Thursday, May 7, 2026
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सर्दी में इम्यूनिटी बूस्ट करेगी ये आंवले की ये रिसपी, हर को करेगा स्वाद की तारीफ


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Amla Candy Recipe : हजारीबाग में आंवला कैंडी सर्दियों में खास पसंद की जाती है.फूड एक्सपर्ट रवीना कच्छप ने इसकी आसान विधि बताई हैं, जिसमें आंवला, चीनी, विनेगर और कॉर्न फ्लोर का उपयोग होता है. आइये जानते हैं इसकी रेसिपी के बारे में…

सर्दियों का मौसम आते ही बाजार में आंवला दिखाई देने लगता है. इसके साथ ही घरों में इससे बनने वाले पारंपरिक व्यंजनों की तैयारी शुरू हो जाती है. आचार, मुरब्बा और कैंडी खासतौर पर इसी मौसम में खूब बनाए जाते हैं. झारखंड के हजारीबाग जिले में आंवला से बनी चीजों का विशेष महत्व है. यहां लोग सर्दियों के लिए घर पर ही आंवला कैंडी तैयार करते हैं.

आंवला

आंवला कैंडी बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को खूब पसंद आती है. विटामिन सी से भरपूर आंवला सर्दियों में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. हजारीबाग जिले में आज भी कई परिवार बाजार की कैंडी के बजाय घर पर बनी आंवला कैंडी को प्राथमिकता देते हैं.

आंवला

आंवला कैंडी बनाने की आसान विधि साझा करते हुए हजारीबाग की महिला रवीना कच्छप बताती हैं कि इस कैंडी को हर कोई अपने घर में आसानी से तैयार कर सकता है. इसे बनाने में अधिक सामग्री का इस्तेमाल नहीं होता है, जिस कारण से कम खर्चे में इसे तैयार किया जा सकता है. इसे इस तरह तैयार किया जाता है कि इसका प्राकृतिक स्वाद भी खराब ना हो.

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आंवला

उन्होंने बताया कि इसके लिए सबसे पहले बाजार से अच्छी क्वालिटी के ताजे और सख्त आंवले खरीदे जाते हैं. इसके बाद आंवले को साफ पानी से अच्छी तरह धो लिया जाता है. धोने के बाद आंवले को गर्म पानी से करीब 10 मिनट भाप दी जाती है, भांप देते समय इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि आंवला अधिक पके नहीं. भाप देने के बाद आंवले को कपड़े से पोंछकर अच्छी तरह साफ और सूखा लिया जाता है.

आंवला

आंवला ठंडे हो जाने के बाद उन्हें हाथ से टुकड़ों में तोड़ लिया जाता है और बीज अलग कर दिए जाते हैं. इसके बाद आंवले के टुकड़ों में आधे मात्रा में चीनी मिलाई जाती है. इस मिश्रण को अच्छी तरह मिलाया जाता है, ताकि चीनी सभी टुकड़ों पर समान रूप से लग जाए. इसके बाद इसमें हल्की मात्रा में विनेगर डाला जाता है.

आंवला

रवीना आगे बताती हैं कि विनेगर मिलाने का मुख्य उद्देश्य कैंडी को खराब होने से बचाना होता है. विनेगर की वजह से चीनी के प्रभाव से कैंडी में फंगस नहीं लगती और यह लंबे समय तक सुरक्षित रहती है. इसके बाद इस मिश्रण को ढककर तीन दिनों के लिए रख दिया जाता है, ताकि चीनी का रस धीरे-धीरे आंवले के अंदर तक समाहित हो जाए.

आंवला

तीन दिनों बाद चीनी पूरी तरह गल जाती है और आंवले का पानी बाहर निकल आता है. इसके बाद इस रस को अलग कर लिया जाता है. आंवले के टुकड़ों को जालीदार बर्तन या छलनी में डालकर अतिरिक्त रस निकाल दिया जाता है. इसके बाद इन टुकड़ों को दो दिनों तक धूप में सुखाया जाता है, जिससे उनमें मौजूद नमी पूरी तरह खत्म हो जाए.

आंवला

धूप में सुखाने के बाद आंवला कैंडी में हल्की मात्रा में कॉर्न फ्लोर मिलाया जाता है. इससे नमी के कारण चीनी पीली नहीं पड़ती और कैंडी आपस में चिपकती भी नहीं है. अंत में इसे एयरटाइट कंटेनर में भरकर रख लिया जाता है. करीब एक महीने तक स्वादिष्ट और सुरक्षित बनी रहती है.

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