भारतीय शेयर बाजार में अब रिटेल निवेशकों ने इस बात की गवाही दे दी है वह हर महीने अपनी सैलरी का कुछ हिस्सा निकालकर एसआईपी में निवेश कर रहे हैं. एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के मार्च महीने के ताजा आंकड़ों के अनुसार, एसआईपी के जरिए होने वाले निवेश अपने ऑल टाइन हाई पर पहुंच गया है. फरवरी के 29,845 करोड़ रुपये के मुकाबले ये 8 फीसदी बढ़कर 32,087 करोड़ रुपये हो गया है.
मार्च के महीने में इक्विटी फंड्स में निवेश ने 56 फीसदी की जोरदार छलांग लगाई है. यह आंकड़ा 40,450 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जबकि ठीक एक महीने पहले फरवरी में यह 25,977 करोड़ रुपये था.
नेट इक्विटी इनफ्लो
Association of Mutual Funds in India के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में म्यूचुअल फंड में इक्विटी निवेश में जोरदार बढ़ोतरी देखने को मिली, जबकि कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) महीने-दर-महीने आधार पर घट गए.
मार्च में नेट इक्विटी इनफ्लो 40,366 करोड़ रुपये रहा, जो फरवरी के 25,965 करोड़ रुपये से करीब 55.5% ज्यादा है. इसका मतलब है कि निवेशकों का रुझान शेयर बाजार से जुड़े फंड्स की ओर मजबूत बना हुआ है.
इक्विटी इनफ्लो में बढ़त
सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, Himanshu Srivastava के अनुसार, इक्विटी इनफ्लो में यह बढ़ोतरी लगातार आ रहे SIP निवेश, साल के अंत में पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग और बाजार में गिरावट के दौरान निवेशकों द्वारा नए पैसे लगाने की वजह से हुई है. उन्होंने कहा कि बाजार में आई गिरावट को निवेशकों ने डर के बजाय खरीदारी के मौके के रूप में देखा.
हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव और इक्विटी में व्यापक गिरावट के कारण म्यूचुअल फंड का कुल AUM फरवरी के 82.03 लाख करोड़ रुपये से घटकर मार्च में 73.73 लाख करोड़ रुपये रह गया, यानी करीब 10.1% की गिरावट दर्ज हुई.
गोल्ड ETF में निवेश घटा
इक्विटी कैटेगरी में ETF (एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड) में मार्च के दौरान जबरदस्त निवेश आया. इनफ्लो 4,487 करोड़ रुपये से बढ़कर 19,802 करोड़ रुपये हो गया. वहीं गोल्ड ETF में निवेश घटकर 2,266 करोड़ रुपये रह गया, जो फरवरी में 5,255 करोड़ रुपये था.
सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स में 2,699 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो फरवरी के 2,987.3 करोड़ रुपये से थोड़ा कम है. वहीं डिविडेंड यील्ड फंड्स में इनफ्लो बढ़कर 59.2 करोड़ रुपये हो गया, जो पहले 21.2 करोड़ रुपये था.
Himanshu Srivastava के मुताबिक, वेस्ट एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव रहा. हालांकि, इस गिरावट को लंबे समय के निवेशकों ने अच्छा मौका माना, जिससे म्यूचुअल फंड के जरिए इक्विटी में निवेश बढ़ा.
कॉरपोरेट बॉन्ड फंड्स से दूरी
वहीं डेट और हाइब्रिड कैटेगरी में लिक्विड फंड्स से मार्च में 1.34 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई, जबकि फरवरी में इनफ्लो 59,077.4 करोड़ रुपये था. इससे साफ है कि निवेशकों ने इस दौरान इक्विटी की ओर ज्यादा रुख किया.
कॉरपोरेट बॉन्ड फंड्स में मार्च के दौरान 15,292.6 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज हुई, जो फरवरी के 2,302 करोड़ रुपये से काफी ज्यादा है. वहीं क्रेडिट रिस्क फंड्स में 329.66 करोड़ रुपये का आउटफ्लो रहा, जो पहले 94.2 करोड़ रुपये था. ELSS फंड्स में भी 437.3 करोड़ रुपये की निकासी हुई, हालांकि यह फरवरी के 650 करोड़ रुपये से कम है.
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, AUM में आई गिरावट का मुख्य कारण मार्च में बाजार का कमजोर परफॉर्मेंस रहा, न कि निवेशकों की भारी निकासी. वहीं लिक्विड फंड्स से बड़ी निकासी को साल के अंत में पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग से जोड़ा गया है.

