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भारतीय रेलवे वंदे भारत ट्रेनों जैसा अनुभव साधारण ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों को भी कराना चाह रहा है,इसलिए ट्रैक पर नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. स्लीपर कुशनिंग तकनीकों से लैस होंगे,जिससे झटके कम से कम लगेंगे. भारतीय रेलवे ने इसको मंजूरी दे दी है.
रेलवे मंत्रालय इस प्रोजेक्ट को दी मंजूरी.
नई दिल्ली. भारतीय रेलवे यात्रा को और बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में भी यात्रियों को लगभग वंदेभारत जैसी सुविधाजनक सफर का अनुभव मिलेगा. रेलवे खासतौर पर ट्रेनों में लगने वाले झटकों को कम करने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल करने का फैसला किया है.
रेल मंत्रालय के एडीजी धर्मेन्द्र तिवारी के अनुसार ट्रेनों में सबसे ज्यादा झटके पॉइंट्स और क्रॉसिंग (जहां ट्रैक बदलते हैं) लगते हैं. साथ ही ब्रिज एप्रोच के दौरान झटके लगते हैं. इन झटकों को कम करने के लिए अब पारंपरिक लोहे और कंक्रीट के भारी स्लीपरों की जगह कॉम्पोजिट स्लीपर लगाए जाएंगे. ये स्लीपर खास कुशनिंग तकनीक से लैस होंगे, जिससे ट्रेन गुजरते समय झटकों का अहसास कम से होगा.
क्या है इनकी खासियत
नई तकनीक के ये स्लीपर हल्के होने के बावजूद अधिक मजबूत होते हैं. ये प्रति वर्ग सेंटीमीटर लगभग 700 किलोग्राम तक भार सहन कर सकते हैं. साथ ही, इनकी डिजाइन ऐसी होगी कि इन्हें जगह की जरूरत और परिस्थितियों के अनुसार तैयार किया जा सकेगा. इससे न सिर्फ यात्रा स्मूद होगी बल्कि स्लीपरों को बिछाने और उनकी मरम्मत भी आसान होगी.
प्रस्ताव को मंजूरी
मंत्रालय ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. अधिकारियों के अनुसार, इन कॉम्पोजिट स्लीपरों के इस्तेमाल से रखरखाव लागत में भी कमी आएगी और इनकी लाइफ पुराने स्लीपरों से ज्यादा होगी. अभी वंदेभारत में आपको झटकों का अहसास नहीं होता है. इन ट्रेनों में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया है. कम से कम झटके लगे. लेकिन ट्रैक पर नई तकनीक के इ्रस्तेमाल के बाद पैसेंजर ट्रेनों पर भी झटके कम से कम लगेंगे.
निगरानी सिस्टम को भी एडवांस बनाया जाएगा
इसके अलावा रेलवे ने ट्रैक की निगरानी को और स्मार्ट बनाने का भी फैसला किया है. अब एआई तकनीक की मदद से पटरियों की जांच की जाएगी. निरीक्षण गाड़ियों में एक खास डिवाइस लगाया जाएगा, जिसमें ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार तकनीक होगी. यह डिवाइस पटरियों के नीचे की स्थिति का विश्लेषण कर समय रहते खराबी का पता लगा सकेगी. वहीं, रेल पटरियों की वेल्डिंग की गुणवत्ता सुधारने के लिए मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग तकनीक लागू की जाएगी. यह तकनीक वेल्डिंग में मौजूद सूक्ष्म दरारों और दोषों को पहचानने में मदद करेगी.

