अमौर के विष्णुपुर पंचायत स्थित मैत्रा गांव के ग्रामीणों ने सरकारी उदासीनता से परेशान होकर मारखीधार नदी पर खुद ही अस्थायी रास्ता बना लिया है। वर्षों से पुल निर्माण की मांग पूरी न होने पर ग्रामीणों ने चंदा और श्रमदान के माध्यम से यह कदम उठाया। लगभग एक हजार की आबादी वाले इस गांव के लोगों को दैनिक कार्यों के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। मरीजों को अस्पताल ले जाने, बच्चों को स्कूल भेजने या बाजार जाने जैसे हर छोटे-बड़े काम में ग्रामीणों को परेशानी होती थी। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार स्थानीय मुखिया और विधायक से पुल निर्माण की मांग की थी। हालांकि, उनकी फरियाद पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसके बाद गांव के लोगों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर अस्थायी रास्ता बनाने का निर्णय लिया। स्थानीय ग्रामीण मो. अकबर, मो. जुबेर आलम, कलीमुद्दीन और इफ्तिखार ने बताया कि रास्ता बनाने के लिए ग्रामीणों ने अपनी बकरियां, चावल और बत्तख बेचकर पैसे जुटाए। इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों ने श्रमदान कर नदी में मिट्टी भरी, जिससे तत्काल आवाजाही की व्यवस्था हो सकी। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक अस्थायी समाधान है और बरसात के मौसम में यह रास्ता फिर से टूट सकता है। इसलिए, वे अब भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मारखीधार नदी पर एक स्थायी पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं, ताकि गांव के लोगों को दीर्घकालिक राहत मिल सके।
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