Monday, June 29, 2026
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सास-ससुर से नहीं प्‍यार, तो बन सकता है तलाक का आधार


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Delhi High Court News: दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि पत्नी द्वारा पति पर परिवार से रिश्ता तोड़ने का दबाव मानसिक क्रूरता है और इस तरह यह तलाक का वैध आधार है. कोर्ट ने इसके साथ ही महिला की याचिका को खारिज भी कर दिया.

दिल्‍ली हाईकोर्ट ने तलाक को लेकर बड़ा फैसला दिया है.
नई दिल्ली. पति-पत्‍नी के बीच तलाक के कई आधार होते हैं. कोर्ट की ओर से समय-समय पर नई वजहें भी जोड़ी जाती हैं. हसबैंड-वाइफ के बीच तल्‍ख रिश्‍ते से जुड़े एक मामले में दिल्‍ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने स्‍पष्‍ट शब्‍दों में कहा कि पत्‍नी की ओर से पति पर परिवार से रिश्‍ते तोड़ने का दबाव बनाना मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) की श्रेणी में आता है और यह तलाक का वैलिड आधार है. हाईकोर्ट ने इस आदेश के साथ महिला की याचिका को खारिज कर दिया. दूसरे शब्‍दों में कहा जाए तो सास-ससुर, देवर या ननद से रिश्‍ता तोड़ने का दबाव डालना पति को तलाक लेने का आधार दे सकता है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि पति या पत्नी पर अपने परिवार से रिश्‍ते तोड़ने का दबाव डालना मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) की श्रेणी में आता है और इसे तलाक का वैध आधार माना जा सकता है. जस्टिस अनिल खसेतरपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है. कोर्ट का यह आदेश उस समय दिया, जब एक महिला ने पारिवारिक अदालत के जनवरी 2023 के आदेश को चुनौती दी थी. पारिवारिक अदालत ने पति की याचिका स्वीकार करते हुए दांपत्य संबंध (Marriage Relation) समाप्त कर दिए थे.

मामला क्या है

कपल की शादी मार्च 2007 में हुई थी और उनका एक बेटा भी है. दोनों साल 2011 से अलग रह रहे हैं. पति ने साल 2016 में तलाक की अर्जी दायर की थी. उसने आरोप लगाया कि पत्नी संयुक्त परिवार में रहने को तैयार नहीं थी और उस पर लगातार दबाव डालती रही कि वह परिवार की संपत्ति का बंटवारा करे और मां-बहन से अलग रहकर स्वतंत्र जीवन जिए. पति ने यह भी दावा किया कि पत्नी ने घर के कामकाज की जिम्मेदारी निभाने से इनकार किया, परिवारजनों के साथ असम्मानजनक व्यवहार किया, सार्वजनिक कार्यक्रमों में विवाद खड़े किए और यहां तक धमकी दी कि वह उसके परिवार को फर्जी आपराधिक मामलों में फंसा देगी. जनवरी 2023 में पारिवारिक अदालत ने पति के पक्ष में फैसला सुनाया और तलाक की डिक्री पारित कर दी. इसके खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

पत्नी का पक्ष

दूसरी तरफ, महिला ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि उसे ससुराल में सास और ननद से लगातार परेशानियां झेलनी पड़ीं. गर्भावस्था के दौरान उसे अपमानित किया गया, घर के संसाधन तक सीमित कर दिए गए और उससे अनुचित उम्मीदें रखी गईं. उसने कहा कि इस प्रताड़ना से उसे मानसिक और शारीरिक नुकसान हुआ, उसका बेटा भी प्रभावित हुआ और कई बार पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा. जस्टिस शंकर द्वारा लिखित फैसले में हाईकोर्ट ने पारिवारिक अदालत के आदेश को बरकरार रखा. अदालत ने कहा कि पत्नी का आचरण सामान्य वैवाहिक मतभेदों से कहीं आगे था. लगातार पति पर दबाव बनाना कि वह अपने परिवार से नाता तोड़े, साथ ही अपमान, धमकी और भावनात्मक दूरी ने विवाह को असहनीय बना दिया.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

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