Last Updated:
दो फिल्मों में कई बार एक जैसी कहानी देखने को मिल जाती है. 70 के दशक में दो ऐसी फिल्में आई जिनमें बदले की कहानी थी. दोनों एक्शन थ्रिलर फिल्में थीं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों फिल्मों के विलेन का नाम सेम था. दोनों फिल्मों के विलेन अपने-अपने किरदार में अमर हो गए. दोनों फिल्मों के गाने खूब पॉप्युलर हुए. एक मूवी जहां सुपरहिट साबित हुई तो दूसरी फिल्म आइकॉनिक बन गई. दोनों फिल्में 7 साल के अंतराल में रिलीज हुई थीं.
70 के दशक में रिवेंज बेस्ड मसाला फिल्मों का चलन शुरू हुआ. इन फिल्मों में एक्शन-रोमांस-म्यूजिक, क्राइम-थ्रिल हर एलिमेंट था.
इसी दशक में 7 साल के अंतराल में दो ऐसी फिल्में आईं जिनमें बदले की कहानी थी. दोनों ही मसाला फिल्में थीं. मजेदार बात यह है कि दोनों फिल्मों में विलेन का नाम एक जैसा था. एक फिल्म में जहां ही मैन धर्मेंद्र थे तो दूसरी में एंग्री यंगमैन अमिताभ बच्चन लीड रोल में थे. दोनों ही फिल्मों के गाने सुपरहिट थे. ये फिल्में थीं : यादों की बारात और शान. मजेदार बात यह है कि दोनों फिल्मों की स्क्रिप्ट सलीम-जावेद ने लिखी थी.

आमिर खान के ताया नासिर हुसैन ने 70 के दशक में पहली मसाला फिल्म ‘यादों की बारात’ बनाई थी जिसकी कहानी सलीम-जावेद ने लिखी थी. निर्देशन-प्रोडक्शन नासिर हुसैन ने किया था. फिल्म में धर्मेंद्र, विजय अरोड़ा, तारिक खान, जीनत अमान लीड रोल में थे. फिल्म के मेन विलेन अजीत थे. तारिक खान बॉलीवुड सुपर स्टार आमिर खान के ममेरे भाई हैं. फिल्म में आमिर खान ने तारिक के बचपन का रोल निभाया था.

फिल्म का सदाबहार म्यूजिक आरडी बर्मन ने कंपोज किया था. फिल्म में कुल 6 गाने थे. मजरूह सुल्तानपुरी ने ऐसे गाने लिखे जो अमर हो गए. फिल्म का पॉप्युलर गाना ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’ मूवी की पहचान बन गया. आशा भोसले-मोहम्मद रफी ने इस कालजयी गीत को गाया था. सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिल्म का टाइटल ट्रैक दो लीजेंड सिंगर मोहम्मद रफी और किशोर कुमार ने गाया था.
Add News18 as
Preferred Source on Google

सलीम-जावेद की जोड़ी ने 1965 में आई ‘वक्त’ फिल्म की कहानी को नए अंदाज में लिखा था. इसीलिए ‘वक्त’ और ‘यादों की बारात’ फिल्मों में कई समानताए हैं. दोनों फिल्मों की शुरुआत में ही परिवार के सदस्य बिछुड़ जाते हैं और कहानी के अंत में मिल पाते हैं. दोनों फिल्मों में ‘खोया-पाया’ का फॉर्मूला आजमाया गया था. ‘यादों की बारात’ की स्टोरी में बदले की भी कहानी थी. धर्मेंद्र अपने पिता का कातिल का चेहरा नहीं देख पाते. वो पूरी जिंदगी पिता के कातिल को खोजते रहते हैं. मेन विलेन अजीत थे. फिल्म में मेन विलेन का नाम ‘शाकाल’ था. आगे चलकर 1980 में आई ‘शान’ फिल्म के विलेन का नाम भी ‘शाकाल’ था. शान फिल्म में ‘शाकाल’ का कालजयी रोल कुलभूषण खरबंदा ने निभाया था.

‘यादों की बारात’ ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी थी. करीब 4.25 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह उस साल की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी. 1973 का साल धर्मेंद्र के लिए बहुत ही खास रहा. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसी साल बॉलीवुड को अमिताभ बच्चन के रूप में एंग्रीमैन मिला जिन्होंने बॉलीवुड में एकतरफा राज किया.

इसी तरह बदले की कहानी पर सलीम-जावेद ने एक और स्क्रिप्ट लिखी. इस स्क्रिप्ट पर बनी फिल्म का नाम ‘शान’ था जिसकी तुलना 1975 की ऑल टाइम ग्रेट फिल्म ‘शोले’ से भी की गई. दोनों फिल्म की स्टार कास्ट, कहानी, विलेन सबकुछ ‘शोले’ जैसा ही था. इस फिल्म की गिनती आज कल्ट क्लासिक मूवी में होती है. फिल्म ने सुपरहिट मूवी से ज्यादा कमाई की लेकिन फिर भी उसे फ्लॉप करार दिया गया. इस फिल्म के वीडियो कैसेट खरीदने के लिए शहरों में लूट मच गई थी.

‘शोले’ की अपार सफलता के बाद रमेश सिप्पी से दर्शकों को इसी तरह की फिल्म की उम्मीद थी. रमेश सिप्पी ने सलीम-जावेद से साफ कहा कि ऐसी कहानी लिखिए जो शोले से भी बड़ी हो. हर पहलू से फिल्म ‘शोले’ से बड़ी हो. ‘शान’ फिल्म में सुनील दत्त, शशि कपूर, अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, राखी गुलजार, परवीन बॉबी, बिंदिया गोस्वामी, जॉनी वॉकर और कुलभूषण खरबंदा जैसे सितारे नजर आए. कुलभूषण खरबंदा ने ‘शाकाल’ का रोल निभाया था. इस किरदार को उन्होंने अमर कर दिया. ‘शोले’ गांव की कहानी थी तो ‘शान’ की स्टोरी शहर पर बेस्ड थी.

शान फिल्म दिसंबर 1980 में रिलीज हुई थी. फिल्म में अमिताभ बच्चन का अंदाज ‘शोले’ जैसा ही था. सबसे बड़े बजट, सबसे बड़े स्टारकास्ट, सबसे बड़ी उम्मीदों के साथ फिल्म सिनेमाघरों में आई. फिल्म की कहानी बदले की थी. बड़े भाई के कत्ल का बदला अमिताभ बच्चन लेते हैं. म्यूजिक आरडी बर्मन का था. कुल 7 गाने थे. इस’यम्मा यम्मा’, ‘प्यार करने वाले जीते हैं शान से’ और ‘जानू मेरी जान’ जैसे गाने पॉप्युलर हुए. गीतकार आनंद बख्शी थे.

‘शान’ में शाकाल का जो अड्डा दिखाया गया वो स्टेप होल्म था. यह ब्रिस्टल चैनल में स्थित एक छोटा-निर्जन ब्रिटिश द्वीप है जो समरसेट, इंग्लैंड के तट से दूर है. शान फिल्म की एडिटिंग, कैमरा वर्क, गीत-संगीत सबकुछ बेमिसाल था लेकिन फिल्म में इमोशन नहीं था. फिल्म में ऐसा कुछ नहीं था जिससे दर्शक जुड़ाव महसूस करें. यही कमी फिल्म पर भारी पड़ी. पहला हफ्ता हाउसफुल रहा लेकिन दूसरे वीक में कलेक्शन गिर गया. शान फिल्म का बजट करीब 4.25 करोड़ था. मूवी ने इतना की कलेक्शन किया था. ऐसे में फिल्म बेलो एवरेज (औसत से कम) करार दी गई. महंगा सेट, बड़ी स्टारकास्ट दर्शकों को लुभाने में कामयाब नहीं हो सके. हालांकि यह फिल्म रिपीट रन में बहुत कामयाब रही. यह फिल्म 1980 में कमाई के मामले में 5वें नंबर पर रही थी.

