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नई दिल्ली1 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि खतरनाक और बीमार कुत्तों को इंजेक्शन लगाकर मारा जा सकता है। लोगों की जान की सुरक्षा बेहद जरूरी है। जो अफसर निर्देश न माने, उस पर अवमानना का केस चलाया जाए।
कोर्ट ने ये भी कहा कि अकेले राजस्थान के श्रीगंगानगर शहर में ही एक महीने के भीतर कुत्तों के काटने की 1084 घटनाएं सामने आईं। रिपोर्ट्स के अनुसार, छोटे बच्चों को गंभीर चोटें आईं, चेहरों पर गहरे घाव हो गए। तमिलनाडु में साल के पहले चार महीनों में ही कुत्तों के काटने की लगभग 2 लाख घटनाएं दर्ज की गईं।
नवंबर 2025 में शीर्ष कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश जारी किए थे। कहा था कि कुत्तों को शेल्टर होम्स में रखें और उन्हें वापस न छोड़ें। सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर भी बैन लगाया था। इसके बाद डॉग लवर्स और NGO ने इन निर्देशों को रद्द करने के लिए आवेदन दिया था। कोर्ट ने 29 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने मामले की सुनवाई की।

सुप्रीम कोर्ट के 9 निर्देश
- राज्य सरकारें पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) के नियमों को मजबूत करें और सही तरीके से लागू करें।
- हर जिले में कम से कम 1 पूरी तरह काम करने वाला ABC सेंटर ( एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर) बनाया जाए।
- जहां आबादी ज्यादा है, वहां जरूरत के हिसाब से ABC सेंटरों की संख्या बढ़ाई जाए।
- कोर्ट के आदेशों और पशु कल्याण नियमों को पूरी तरह लागू किया जाए।
- जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर भी ये नियम लागू करने पर फैसला लिया जाए और उसे तय समय में लागू किया जाए।
- एंटी-रेबीज दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
- NHAI राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाए, जैसे पुराने ट्रांसपोर्ट वाहनों का इस्तेमाल कर उन्हें हटाना। NHAI इसके लिए मॉनिटरिंग और समन्वय व्यवस्था भी बनाए।
- रेबीज से संक्रमित या बेहद खतरनाक कुत्तों के मामले में, कानून के तहत जरूरत पड़ने पर यूथेनेशिया (दया मृत्यु) जैसे कदम उठाए जा सकते हैं ताकि लोगों की जान सुरक्षित रहे।
- कोर्ट के आदेश लागू करने वाले नगर निगम और सरकारी अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा दी जाए। सामान्य तौर पर उनके खिलाफ FIR या सख्त कार्रवाई न की जाए।
29 जनवरी: कोर्ट ने कहा था- हमारी बात मजाक न समझें
पिछले सुनवाई 29 जनवरी को हुई थी, जिसमें बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा था। इस दौरान राज्यों, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) ने दलीलें रखी थीं।
कोर्ट ने कहा था कि आवारा कुत्तों के किसी हमले में चोट या मौत होती है, तो नगर निकाय के साथ ही डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।
कोर्ट ने कहा था कि हमारी टिप्पणियों को मजाक समझना गलत होगा। हम गंभीर हैं। कोर्ट जिम्मेदारी तय करने से पीछे नहीं हटेगा क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में स्थानीय प्रशासन की विफलता सामने आई है।

कोर्ट ने पिछले साल स्वतः संज्ञान लिया था
यह मामला 28 जुलाई 2025 को शुरू हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने देश में आवारा कुत्तों के हमलों और उनसे होने वाली मौतों पर स्वतः संज्ञान लिया था। 11 अगस्त 2025 को कोर्ट ने दिल्ली-NCR से 8 हफ्ते के भीतर सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया था।
इसके खिलाफ विरोध होने पर 22 अगस्त 2025 को कोर्ट ने अपने आदेश में बदलाव किया। कोर्ट ने कहा कि जिन कुत्तों में रेबीज नहीं है और जो आक्रामक नहीं हैं, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जा सकता है, जहां से पकड़ा गया था।
बाद में मामले का दायरा पूरे देश तक बढ़ा दिया गया। 7 नवंबर 2025 को कोर्ट ने अंतरिम आदेश में राज्यों और NHAI को हाईवे, अस्पताल, स्कूल और दूसरे संस्थानों के आसपास से आवारा जानवर हटाने को कहा था।

मामले में हुई पिछली 8 सुनवाई…
29 जनवरी 2026: जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा था कि कोर्ट निजी पक्षों की दलीलें पूरी करके आज ही सुनवाई खत्म करना चाहती है। इसके बाद राज्यों को एक दिन का मौका दिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…
9 जनवरी, 2026: एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर के वकील ने कहा कि सभी कुत्ते आक्रामक नहीं होते। दिल्ली एम्स में गोल्डी नाम का एक कुत्ता है, जो सालों से वहां है लेकिन कभी किसी को नहीं काटा। इस बात पर कोर्ट ने टैगोर के वकील को फटकार लगाते हुए कहा था- ऐसे कुत्तों को अच्छा दिखाने या महान साबित करने की कोशिश न करें। पूरी खबर पढ़ें…
8 जनवरी, 2026: जस्टिस नाथ ने कहा था कि कुत्ते इंसानों का डर पहचान लेते हैं इसलिए काटते हैं। इस पर एक वकील (कुत्तों के फेवर वाले) ने इनकार किया। फिर जस्टिस ने कहा- अपना सिर मत हिलाइए, ये बात मैं पर्सनल एक्सपीरियंस से बोल रहा हूं। पूरी खबर पढ़ें…
7 नवंबर 2025: कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, रेलवे स्टेशनों आदि से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश जारी किया। आदेश में कहा गया कि ठिकानों से हटाए गए कुत्ते फिर वहीं वापस नहीं छोड़े जाएं। पढ़ें पूरी खबर…
3 नवंबर 2025: मुख्य सचिवों की व्यक्तिगत बुलाने के लिए कहा। जब बिहार के मुख्य सचिव ने चुनाव के कारण छूट मांगी, तो कोर्ट ने यह अनुमति नहीं दी। कहा कि चुनाव में आपकी भूमिका विशेष नहीं है, इसलिए आपको पेश होना ही होगा। पढ़ें पूरी खबर…
27 अक्टूबर 2025: राज्यों को फटकार लगाई। कहा कि आवारा कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं से देश की छवि को नुकसान पहुंचता है। पढ़ें पूरी खबर…
22 अगस्त 2025: पहले के आदेश में बदलाव किया। नसबंदी-टीकाकरण के बाद उन्हें वापस उनके इलाके में छोड़ने को कहा। सार्वजनिक जगहों पर निर्दिष्ट फीडिंग-जोन घोषित करना। पढ़ें पूरी खबर…
11–14 अगस्त 2025: कोर्ट ने पहली बार डॉग्स को सड़कों से उठाकर शेल्टर होम में रखने का आदेश दिया था। पढ़ें पूरी खबर…

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सुप्रीम कोर्ट बोला-कुत्ते के काटने पर भारी मुआवजा तय होगा: जो आवारा कुत्तों को लेकर चिंतित, वे अपने घर ले जाएं; उन्हें ऐसे नहीं छोड़ सकते

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के हमलों पर सख्त टिप्पणी में कहा था- बच्चों या बुजुर्गों को कुत्तों के काटने, चोट लगने या मौत के हर मामले में हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा दिलवाएंगे, क्योंकि उन्होंने पिछले 5 सालों में नियमों को लागू करने के लिए कुछ नहीं किया। पूरी खबर पढ़ं…


