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Delhi High Court News: दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि पत्नी द्वारा पति पर परिवार से रिश्ता तोड़ने का दबाव मानसिक क्रूरता है और इस तरह यह तलाक का वैध आधार है. कोर्ट ने इसके साथ ही महिला की याचिका को खारिज भी कर दिया.
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि पति या पत्नी पर अपने परिवार से रिश्ते तोड़ने का दबाव डालना मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) की श्रेणी में आता है और इसे तलाक का वैध आधार माना जा सकता है. जस्टिस अनिल खसेतरपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है. कोर्ट का यह आदेश उस समय दिया, जब एक महिला ने पारिवारिक अदालत के जनवरी 2023 के आदेश को चुनौती दी थी. पारिवारिक अदालत ने पति की याचिका स्वीकार करते हुए दांपत्य संबंध (Marriage Relation) समाप्त कर दिए थे.
मामला क्या है
पत्नी का पक्ष
दूसरी तरफ, महिला ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि उसे ससुराल में सास और ननद से लगातार परेशानियां झेलनी पड़ीं. गर्भावस्था के दौरान उसे अपमानित किया गया, घर के संसाधन तक सीमित कर दिए गए और उससे अनुचित उम्मीदें रखी गईं. उसने कहा कि इस प्रताड़ना से उसे मानसिक और शारीरिक नुकसान हुआ, उसका बेटा भी प्रभावित हुआ और कई बार पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा. जस्टिस शंकर द्वारा लिखित फैसले में हाईकोर्ट ने पारिवारिक अदालत के आदेश को बरकरार रखा. अदालत ने कहा कि पत्नी का आचरण सामान्य वैवाहिक मतभेदों से कहीं आगे था. लगातार पति पर दबाव बनाना कि वह अपने परिवार से नाता तोड़े, साथ ही अपमान, धमकी और भावनात्मक दूरी ने विवाह को असहनीय बना दिया.

बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
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