Wednesday, July 1, 2026
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सहारनपुर में महादेव मंदिर की प्रॉपर्टी हड़पने का आरोप: 71 साल से लापता भूमि स्वामी की जगह किया दूसरा आदमी, कोर्ट के आदेश पर हुई FIR – Saharanpur News



सहारनपुर में महादेव मंदिर की प्रॉपर्टी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। एक युवक ने मंदिर की प्रॉपर्टी के फर्जी डॉक्यूमेंट तैयार कर कब्जाने का आरोप लगाया है। एसीजेएम-1 के आदेश पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले को लेकर जांच शुरू

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थाना देहात कोतवाली क्षेत्र की गोविंद विहार निवासी पार्थ ग्रोवर ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि महादेव मंदिर का निर्माण उसके बड़ों व खत्री समाज के लोगों द्वारा कराया गया था। मंदिर की जमीन खसरा संख्या 734, खेवट संख्या 73, दरा राजपुरा स्वाद, नुमाइश कैंप में आती है। पुराने अभिलेखों में भी ये जमीन “मंदिर महादेव” के नाम दर्ज है।

आरोप है कि विक्रम सिंह और उसके परिजनों ने 13 दिसंबर 1995 को एक फर्जी व्यक्ति को “आशाराम पुत्र नाथीराम” बताकर खड़ा किया। असली आशाराम वर्ष 1954 में ही लापता हो गए थे, जबकि आरोपियों ने सलेमपुर भूखड़ी निवासी को आशाराम बनाकर खड़ा कर दिया और उसके नाम से फर्जी वसीयत तैयार कर ली।

इस वसीयत में ये भी झूठा लिखा गया कि प्रॉपर्टी उन्हें उनके बुजुर्गों से मिली है। खास बात ये है कि आरोपी ने अपने ही पिता को गवाह बनाकर इस वसीयत को तैयार कराया। वादी के अनुसार, ये मामला पूर्व में सिविल जज जूनियर डिवीजन सहारनपुर (मंदिर महादेव बनाम डॉ.जयशंकर प्रसाद) में भी उठा था। कोर्ट ने 28 मई 2011 को आदेश दिया था कि असली आशाराम 1954 में लापता हो गए थे और आरोपी पक्ष ने आशाराम फर्जी प्रस्तुत किया है। कोर्ट अदालत ने आरोपी के पिता का दावा भी निरस्त कर दिया था।

वादी ने आरोप लगाया कि आरोपी ने इसके बावजूद भी 18 जनवरी 2011 को एक और वसीयत बनवाई। इसमें नितिन सैनी व मशरूफ को गवाह बनाया गया। आरोप है कि आरोपी मंदिर की सेवा भावना के बजाय मंदिर की बेशकीमती संपत्ति हड़पने की नियत से ये सब कर रहे हैं।

वादी का कहना है कि आरोपी ने 2019 में दीवानी वाद संख्या 450/19 (मंदिर महादेव बनाम कुमारी देहुती) में मंदिर की संपत्ति को निजी संपत्ति बताते हुए दावा प्रस्तुत किया था। कोर्ट से डिग्री प्राप्त कर ली। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को डराकर व कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराकर अपने पक्ष में गलत साक्ष्य तैयार किए गए।

आरोप है कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान, नगद राशि और जेवरात तक विपक्षी चोरी से उठाकर अपने घर ले जाते हैं। आरोप है कि 2022 में आरोपियों ने कुमारी देहुती से राजीनामा कराया और फिर उसी संपत्ति को 2023 में आरोपियों के कब्जे में दिखाने के लिए कई फर्जी दस्तावेज तैयार किए। यहां तक कि निर्माण सामग्री के फर्जी पर्चे भी पीछे की तारीखों में बनाए गए।

आरोप है कि उसने 12 अगस्त 2025 को एसएसपी को शिकायत की थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद कोर्ट में न्याय की गुहार लगा। कोर्ट ने सभी दस्तावेजों को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया।



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