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रूस से कच्चे तेल की खरीद में आई गिरावट ने भारत के ऊर्जा बाजार में नई चर्चा छेड़ दी है. अप्रैल 2026 में भारत का रूसी तेल आयात 15 प्रतिशत से ज्यादा घटकर 4.5 अरब यूरो पर पहुंच गया. विशेषज्ञों के मुताबिक, इसकी बड़ी वजह गुजरात की एक प्रमुख रिफाइनरी का रखरखाव के लिए बंद होना रही. हालांकि गिरावट के बावजूद भारत अब भी रूस से सबसे ज्यादा पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों में शामिल बना हुआ है.
अप्रैल में रूस से तेल खरीद 15% घटी. (Representative Image:AI)
नई दिल्ली. भारत ने अप्रैल 2026 में रूस से कच्चे तेल की खरीद में बड़ी कमी दर्ज की है. रिपोर्ट के मुताबिक, रूस से आयात 15 प्रतिशत से ज्यादा घटकर 4.5 अरब यूरो रह गया. इसकी सबसे बड़ी वजह एक प्रमुख रिफाइनरी का रखरखाव के लिए बंद होना बताया जा रहा है. हालांकि गिरावट के बावजूद भारत रूस से जीवाश्म ईंधन खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल बना हुआ है.
रूस से तेल आयात में आई बड़ी गिरावट
यूरोपीय शोध संस्था Centre for Research on Energy and Clean Air यानी CREA की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में भारत ने रूस से 5.3 अरब यूरो का कच्चा तेल खरीदा था, लेकिन अप्रैल में यह घटकर 4.5 अरब यूरो रह गया. यानी एक महीने में ही आयात में 15 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई. रिपोर्ट में कहा गया कि अप्रैल में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में भी 3.7 प्रतिशत की कमी आई. इसमें सबसे बड़ा असर रूस से आने वाले तेल पर पड़ा, जहां मासिक आधार पर करीब 19.4 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. इसके बावजूद भारत अप्रैल में रूस से जीवाश्म ईंधन खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बना रहा.
रिफाइनरी बंद होने से प्रभावित हुई खरीद
विशेषज्ञों के मुताबिक इस गिरावट की मुख्य वजह गुजरात स्थित वाडिनार रिफाइनरी का रखरखाव के लिए बंद होना रही. Nayara Energy की यह रिफाइनरी काफी हद तक रूसी कच्चे तेल पर निर्भर मानी जाती है. रिपोर्ट के अनुसार, वाडिनार रिफाइनरी में रूसी तेल की आवक करीब 92 प्रतिशत तक गिर गई. वहीं जामनगर रिफाइनरी में भी 38 प्रतिशत की कमी देखी गई. हालांकि दूसरी तरफ इंडियन ऑयल की रिफाइनरी में रूसी तेल आयात 87 प्रतिशत बढ़ गया, जिससे कुछ हद तक संतुलन बना रहा.
कुछ रिफाइनरियों ने फिर शुरू की खरीद
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि नया मंगलूर और विशाखापत्तनम रिफाइनरियों ने नवंबर 2025 के बाद रूसी तेल खरीदना लगभग बंद कर दिया था. लेकिन मार्च 2026 से इन रिफाइनरियों ने दोबारा रूस से तेल खरीद शुरू कर दी. विशाखापत्तनम रिफाइनरी में अप्रैल के दौरान रूसी तेल का आयात 149 प्रतिशत तक बढ़ गया. इससे संकेत मिलता है कि भारत अभी भी सस्ते और वैकल्पिक तेल स्रोतों की तलाश में सक्रिय है. जानकारों का मानना है कि वैश्विक बाजार की परिस्थितियों और कीमतों के आधार पर भारत लगातार अपनी रणनीति बदल रहा है.
अमेरिकी छूट और बढ़ती कीमतों का असर
CREA की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के हफ्तों में अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली कुछ छूटों के कारण रूसी तेल की सप्लाई फिर बढ़ी है. यही वजह है कि कई भारतीय कंपनियों ने दोबारा खरीद बढ़ाने में रुचि दिखाई. हालांकि इसी दौरान रूस के यूराल कच्चे तेल की कीमत में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई. अप्रैल में इसकी औसत कीमत बढ़कर 112.3 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जो यूरोपीय संघ और ब्रिटेन द्वारा तय सीमा से काफी ज्यादा है. बढ़ती कीमतें भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए नई चिंता पैदा कर सकती हैं.
भारत के लिए क्यों अहम है रूसी तेल?
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से बड़े पैमाने पर रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदना शुरू किया था. इससे भारत को ऊर्जा जरूरतें पूरी करने और आयात लागत कम रखने में मदद मिली. कुछ ही वर्षों में रूस भारत के सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग देशों से तेल खरीद की रणनीति अपनाता है. ऐसे में किसी एक रिफाइनरी के बंद होने या वैश्विक कीमतों में बदलाव का सीधा असर आयात आंकड़ों पर दिखाई देता है. आने वाले महीनों में पश्चिम एशिया की स्थिति, अमेरिकी प्रतिबंध और वैश्विक तेल कीमतें भारत की आयात नीति को प्रभावित कर सकती हैं.
ऊर्जा सुरक्षा पर बना रहेगा फोकस
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है और उसकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक ऊर्जा आयात पर निर्भर करती है. इसलिए सरकार और तेल कंपनियां लगातार ऐसे विकल्प तलाशती रहती हैं, जिनसे लागत कम हो और सप्लाई स्थिर बनी रहे. रूस से आयात में आई यह गिरावट अस्थायी मानी जा रही है, लेकिन इससे यह साफ हो गया है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में छोटे बदलाव भी भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देशों पर बड़ा असर डाल सकते हैं. आने वाले समय में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए संतुलित और लचीली रणनीति पर जोर देता रहेगा.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें

