Thursday, May 21, 2026
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चंबल सेंक्चुरी में अवैध रेत खनन मामले पर सुनवाई पूरी: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, 26 मई को आएगा निर्णय – Bhopal News




चंबल सेंक्चुरी में अवैध रेत खनन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की सख्ती जारी है। रेत माफियाओं पर लगाम कसने को लेकर आज बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले पर सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रख लिया है। 26 मई को फैसला सुनाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में आज क्या हुआ? सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुओ मोटो केस की सुनवाई की। 14 मई के आदेश के मुताबिक राजस्थान और मध्य प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होना था। मध्य प्रदेश की ओर से परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह आज सुप्रीम कोर्ट में हाजिर हुए। कोर्ट ने उन्हें और राजस्थान के पांच प्रमुख सचिवों की उपस्थिति दर्ज की। कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला अमिकस क्यूरी, सॉलिसिटर जनरल और सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित कर लिया। कोर्ट ने साफ कहा कि आगे इन अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जब तक विशेष रूप से न बुलाया जाए। मप्र परिवहन सचिव पर क्यों थी नजर? मप्र के परिवहन सचिव को 14 मई को कोर्ट ने विस्तृत जवाब के साथ पेश होने का आदेश दिया था। मुख्य मुद्दा था बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली और भारी वाहनों से हो रहा अवैध रेत परिवहन। कोर्ट पहले ही मप्र में निगरानी व्यवस्था को प्रारंभिक चरण में बता चुका है। चंबल सेंचुरी का मामला नेशनल चंबल घड़ियाल अभयारण्य में रेत माफियाओं ने घड़ियालों और दूसरे जलीय जीवों के अस्तित्व पर बनाए रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर पर्यावरणीय खतरा बताया था और माफियाओं को “नए डाकू” करार दिया था। कोर्ट पहले कई बार राजस्थान और मप्र सरकारों की निष्क्रियता पर नाराजगी जता चुका है। कोर्ट के निर्देश हैं — CCTV, GPS ट्रैकिंग, जॉइंट पेट्रोलिंग, सख्त FIR, माफिया पर कार्रवाई और फॉरेस्ट स्टाफ की भर्ती। राजस्थान सरकार ने अपने प्रयासों पर विस्तृत रिपोर्ट दी है, जबकि मप्र पर कोर्ट अभी भी सख्त नजर रखे हुए है। राजस्थान सरकार के प्रयासों की तारीफ हुई कोर्ट ने राजस्थान सरकार के प्रयासों की सराहना की और कहा कि राज्य जो मेकैनिज्म विकसित कर रहा है, वह पूरे देश के लिए रोल मॉडल बन सकता है। एएसजी एश्वर्या भाटी और राजस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों ने विस्तृत कॉम्प्लाइंस एफिडेविट पेश किए, जिसमें CCTV इंस्टॉलेशन, GPS ट्रैकिंग, जॉइंट पेट्रोलिंग, FIRs, गिरफ्तारियां और फंडिंग (लगभग ₹65 करोड़) आदि शामिल थे। फॉरेस्ट स्टाफ की कमी पर चिंता कोर्ट ने राजस्थान फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में बहुत गंभीर कमी पर चिंता जताई। जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि इतने बड़े और महत्वपूर्ण फॉरेस्ट एरिया में स्टाफ की कमी गंभीर समस्या है। कोर्ट ने रिक्रूटमेंट प्रक्रिया तेज करने को कहा (पिछली भर्ती 4 साल पहले हुई थी)। होम गार्ड्स को फॉरेस्ट गार्ड्स का काम करने की बात भी उठी। माइनिंग माफिया और किंगपिन्स अमिकस क्यूरी ने बताया कि सैकड़ों FIR के बावजूद असली माफिया किंगपिन्स पकड़े नहीं जा रहे। कोर्ट ने असली अपराधियों तक पहुंचने और गांव वालों के लिए अल्टरनेटिव लाइवलीहुड देने पर जोर दिया।



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