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कहते हैं कि एक बेहतरीन फिल्म सिर्फ कागज पर लिखी स्क्रिप्ट से नहीं बनती, बल्कि कैमरे के सामने आर्टिस्ट की समझदारी और इम्प्रोवाइजेशन से बनती है. बॉलीवुड के इतिहास में ऐसे कई मौके आए हैं जब एक्टर्स ने किसी सीन की गंभीरता या मस्ती में कुछ ऐसा कह दिया, जो ओरिजिनल स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं था. लेकिन जब वे शब्द स्क्रीन पर आए, तो उन्होंने न सिर्फ दर्शकों को हंसाया और रुलाया, बल्कि फिल्मों को भी हिट करवाने में भी अपनी भूमिका निभाई. चाहे वह अक्षय कुमार की समझदारी हो, नाना पाटेकर का गुस्सा हो या परेश रावल का अनोखा स्टाइल हो… ये ऐसे डायलॉग हैं जो अचानक से बने, लेकिन अब बॉलीवुड की पहचान बन गए हैं. आइए, जानते हैं ऐसे 3 सुपरहिट डायलॉग्स की कहानी.
नई दिल्ली. सिनेमा एक ऐसा जॉनर है, जहां डिसिप्लिन और क्रिएटिविटी का बैलेंस बहुत जरूरी है. अक्सर डायरेक्टर चाहते हैं कि एक्टर्स वही कहें जो राइटर ने कागज पर लिखा है. लेकिन कभी-कभी, एक्टर के इमोशंस और उनकी ऑन-द-स्पॉट कॉमेडी टाइमिंग राइटर की सोच से भी आगे निकल जाती है. बॉलीवुड के तीन सबसे मशहूर डायलॉग, जिन्हें आज बच्चा-बच्चा जानता है, जो असल में कभी फिल्म की स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं थे. ये शब्द तब बोले गए जब कैमरा चल रहा था और एक्टर अपने किरदारों में इतने डूबे हुए थे कि उन्होंने कुछ बिल्कुल नया बना दिया.

1. अक्षय कुमार की मस्ती: 2006 की फिल्म ‘भागम भाग’ बॉलीवुड की सबसे अच्छी प्रियदर्शन कॉमेडी में से एक मानी जाती है. अक्षय कुमार, गोविंदा और परेश रावल की तिकड़ी ने ऐसी जबरदस्त कॉमेडी की कि लोग आज भी इसे बार-बार देखते हैं. इस फिल्म के एक बहुत मशहूर सीन में अक्षय कुमार अचानक पूछते हैं, ‘क्या रूपा, नहा लिया?’ हैरानी की बात है कि यह लाइन फिल्म की ओरिजिनल स्क्रिप्ट में नहीं थी.

अक्षय कुमार सेट पर अपनी हाजिरजवाबी और मस्ती के लिए जाने जाते हैं. अक्षय ने खुद एक इंटरव्यू में बताया कि वह शूटिंग के दौरान बस मस्ती कर रहे थे और यह लाइन उन्होंने अपने को-स्टार को चिढ़ाने के लिए कही थी. डायरेक्टर प्रियदर्शन को अक्षय का बेफिक्र रवैया इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे फाइनल कट में रखने का फैसला किया. आज यह डायलॉग सोशल मीडिया पर एक पॉपुलर मीम है और इसे फिल्म के सबसे मजेदार पलों में से एक माना जाता है.
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2. नाना पाटेकर का गुस्सा: 1994 की फिल्म ‘क्रांतिवीर’ ने नाना पाटेकर को इस लेवल पर पहुंचा दिया कि उनकी तुलना लेजेंडरी एक्टर्स से की जाने लगी. फिल्म का क्लाइमैक्स, जहां नाना पाटेकर को फांसी दी जानी है, और काफी भीड़ वहां इकठ्ठा हो रही है…. बॉलीवुड के सबसे दमदार सीन में से एक है.

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो इस दौरान जब नाना ने कैमरा फेस किया, तो उनके अंदर का आर्टिस्ट जाग गया और वे बोल पड़े- ‘आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने’, जो स्क्रिप्ट का हिस्सा ही नहीं था. उनके इस डायलॉग ने फिल्म के क्लाइमैक्स में जान ला दी थी.

3. परेश रावल का बाबूराव अवतार: जब भी बॉलीवुड की कल्ट कॉमेडी की बात होती है, तो 2000 में आई फिल्म ‘हेरा फेरी’ याद आती है. बाबूराव गणपतराव आप्टे का रोल कर रहे परेश रावल ने इस फिल्म में एक्टिंग को एक नई पहचान दी. एक आइकॉनिक सीन है, जिसमें बाबूराव अपनी परेशानियों से तंग आकर भगवान से शिकायत करता है-‘ऐ उठा ले रे देवा, उठा ले रे बाबा, मुझ अमीर को नहीं रे, ये 2 गरीबों को उठा ले!’ डायरेक्टर प्रियदर्शन इस बात से इतने खुश हुए कि उन्होंने तुरंत कहा, ‘परेश भाई, यह डायलॉग तो रहेगा ही!’ यह स्क्रिप्टेड नहीं था, लेकिन इसने बाबूराव के कैरेक्टर की मासूमियत और चालाकी को पूरी तरह से दिखाया.

इन अनस्क्रिप्टेड पलों ने तीनों फिल्मों की सफलता में अहम योगदान दिया. ‘भागम भाग’ को सिर्फ एक थ्रिलर-कॉमेडी माना जा रहा था, लेकिन अक्षय की छोटी लाइनों ने इसे कॉमेडी गोल्ड बना दिया. ‘क्रांतिवीर’ में नाना पाटेकर के दमदार भाषण ने उन्हें नेशनल अवॉर्ड नॉमिनेशन दिलाया और फिल्म को ब्लॉकबस्टर बना दिया. ‘हेरा फेरी’ के बारे में सभी जानते हैं कि रिलीज के समय इसकी शुरुआत धीमी रही थी, लेकिन बाबूराव के इन वन-लाइनर्स की वर्ड ऑफ माउथ पब्लिसिटी ने इसे एक कल्ट क्लासिक बना दिया.

