और एस. कीर्तन जैसे नामों ने सरकार में महिलाओं की उपस्थिति को मजबूत किया है. तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति में महिलाओं को सीमित स्थान मिलने की आलोचना होती रही है, ऐसे में यह बदलाव भी प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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