Wednesday, July 1, 2026
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20 साल में 24वां ट्रांसफर… गजब है IAS तुकाराम मुंढे की कहानी, कड़क तेवर, कड़े फैसलों के ल‍िए मशहूर


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आईएएस तुकाराम मुंढे की पहचान एक ऐसे अफसर के रूप में रही है जो कड़े फैसलों के ल‍िए जाने जाते हैं. यही वजह है क‍ि 20 साल में 24वीं बार उनका ट्रांसफर क‍िया जा चुका है. उनकी कहानी जबरदस्‍त है.

महाराष्‍ट्र में आईएएस तुकाराम मुंढे का एक बार फ‍िर ट्रांसफर.

हाइलाइट्स

  • तुकाराम मुंढे का 20 साल में 24वां ट्रांसफर हुआ.
  • मुंढे ने नांदेड़ में गैरहाजिर शिक्षकों को सस्पेंड किया.
  • मुंढे ने नवी मुंबई में ‘कमिश्नर मॉर्निंग वॉक’ पहल शुरू की.
अगर कोई आईएएस अधिकारी 20 साल की नौकरी में 24 बार ट्रांसफर झेल चुका हो, तो ये महज आंकड़ा नहीं रह जाता. तुकाराम मुंढे, जिनका नाम सुनते ही महाराष्ट्र के कई अफसरों और नेताओं की धड़कनें तेज हो जाती हैं, एक बार फिर सुर्खियों में हैं. वजह वही पुरानी, एक और ट्रांसफर. इस बार उन्हें असंगठित कामगार आयुक्त की जिम्मेदारी से हटाकर दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव पद पर भेजा गया है.

2005 बैच के आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे मूलतः महाराष्ट्र के बीड जिले से आते हैं. प्रशासनिक सेवाओं में कदम रखते ही उन्होंने अपनी पहचान एक कड़क और कड़े फैसले लेने वाले अफसर के तौर पर बनाई. उन्होंने जब नांदेड़ में सहायक कलेक्टर के तौर पर एक स्कूल का दौरा किया और पाया कि कई शिक्षक गैरहाजिर हैं, तो उन्होंने उन्हें तुरंत सस्पेंड कर दिया. इस एक कार्रवाई ने उन्हें पूरे राज्य में चर्चित कर दिया. नतीजा? शिक्षकों की गैरहाजिरी दर 10-12% से घटकर 1-2% रह गई.

जब बंद करवा द‍िया वीआईपी दर्शन
सोलापुर से शुरू हुई उनकी यात्रा आदिवासी क्षेत्रों तक गई, फिर नागपुर, नाशिक, जालना, सोलापुर, और मुंबई जैसे शहरों तक में काम क‍िया. हर जगह एक बात कॉमन रही, उनका बेधड़क अंदाज और जनता के ह‍ित को प्राथमिकता. नाश‍िक में आदिवासी आयुक्त रहते हुए उनके फैसलों से हजारों लोगों को सीधा लाभ मिला. सोलापुर में आषाढ़ी वारी के दौरान उन्होंने नदी प्रदूषण रोकने के लिए तीन हजार शौचालय बनवाए और मंदिरों में VIP दर्शन की व्यवस्था बंद करा दी.

‘कमिश्नर मॉर्निंग वॉक’
नवी मुंबई महानगर पालिका के आयुक्त के रूप में उन्होंने ‘कमिश्नर मॉर्निंग वॉक’ जैसी पहल शुरू की, जहां लोग सुबह पार्क में उनसे मिलकर अपनी समस्याएं बताते थे और मुंढे फौरन मौके पर समाधान करते थे. यह पहल उनकी जन संवाद की क्षमता और ज़मीनी जुड़ाव की मिसाल बनी।

क्यों नहीं रास आते नेताओं को?
तुकाराम मुंढे की सबसे बड़ी ताकत उनका बेखौफ स्वभाव ही शायद उनके ट्रांसफर का सबसे बड़ा कारण भी बनता है. वे राजनीतिक दबाव में झुकने वाले अफसर नहीं हैं. कई बार उनके काम करने के तरीके और फैसले राजनीतिक नेतृत्व को रास नहीं आए लेकिन उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. चाहे राजनेता समझौता करना चाहें या टकराव, मुंढे हमेशा कानून और नियम के साथ खड़े रहे. इस बार उन्हें दिव्यांग कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है, जिसे प्रशासनिक हलकों में ‘कम महत्त्व’ का पद माना जाता है लेकिन अगर इतिहास गवाह है, तो तुकाराम मुंढे जैसे अफसर किसी भी पद पर हों, वे उसे अपनी कार्यशैली से ‘महत्त्वपूर्ण’ बना देते हैं.

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Gyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group… और पढ़ें

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