झाबुआ जिले की पेटलावद तहसील के ग्राम सारंगी में प्रशासन ने सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। यह पूरा मामला सर्वे नंबर 1784/2 की जमीन का है, जो सरकारी कामों के लिए सुरक्षित रखी गई है।
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दरअसल, हाल ही में प्रस्तावित बदनावर-टिमरवानी फोरलेन का कट पॉइंट इस जमीन के पास तय हुआ है, जिसके बाद से यहां की जमीनों के दाम आसमान छूने लगे हैं।
फोरलेन की वजह से बढ़े दामों का फायदा उठाने के लिए भू-माफियाओं और कब्जाधारियों ने एक ही रात में लोहे के एंगल और शेड लगाकर 20 से ज्यादा दुकानें खड़ी कर दी थीं। आरोप तो यह भी है कि ग्राम पंचायत के साथ सांठगांठ करके इस कीमती जमीन के फर्जी पट्टे भी बांट दिए गए थे।
जब इस मामले की शिकायत कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट के पास जनसुनवाई में पहुंची, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए एसडीएम तनुश्री मीणा को तुरंत एक्शन लेने के निर्देश दिए।
महिलाओं ने दी खुदकुशी की धमकी, पर नहीं रुका बुलडोजर
सोमवार को पेटलावाद तहसीलदार अनिल बघेल भारी पुलिस बल और राजस्व टीम के साथ जब अतिक्रमण हटाने पहुंचे, तो उन्हें कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। कुछ महिलाओं ने तो हाथ में पत्थर उठा लिए और खुद को नुकसान पहुंचाने (आत्मदाह जैसी) धमकी देकर टीम को रोकने की कोशिश की।
इसके बावजूद तहसीलदार ने बिना किसी दबाव के अपनी कार्रवाई जारी रखी और बुलडोजर चलाकर सारे अवैध कब्जों को मलबे में मिला दिया।
बांटे गए फर्जी पट्टों की जांच शुरू
प्रशासन के मुताबिक, इस जमीन में से दो हेक्टेयर भूमि पहले से ही पेटलावद की विपणन सहकारी संस्था को वेयरहाउस और टमाटर केचप प्लांट के लिए दी जा चुकी है। इसके अलावा, 10 आरा जमीन पर सोसाइटी का भवन और करीब डेढ़ हेक्टेयर जमीन पर गाडोलिया समाज का कब्जा है।
प्रशासन अब इस बात की बारीकी से जांच कर रहा है कि जिस जमीन का मालिकाना हक ग्राम पंचायत के पास था ही नहीं, उसके पट्टे आखिर कैसे और किसने बांट दिए।

इस बड़ी कार्रवाई के दौरान पेटलावद थाना प्रभारी निर्भयसिंह भूरिया, चौकी प्रभारी दीपक देवरे समेत पुलिस और राजस्व विभाग का अमला मुस्तैद रहा।



