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Bihar Driving License Rules: बिहार में अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना पहले जितना आसान नहीं रहेगा. सड़क हादसों को कम करने और बिना ट्रेनिंग वाले चालकों को सड़कों से दूर रखने के लिए परिवहन विभाग ने ड्राइविंग टेस्ट के नियम बेहद सख्त कर दिए हैं. नई व्यवस्था के तहत अब लाइसेंस पाने के लिए आवेदकों को टेस्ट में कम से कम 60 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य कर दिया गया है.
बिहार सरकार का बड़ा फैसला, अकुशल चालकों को नहीं मिलेगा ड्राइविंग लाइसेंस (एआई जेनरेटेड)
पटना. बिहार में सड़क हादसों पर लगाम लगाने और अकुशल चालकों (Unskilled drivers) को सड़कों पर आने से रोकने के लिए परिवहन विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है. राज्य में ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) बनवाने की पूरी प्रक्रिया को अब पहले से कहीं अधिक सख्त और पारदर्शी कर दिया गया है. बिहार सरकार द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था के तहत, अब आवेदकों को ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने के लिए ‘फर्स्ट डिवीजन’ यानी कम से कम 60 फीसदी नंबरों से टेस्ट पास करना अनिवार्य होगा. इस कड़े कदम का सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वही लोग गाड़ी लेकर सड़कों पर उतरें जो ड्राइविंग के नियमों और गाड़ी चलाने में पूरी तरह निपुण हैं.
नॉन-कमर्शियल चालकों के लिए 60% नंबर लाना अनिवार्य
परिवहन विभाग द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह नियम उन सभी आवेदकों पर तत्काल प्रभाव से लागू होगा जो पहली बार गाड़ी चलाने के लिए परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस (DL) का आवेदन कर रहे हैं. कंप्यूटरीकृत या ट्रैक पर होने वाले इस आधुनिक ड्राइविंग टेस्ट में अब पासिंग मार्क्स को बढ़ा दिया गया है. अगर किसी आवेदक को टेस्ट के दौरान कुल अंकों में से 60 फीसदी से कम नंबर मिलते हैं, तो उसे सीधे तौर पर ‘फेल’ घोषित कर दिया जाएगा और उसका लाइसेंस जारी नहीं होगा.
कमर्शियल वाहनों के लिए 100 में 100 अंक का सख्त नियम
इस नई नीति का सबसे कड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा व्यावसायिक (कमर्शियल) वाहनों के ड्राइवरों के लिए है. बस, ट्रक, ऑटो, या अन्य व्यावसायिक गाड़ियां चलाने वाले चालकों के ड्राइविंग टेस्ट के लिए परिवहन विभाग ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है. अब कमर्शियल वाहन का लाइसेंस लेने के लिए आवेदक को टेस्ट में 100 में से पूरे 100 अंक लाने होंगे. अगर टेस्ट के दौरान एक भी तकनीकी चूक या गलती होती है और 1 नंबर भी कटता है, तो आवेदक को अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा. सार्वजनिक सुरक्षा और भारी वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए यह कड़ा फैसला लिया गया है.
फेल होने पर एक सप्ताह बाद मिलेगा दोबारा मौका
यदि कोई आवेदक नई व्यवस्था के तहत तय किए गए मानकों (नॉन-कमर्शियल के लिए 60% और कमर्शियल के लिए 100%) को पूरा नहीं कर पाता है और फेल हो जाता है, तो उसे तुरंत दोबारा टेस्ट देने की अनुमति नहीं मिलेगी. नई नियमावली के अनुसार, फेल होने वाले आवेदकों को दोबारा परीक्षा में बैठने के लिए कम से कम एक सप्ताह (7 दिन) का इंतजार करना होगा. एक सप्ताह की अवधि बीतने के बाद ही परिवहन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर री-टेस्ट के लिए नया स्लॉट बुक करने का विकल्प खुलेगा. इस दौरान आवेदक अपनी कमियों को सुधार कर दोबारा तैयारी के साथ आ सकेंगे.
दलाली राज पर लगेगा पूरी तरह अंकुश
परिवहन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस नई व्यवस्था के ऑनलाइन और कड़े होने से जिला परिवहन कार्यालयों (DTO) में सक्रिय दलालों और बिचौलियों का खेल पूरी तरह खत्म हो जाएगा. चूंकि टेस्ट के परिणाम सीधे सिस्टम द्वारा अंकों के आधार पर जनरेट होंगे, इसलिए पैरवी या पैसे के बल पर बिना टेस्ट दिए लाइसेंस बनवाना अब नामुमकिन होगा. इस नई व्यवस्था से आने वाले समय में बिहार की सड़कों पर ट्रैफिक नियमों का पालन बेहतर होगा और सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ में भी भारी कमी देखने को मिलेगी.
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