Thursday, May 14, 2026
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‘सर्वदलीय बैठक बुलाएं PM मोदी, देश को बताएं चल क्या रहा’, शरद पवार क्यों भड़के


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Sharad Pawar On PM Modi Appeal: वेस्ट एशिया में जारी युद्ध के कारण भारत की इकोनॉमी पर बड़े संकट के बादल मंडरा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से तेल, सोना और खाद के उपयोग में कटौती की अपील के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है. शरद पवार ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है. विपक्ष ने इसे सरकार की नाकामी करार दिया है.

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पीएम मोदी की ‘किफायत’ वाली अपील पर शरद पवार भड़के, सर्वदलीय बैठक बुलाने की डिमांड. (File Photo : PTI)

नई दिल्ली: वेस्ट एशिया में युद्ध जैसे हालातों ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से कुछ कड़े कदम उठाने और संसाधनों के उपयोग में कटौती करने की अपील की है. पीएम की इस अचानक आई ‘किफायत’ (Austerity) वाली सलाह ने विपक्ष को हमलावर होने का मौका दे दिया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) के अध्यक्ष शरद पवार ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जाहिर की है. उन्होंने कहा कि पीएम की घोषणाओं से देश के आम नागरिकों, उद्योग जगत और विदेशी निवेशकों के बीच डर का माहौल बन गया है. पवार ने मांग की है कि प्रधानमंत्री को तुरंत सभी राजनीतिक दलों की एक बैठक बुलानी चाहिए. इसमें देश की आर्थिक स्थिरता और भविष्य की नीतियों पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए.

पीएम मोदी ने जनता से क्या अपील की है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद की रैली और सोशल मीडिया के जरिए देश के सामने 7 बड़ी अपीलें रखी हैं. उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध की वजह से सप्लाई चैन पूरी तरह टूट गई है. पेट्रोल, डीजल, गैस और खाद की कीमतें आसमान छू रही हैं. विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए पीएम ने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की सलाह दी है. इसके अलावा उन्होंने ऑफिस जाने के बजाय ‘वर्क फ्रॉम होम’ अपनाने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का यूज करने और खाने के तेल की खपत कम करने को कहा है. उन्होंने किसानों से भी केमिकल फर्टिलाइजर का इस्तेमाल आधा करने का आग्रह किया है. पीएम का तर्क है कि डॉलर में होने वाले इन आयातों को कम करके ही देश की आर्थिक सेहत को सुधारा जा सकता है.

शरद पवार ने क्यों जताई आर्थिक अस्थिरता की आशंका?

दिग्गज नेता शरद पवार का कहना है कि जिस तरह से अचानक ये घोषणाएं की गई हैं, उनका भारतीय अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक असर पड़ेगा. पवार ने सोशल मीडिया पर लिखा कि राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर सभी दलों को विश्वास में लेना जरूरी है.

पवार ने सरकार को सुझाव दिया कि केवल राजनीतिक नेताओं ही नहीं, बल्कि देश के बड़े अर्थशास्त्रियों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के साथ भी एक हाई-लेवल मीटिंग होनी चाहिए.





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